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अलीगढ़ः जट्टारी के 45 कारसेवकों ने कल्याण सिंह के साथ जेल में बिताए थे 17 दिन
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जट्टारी के रामलीला मैदान में कारसेवकों के सम्मान समारोह में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित युवा।
- फोटो : HAZIYAPUR
केशव मालान
अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की तैयारी जोरों पर हैं। पांच अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन किया जाना हैं। प्रधानमंत्री अयोध्या जाकर शिलान्यास करेंगे। इस माहौल में उन कारसेवकों की यादें भी ताजा हो गईं जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या जाकर अपनी जान जोखिम में डाली थी। कुछ ऐसी ही यादें हैं सन 1990 की, जब जट्टारी से गए 45 कारसेवकों ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ इलाहाबाद (प्रयागराज) की नैनी जेल में 17 दिन बिताए थे।
45 कारसेवकों का नेतृत्व करने वाले कस्बा जट्टारी निवासी सेवानिवृत्त अध्यापक देवेन्द्रपाल सिंह बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों से मिली जानकारी के बाद लोगों को तैयार किया। 20 अक्टूबर 1992 को 45 कारसेवकों के साथ ट्रेन से पहले लखनऊ पहुंचे। वहां से फैजाबाद के लिए चल दिए। लेकिन रास्ते में ही ट्रेन की चेन खींचकर हम सभी उतर गए और गोंडा जिले में मानिकपुर तहसील के बधियापुर गांव में पहुंच गए। वहां पर लोगों ने हमें भोजन कराया। इसी बीच गांव के ही एक युवक ने हमारी जानकारी पुलिस को दे दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स ने चारों ओर से बधियापुर गांव को घेर लिया। वे सभी कारसेवकों को थाने ले गए। तीन दिन तक एक अस्थाई जेल में रखा गया। उसके बाद इलाहाबाद की नैनी जेल में भेज दिया गया।
30 अक्टूबर को अयोध्या में भारी संघर्ष के बीच भगवाध्वज फहराकर कारसेवा प्रारंभ की गई। दो नवंबर को कारसेवा के दौरान पुलिस फोर्स की गोलीबारी से कई कारसेवक मारे गए थे। इसके चलते तीन नवंबर को कारागार में सामूहिक उपवास रखा गया।
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देवेन्द्रपाल सिंह बताते हैं कारसेवा के लिए जाने वालों में जट्टारी से राजकुमार अग्रवाल, पवन अग्रवाल, डब्बू शर्मा, बलवीर सिंह, मुकेश गर्ग, हजारीलाल और हजियापुर से अशोक कुमार व ब्रह्म सिंह आदि प्रमुख लोग शामिल थे।
जेल में कल्याण सिंह के साथ लगाई थी शाखा
इलाहाबाद की नैनी जेल में बंद करीब साढ़े छह हजार कारसेवकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी थे। जट्टारी निवासी कारसेवक दिनेश पालीवाल ने बताया कि सभी कारसेवक कल्याण सिंह के साथ हर रोज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक घंटे की शाखा लगाते थे। कल्याण सिंह कारसेवकों में जोश भरने के लिए उन्हें संबोधित भी किया करते थे। जेल के अंदर एक ही नारा गूंजता था। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। दिन-रात हरिभक्ति के भजन कीर्तन किए जाते थे।
10 साथियों के साथ जगदीश भगत ने की थी कारसेवा
कस्बा जट्टारी के कजरार रोड निवासी जगदीश भगत ने 6 दिसंबर 1992 को अपने 10 साथियों के साथ अयोध्या गए थे। भगत बताते हैं कि लाखों कारसेवकों ने 72 घंटों में ढांचे में लगी एक-एक ईंट को सरयू नदी में बहा दिया और वहां रातों रात चबूतरा बनाकर रामलला की मूर्ति को विराजमान कर दिया। इसके बाद सभी ने सरयू नदी में स्नान किया था।
मंदिर के निर्माण के लिए किए गए संघर्ष के बाद अब गौरवान्वित और आनंदित महसूस कर रहे हैं । राम मंदिर के निर्माण से भारतीय संस्कृति की विश्व में फिर से पताका फहराएगी।
अशोक कुमार, हजियापुर।
19 दिन तक इलाहाबाद की नैनी जेल में रहे तो पता नहीं था कि कब लौटेंगे। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे वाला नारा हमारा आज पूरा हो गया है। पांच अगस्त को घी के दीपक जलाकर दीपावली मनाएंगे। -
दिनेश पालीवाल उर्फ दिन्नू, जट्टारी।
