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अलीगढ़ के दंपती ने दिया था मोदी को अवार्ड
Thu, 17 Jan 2019 01:57 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Thu, 17 Jan 2019 01:57 AM IST
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पीएम मोदी को फिलिप काेटलर अवार्ड से सम्मानित करते अमुवि के पूर्व छात्र तौसीफ जियाउद्दीन
- फोटो : file photo
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड देने वालों में अलीगढ़ के तौसीफ जियाउद्दीन एवं उनकी पत्नी अना शामिल थे। दोनों एएमयू के पूर्व छात्र हैं और अब सऊदी अरब में रहते हैं। अलीगढ़ कनेक्शन निकलने के बाद एएमयू एवं आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का बाजार गरम है। जारी चित्र में अना स्कार्फ बांधे हुए हैं जबकि उनके पति तौसीफ सूट पहले सबसे आगे खड़े हुए अवार्ड देते हुए दिख रहे हैं।
गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। जिस समय प्रधानमंत्री को यह अवार्ड दिया गया, उस समय अलीगढ़ के सर सैयद नगर (फ्रेंड्स कॉलोनी के समीप) निवासी तौसीफ जियाउद्दीन एवं उनकी पत्नी अना पुरस्कार देने वालों में आगे दिख रहे हैं। तौसीफ के पिता स्व. जियाउद्दीन सिद्दीकी एएमयू के वनस्पति विज्ञान से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
तौसीफ एएमयू से पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए। वर्तमान समय में वह इंजीनियर है। वहीं उनकी पत्नी अना एएमयू के एमबीए डिपार्टमेंट से पीएचडी कर चुकी हैं। विभाग के शिक्षकों का कहना है कि वह बहुत अच्छी छात्रा रही हैं। वर्तमान समय में वह सऊदी अरब में अध्यापिका हैं। एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि तौसीफ एएमयू से पढ़े हैं। उनके पिता एएमयू में प्रोफेसर थे।
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उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड मिलने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा तंज कसे जाने के बाद यह मामला चर्चा में है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि यह अवार्ड अलीगढ़ की एक गुमनाम कंपनी द्वारा समर्थित है।
ससलेंस की वेबसाइट पर दर्ज पते से दोदपुर में नहीं मिला कोई दफ्तर
पीएम मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड देने वाले वर्ल्ड मार्केटिंग समिट ग्रुप की सहयोगी संस्था ससलेंस रिसर्च इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा ट्वीट किए जाने के बाद जब संस्था ससलेंस के अलीगढ़ के दोदपुर स्थित पते की खोज शुरू हुई तो उस पते पर ऐसी किसी संस्था का नामो-निशां नहीं मिला।
इस फिलिप कोटलर अवार्ड में सहयोगी रही ससलेंस रिसर्च इंटरनेशनल की वेबसाइट पर उसका पता दोदपुर अलीगढ़ लिखा गया है। जब पीएम मोदी से जुड़ कर अवार्ड की बात सुर्खियों में आई तो दोदपुर के पते पर ससलेंस का दफ्तर तलाशा गया। दोदपुर की अहमद नगर गली के मकान नंबर 51 में कंपनी का कोई दफ्तर संचालित नहीं था। यहां मकान पर डा. अजरा खान का बोर्ड जरूर लगा है। पूछताछ में पता चला कि डा. अजरा किसी अन्य जनपद में तैनात हैं। मियां बीवी दोनों ही बाहर रहते हैं। दरवाजा खटखटाने पर एक महिला और कुछ अन्य लोग बाहर आए।
