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हिटलर मैडम कौन: छात्रा की मौत के बाद साथी गुस्से में..स्कूल के बाहर प्रदर्शन, उठ रहे ये 10 सवाल

Tue, 07 May 2024 04:31 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 07 May 2024 04:31 AM IST
सार

ऑवर लेडी फातिमा की दसवीं की सिविल लाइंस निवासी दसवीं की छात्रा ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली थी।परिवार वाले उसे जेएन मेडिकल कॉलेज भी लेकर गए। मगर वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में परिवार ने जरूर चुप्पी साध ली। मगर साथी छात्र-छात्रा इस बात को उसी दिन से मानने को तैयार नहीं हैं। वह लगातार स्कूल प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जता रहे हैं।

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After student death, friends get angry, protest outside school
ऑवर लेडी फातिमा स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते छात्र-छात्राएं - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ में रामघाट रोड स्थित ऑवर लेडी फातिमा की छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने का मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। 6 मई को तमाम साथी छात्र-छात्राओं ने सुबह सुबह स्कूल के गेट पर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। हालाकि पुलिस पहले से अलर्ट थी और उन्हें समझाकर शांत कराया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने स्कूल प्रधानाचार्य से छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात कराई। तब प्रधानाचार्य की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया। तब जाकर छात्र वहां से लौटे।

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घटनाक्रम के अनुसार तीन दिन पहले रामघाट रोड स्थित ऑवर लेडी फातिमा की दसवीं की सिविल लाइंस निवासी दसवीं की छात्रा ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली थी। हालाकि जानकारी होते ही परिवार वाले उसे जेएन मेडिकल कॉलेज भी लेकर गए। मगर वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में परिवार ने जरूर चुप्पी साध ली। परिवार ने यही कहा कि बच्ची पढ़ाई के बोझ तले मानसिक रूप से परेशान थी। इसी के चलते उसने आत्महत्या कर ली। मगर साथी छात्र-छात्रा इस बात को उसी दिन से मानने को तैयार नहीं हैं। वह लगातार स्कूल प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जता रहे हैं।
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इसी नाराजगी के चलते 5 मई की रात से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई। जिसमें 6 मई की सुबह दस बजे से स्कूल के गेट पर प्रदर्शन के लिए छात्र छात्राओं से एकत्रित होने की अपील की गई। 6 मई की सुबह दस बजे से काफी संख्या में छात्र-छात्रा एकत्रित हुए और उन्होंने वहां प्रदर्शन किया। हाथों में मांगें पूरी करने और न्याय मांगने संबंधी तख्तियां लेकर छात्र छात्रा खड़े थे। इस दौरान उन्होंने स्कूल में प्रशिक्षित काउंसलर की तैनाती की मांग की। साथ में कहा कि अनुशासन के नाम पर छात्र-छात्राओं का उत्पीड़न होता है। छात्रा की मौत के लिए भी स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार बताया। 

कहा कि जब छात्रा से परिवार को सूचना न देने का अनुरोध किया था तो क्यों बताया गया। पहले उसकी काउंसलिंग होनी थी। किसी को क्या पता कि किस बच्चे के अभिभावक किस रवैये के हैं। इस दौरान पुलिस ने छात्र-छात्राओं का प्रतिनिधि मंडल प्रधानाचार्य से मिलवाया। वहां से आश्वासन मिलने पर सभी छात्र-छात्रा लौटे। इधर, इससे पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस रात भर परेशान रही। रात में ही पुलिस आत्महत्या करने वाली बच्ची के घर पहुंची और परिवार से बात की। मगर परिवार ने खुद को इस प्रदर्शन से अलग बताया। 6 मई सुबह छात्र नेता बल्देव चौधरी शीटू के घर भी पुलिस पहुंची। पुलिस ने उनसे संवाद किया तो उन्होंने खुद को इससे अलग बताया। मगर बाद में प्रदर्शन की जानकारी पर बल्देव चौधरी शीटू, जय यादव, सुमित आदि वहां पहुंचे और उन्होंने बच्चों से बात की। उनकी बात का समर्थन किया।

