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दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए: रचनाकार शहरयार थे शहर के यार, पुण्यतिथि आज
Thu, 13 Feb 2025 07:07 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 13 Feb 2025 07:07 AM IST
सार
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित अखलाक मोहम्मद खान शहरयार मस्तमौला थे। उन्होंने ‘दामन’, ‘फासले’, ‘द नेमसेक’ आदि फिल्मों के लिए गीत लिखे, मगर मन फिल्मी दुनिया में रमा नहीं।
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अखलाक मोहम्मद खान शहरयार
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
‘उमराव जान’ के गीत ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए’, ‘इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं’, के रचनाकार शहरयार के शहर के यार थे, जिनकी पुण्यतिथि 13 फरवरी को है। शहरयार एएमयू के तीसरे अदीब थे, जिन्हें साहित्य में सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ मिला। उनसे पहले कुर्रतुल ऐन हैदर और अली सरदार जाफरी को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है। आंवला में 16 जून को 1936 को जन्मे शहरयार ने 13 फरवरी 2012 को आखिरी सांस ली थी।
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एएमयू के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमरुल हुदा फरीदी ने कहा कि शहरयार जितने अच्छे शिक्षक थे, उतने ही अच्छे इन्सान भी थे। वह यारों के यार थे। वह अपने उम्र और नई नस्ल के भी शायर थे। उनकी शायरी प्रकृति के काफी करीब थी। सर सैयद एकेडमी के निदेशक प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि शहरयार बड़े शायर थे। उन्होंने अदब के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया है।
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वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमकुमार ने कहा कि शहरयार बहुत अच्छे इन्सान थे। वह मस्तमौला थे। उन्होंने ‘दामन’, ‘फासले’, ‘द नेमसेक’ आदि फिल्मों के लिए गीत लिखे, मगर मन फिल्मी दुनिया में रमा नहीं। उन्होंने कहा कि शहरयार ने बताया, मेरा एक उसूल है कि मैं किसी ऐसी फिल्म में गाने नहीं लिख सकता, जिसमें गाना कहानी का हिस्सा न हो और जिसमें शायरी की गुंजाइश न हो। शायरी का शहरयार (बादशाह) बना दिया।
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