उनसे ससलेंस के बारे में पूछने पर उन्होंने सिरे से मना कर दिया कि वे उक्त कंपनी के बारे में कुछ नहीं जानते। महिला पुरुषों ने मिल कर मीडियाकर्मियों को चलता कर दिया। इसके बाद वेबसाइट के पते पर लिखे मोबाइल नंबर पर काल करते ही वो भी स्विच आफ हो गया। जब चर्चा एसएसपी तक पहुंची तो उन्होंने सीओ एलआईयू को जांच के वास्ते भेजा। सीओ भी कोई नई बात नहीं बता सके। इतना जरूर तथ्य निकला कि कुछ लोग कुछ माह पहले मकान में किराये के वास्ते आए थे, मगर उन्हें मकान नहीं मिला तो लौट गए। वह कौन लोग थे, कोई नहीं जानता। एसएसपी आकाश कुलहरि ने कहा कि उनसे कोई जानकारी तो नहीं मांगी गई। मगर चर्चाओं को ध्यान में रखकर पता कराया गया था। यह भी संभव है कि उक्त कंपनी का आफिस का पता बदल गया हो।
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गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। जिस समय प्रधानमंत्री को यह अवार्ड दिया गया, उस समय अलीगढ़ के सर सैयद नगर (फ्रेंड्स कॉलोनी के समीप) निवासी तौसीफ जियाउद्दीन एवं उनकी पत्नी अना पुरस्कार देने वालों में आगे दिख रहे हैं। तौसीफ के पिता स्व. जियाउद्दीन सिद्दीकी एएमयू के वनस्पति विज्ञान से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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तौसीफ एएमयू से पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए। वर्तमान समय में वह इंजीनियर है। वहीं उनकी पत्नी अना एएमयू के एमबीए डिपार्टमेंट से पीएचडी कर चुकी हैं। विभाग के शिक्षकों का कहना है कि वह बहुत अच्छी छात्रा रही हैं। वर्तमान समय में वह सऊदी अरब में अध्यापिका हैं। एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि तौसीफ एएमयू से पढ़े हैं। उनके पिता एएमयू में प्रोफेसर थे।
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उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड मिलने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा तंज कसे जाने के बाद यह मामला चर्चा में है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि यह अवार्ड अलीगढ़ की एक गुमनाम कंपनी द्वारा समर्थित है।
ससलेंस की वेबसाइट पर दर्ज पते से दोदपुर में नहीं मिला कोई दफ्तर
पीएम मोदी को फिलिप कोटलर अवार्ड देने वाले वर्ल्ड मार्केटिंग समिट ग्रुप की सहयोगी संस्था ससलेंस रिसर्च इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा ट्वीट किए जाने के बाद जब संस्था ससलेंस के अलीगढ़ के दोदपुर स्थित पते की खोज शुरू हुई तो उस पते पर ऐसी किसी संस्था का नामो-निशां नहीं मिला।
इस फिलिप कोटलर अवार्ड में सहयोगी रही ससलेंस रिसर्च इंटरनेशनल की वेबसाइट पर उसका पता दोदपुर अलीगढ़ लिखा गया है। जब पीएम मोदी से जुड़ कर अवार्ड की बात सुर्खियों में आई तो दोदपुर के पते पर ससलेंस का दफ्तर तलाशा गया। दोदपुर की अहमद नगर गली के मकान नंबर 51 में कंपनी का कोई दफ्तर संचालित नहीं था। यहां मकान पर डा. अजरा खान का बोर्ड जरूर लगा है। पूछताछ में पता चला कि डा. अजरा किसी अन्य जनपद में तैनात हैं। मियां बीवी दोनों ही बाहर रहते हैं। दरवाजा खटखटाने पर एक महिला और कुछ अन्य लोग बाहर आए।
उनसे ससलेंस के बारे में पूछने पर उन्होंने सिरे से मना कर दिया कि वे उक्त कंपनी के बारे में कुछ नहीं जानते। महिला पुरुषों ने मिल कर मीडियाकर्मियों को चलता कर दिया। इसके बाद वेबसाइट के पते पर लिखे मोबाइल नंबर पर काल करते ही वो भी स्विच आफ हो गया। जब चर्चा एसएसपी तक पहुंची तो उन्होंने सीओ एलआईयू को जांच के वास्ते भेजा। सीओ भी कोई नई बात नहीं बता सके। इतना जरूर तथ्य निकला कि कुछ लोग कुछ माह पहले मकान में किराये के वास्ते आए थे, मगर उन्हें मकान नहीं मिला तो लौट गए। वह कौन लोग थे, कोई नहीं जानता। एसएसपी आकाश कुलहरि ने कहा कि उनसे कोई जानकारी तो नहीं मांगी गई। मगर चर्चाओं को ध्यान में रखकर पता कराया गया था। यह भी संभव है कि उक्त कंपनी का आफिस का पता बदल गया हो।