अफवाह नहीं-ये सच है, प्रधानाचार्य को हटाया जाए

छात्र-छात्राओं ने बताया कि जिस बात को अफवाह बताया जा रहा है, वह अफवाह नहीं सच है। स्कूल में आए दिन होता है कि छात्र-छात्रा अगर आपस में बात करते हैं तो स्कूल के शिक्षक उसे गलत तरीके से पेश करते हैं। उन्हें समझने या जानने की कोशिश नहीं करते कि क्या बातें कर रहे थे। इस प्रकरण में भी इसी तरह की बात हुई। इसलिए इस आत्महत्या के लिए स्कूल ही जिम्मेदार है। प्रधानाचार्य को हटाया जाए।
प्रदर्शन ओएलएफ

हमारे स्कूल के बच्चों ने प्रदर्शन किया है। उन्होंने कुछ बातें हमारे समक्ष रखी हैं। उनकी मांगों को पूरा करने के लिए एक कमेटी बनाई जा रही है। वह कमेटी उस पर निर्णय लेगी और उसके अनुसार आगे कदम उठाया जाएगा। छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा।-विद्यालय प्रधानाचार्य
छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन की सूचना पर हम मौके पर गए। उनकी स्कूल प्रबंधन से वार्ता कराई। उन्होंने भरोसा दिया है। रहा सवाल छात्रा की मौत के कारणों का तो परिवार पहले ही दिन से एक ही बात पर टिका हुआ है। फिर भी हम हर पहलू पर नजर रखे हुए हैं।-अमृत जैन, एएसपी/सीओ तृतीय
अच्छा होता कि मुझे नजरबंद करने की अपेक्षा स्कूल की प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर पुलिस प्रशासन छात्र हित में खड़े होने का संदेश देता। 48 घंटे का समय अलीगढ़ पुलिस को दिया गया है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आत्महत्या को मजबूर करने वाली आरोपी प्रधानाचार्य को गिरफ्तार करे। अन्यथा आंदोलन को बाध्य होंगे, जिसका जिम्मेदार अलीगढ़ प्रशासन होगा। प्रशासन विद्यार्थियों के शोषण को रोकने हेतु जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन करें।-बल्देव चौधरी शीटू पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी। 
स्कूल प्रबंध तंत्र द्वारा छात्र-छात्रा की बातचीत पर प्रतिबंध लगाना साफ दर्शाता है कि यह स्कूल सरिया कानून से चलता है। एक छात्रा को प्रधानाचार्य द्वारा सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उसकी मौत के लिए स्कूल प्रबंध तंत्र जिम्मेदार है। पुलिस को पिछले दिनों हुई घटनाओं का सीसीटीवी सार्वजनिक करना चाहिए। स्कूल के बाहर एक शिकायत पेटिका लगानी चाहिए, जिसको सिर्फ पुलिस खोल सके।-जय यादव छात्र नेता 
छात्रा की आत्महत्या करने से साफ है कि स्कूल प्रबंधन व प्रधानाचार्य इसके जिम्मेदार हैं। इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया जाए और तत्काल गिरफ्तारी हो। जिला विद्यालय निरीक्षक को भी अपने स्तर से कदम उठाना चाहिए। मैं एसएसपी व जिला विद्यालय निरीक्षक से मुलाकात कर इसकी मांग करूंगा।-अमित गोस्वामी, भाजयुमो उपाध्यक्ष छात्र नेता।

वह हिटलर मैडम कौन जिनके असंवेदनशील व्यवहार के बाद बच्ची ने मौत को गले लगाया

रामघाट रोड स्थित शहर का एक नामी स्कूल का प्रबंधन एक छात्रा की खुदकुशी के बाद सवालों के घेरे में है। स्कूल वालों का कहना है कि छात्रा पढ़ाई में कमजोर थी, इसलिए उसने मौत को गले लगा लिया। कितनी आसानी से स्कूल ने पल्ला झाड़ लिया। इस स्कूल के बारे में बताते चलें कि इसमें दाखिले के लिए ही एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। प्रवेश पाने वाला छात्र पढ़ाई-लिखाई ही नहीं बोलने और व्यक्तित्व में भी हर तरीके से अव्वल होना चाहिए।
प्रदर्शन
उठ रहे ये 10 सवाल, जिनके उत्तर स्कूल प्रबंधन के पास नहीं