6 दिसंबर 1990 को लगातार 72 घंटे चली कारसेवा के दौरान मेरे हाथ में तीन घंटे तक रामलला रहे थे। जीवन का सपना पूरा हो रहा है।
देवेन्द्रपाल सिंह, सेवानिवृत्त अध्यापक,जट्टारी
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अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की तैयारी जोरों पर हैं। पांच अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन किया जाना हैं। प्रधानमंत्री अयोध्या जाकर शिलान्यास करेंगे। इस माहौल में उन कारसेवकों की यादें भी ताजा हो गईं जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या जाकर अपनी जान जोखिम में डाली थी। कुछ ऐसी ही यादें हैं सन 1990 की, जब जट्टारी से गए 45 कारसेवकों ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ इलाहाबाद (प्रयागराज) की नैनी जेल में 17 दिन बिताए थे।
45 कारसेवकों का नेतृत्व करने वाले कस्बा जट्टारी निवासी सेवानिवृत्त अध्यापक देवेन्द्रपाल सिंह बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों से मिली जानकारी के बाद लोगों को तैयार किया। 20 अक्टूबर 1992 को 45 कारसेवकों के साथ ट्रेन से पहले लखनऊ पहुंचे। वहां से फैजाबाद के लिए चल दिए। लेकिन रास्ते में ही ट्रेन की चेन खींचकर हम सभी उतर गए और गोंडा जिले में मानिकपुर तहसील के बधियापुर गांव में पहुंच गए। वहां पर लोगों ने हमें भोजन कराया। इसी बीच गांव के ही एक युवक ने हमारी जानकारी पुलिस को दे दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स ने चारों ओर से बधियापुर गांव को घेर लिया। वे सभी कारसेवकों को थाने ले गए। तीन दिन तक एक अस्थाई जेल में रखा गया। उसके बाद इलाहाबाद की नैनी जेल में भेज दिया गया।
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30 अक्टूबर को अयोध्या में भारी संघर्ष के बीच भगवाध्वज फहराकर कारसेवा प्रारंभ की गई। दो नवंबर को कारसेवा के दौरान पुलिस फोर्स की गोलीबारी से कई कारसेवक मारे गए थे। इसके चलते तीन नवंबर को कारागार में सामूहिक उपवास रखा गया।
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देवेन्द्रपाल सिंह बताते हैं कारसेवा के लिए जाने वालों में जट्टारी से राजकुमार अग्रवाल, पवन अग्रवाल, डब्बू शर्मा, बलवीर सिंह, मुकेश गर्ग, हजारीलाल और हजियापुर से अशोक कुमार व ब्रह्म सिंह आदि प्रमुख लोग शामिल थे।
जेल में कल्याण सिंह के साथ लगाई थी शाखा
इलाहाबाद की नैनी जेल में बंद करीब साढ़े छह हजार कारसेवकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी थे। जट्टारी निवासी कारसेवक दिनेश पालीवाल ने बताया कि सभी कारसेवक कल्याण सिंह के साथ हर रोज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक घंटे की शाखा लगाते थे। कल्याण सिंह कारसेवकों में जोश भरने के लिए उन्हें संबोधित भी किया करते थे। जेल के अंदर एक ही नारा गूंजता था। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। दिन-रात हरिभक्ति के भजन कीर्तन किए जाते थे।
10 साथियों के साथ जगदीश भगत ने की थी कारसेवा
कस्बा जट्टारी के कजरार रोड निवासी जगदीश भगत ने 6 दिसंबर 1992 को अपने 10 साथियों के साथ अयोध्या गए थे। भगत बताते हैं कि लाखों कारसेवकों ने 72 घंटों में ढांचे में लगी एक-एक ईंट को सरयू नदी में बहा दिया और वहां रातों रात चबूतरा बनाकर रामलला की मूर्ति को विराजमान कर दिया। इसके बाद सभी ने सरयू नदी में स्नान किया था।
मंदिर के निर्माण के लिए किए गए संघर्ष के बाद अब गौरवान्वित और आनंदित महसूस कर रहे हैं । राम मंदिर के निर्माण से भारतीय संस्कृति की विश्व में फिर से पताका फहराएगी।
अशोक कुमार, हजियापुर।
19 दिन तक इलाहाबाद की नैनी जेल में रहे तो पता नहीं था कि कब लौटेंगे। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे वाला नारा हमारा आज पूरा हो गया है। पांच अगस्त को घी के दीपक जलाकर दीपावली मनाएंगे। -
दिनेश पालीवाल उर्फ दिन्नू, जट्टारी।
6 दिसंबर 1990 को लगातार 72 घंटे चली कारसेवा के दौरान मेरे हाथ में तीन घंटे तक रामलला रहे थे। जीवन का सपना पूरा हो रहा है।
देवेन्द्रपाल सिंह, सेवानिवृत्त अध्यापक,जट्टारी