  1. जब स्कूल प्रबंधन इतना ठोक-बजा कर प्रवेश लेता है तो खुदकुशी करने वाली छात्रा कमजोर कैसे, इसका अर्थ यही हुआ कि या तो आपकी दाखिले की प्रक्रिया में कोई खोट है, या हकीकत कुछ और है जिसे छुपाया जा रहा है।
  2. अगर छात्रा पढ़ाई में कमजोर थी तो क्या स्कूल प्रबंधन ने इसकी सूचना छात्रा के परिजनों को लिखित रूप से दी थी, अगर नहीं तो जाहिर है कि बात कुछ और है। स्कूल बहाना किसी और चीज का बना रहा है।
  3. अगर स्कूल प्रबंधन ने छात्रा के परिजनों को उसके कमजोर होने की जानकारी दी थी तो उसने छात्रा की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के क्या प्रयास किए।
  4. श्रेष्ठ बुद्धिलब्धि (आईक्यू) वाले बच्चों का दाखिला लेकर अच्छा परिणाम लाना कौन सी बड़ी बात है। श्रेष्ठता तो तब होती जब आप औसत बच्चे को भी अपने प्रयास से श्रेष्ठ बना दें। क्या स्कूल प्रबंधन को अपनी शैक्षिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।
  5. कोएजुकेशन वाले स्कूल में बच्चे-बच्चियों के बीच बातचीत स्वाभाविक है। अगर बच्चे-बच्चियों के आपस में मेलजोल और बातचीत से इतनी ही आपत्ति है तो स्कूल प्रबंधन को बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग स्कूल खोलने चाहिए।
  6. आपने अनुशासन के नाम पर ऐसे लोगों की कमेटी क्यों बना रखी है, जो अपनी उग्रता के लिए कुख्यात हैं। क्या स्कूल प्रबंधन को पता है कि एक महिला शिक्षक को स्कूल के विद्यार्थी हिटलर मैडम कहते हैं। अनुशासन तो ठीक है, लेकिन जब यह हिटलरशाही तक पहुंच जाए तो स्थिति सोचनीय हो जाती है। अगर स्कूल प्रबंधन को अपनी हिटलर मैडम के बारे में जानकारी नहीं है तो इसे चिराग तले अंधेरा कहते हैं।
  7. स्कूल प्रबंधन घटनाओं को रोकने में तो सक्षम नहीं है लेकिन उसके बाद उसको मैनेज बखूबी करता है। क्या यह सच नहीं है कि इस स्कूल में पिटाई की वजह से कुछ ही दिन पहले एक छात्रा के कान का पर्दा फट गया था। छात्रा के भविष्य की बातों में उलझा कर परिजनों को शांत नहीं कर दिया गया।
  8. पढ़ाई में कमजोर होने पर छात्रा के खुदकुशी करने की बात सच्ची होती तो क्या इस स्कूल के छात्रों में इतना आक्रोश होता।
  9. इस घटना के बाद स्कूल के विद्यार्थियों और परिजनों के व्हाट्सएप ग्रुप पर कौन-कौन से संदेश चल रहे हैं, क्या स्कूल प्रबंधन इससे वाकिफ है।
  10. स्कूल प्रबंधन को किस बात का अंदेशा था कि जिसने-पुलिस प्रशासन को इस बात के लिए मजबूर किया कि वह शहर भर के छात्र नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखे और स्कूल के खिलाफ धरना प्रदर्शन से रोके। यहां यह भी जिक्र करते चलें कि जिला और पुलिस प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। इसीलिए स्कूल प्रबंधन परिजनों की ज्यादा परवाह नहीं करता।
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