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फुटपाथ लघु व्यापार मंडल समिति की खबर
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:03 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
फुटपाथ लघु व्यापार मंडल समिति के संस्थापक मास्टर राजवीर सिंह सुमन ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि शहर में वेंडिंग जोन नहीं होने के कारण अतिक्रमण की समस्या बढ़ रही है। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से पथ विक्रेता कानून 2014 लागू नहीं किया जा रहा है। यदि यह कानून पूरे जिले में लागू हो जाता है तो शहर को 40 फीसदी अतिक्रमण से मुक्ति मिल जाएगी।
समिति ने कई ज्ञापन नगर निगम में दिए हैं, लेकिन वहां से इस कानून को लागू करने में उदासीनता बरती जा रही है। पत्र में कहा गया है कि शहर में 12 हजार से ज्यादा फुटपाथ व्यापारी हैं।
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जिनका सर्वेक्षण सन 2015 से अब तक कोलकाता की एक एजेंसी द्वारा किया गया है। सर्वेक्षण मात्र 5470 लोगों का हुआ है। छह हजार वेंडर अभी भी सर्वेक्षण से छूट गए हैं। 5470 वेंडरों में से भी मात्र 3400 वेंडरों के ही बायोमेट्रिक कार्ड बन पाए हैं। पत्र में कहा है कि जब तक वेंडिंग जोनों का निर्धारण नहीं हो जाता है।
तब तक वेेंडर के कार्य स्थल के आगे नीली या लाल रेखा ही खिंचवा दी जाए। क्षेत्रीय पुलिस द्वारा धारा 34 में मनमाने ढंग से चालान काटा जाता है। जो कि गलत है। इसको रुकवाया जाए। पत्र में सुनील वर्मा, रामलाल, गौरव, राहुल, जितेंद्र सैनी, प्रदीप कुमार, इस्लाम, नजर, पंकज, शान मोहम्मद आदि के हस्ताक्षर हैं।
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फुटपाथ लघु व्यापार मंडल समिति के संस्थापक मास्टर राजवीर सिंह सुमन ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि शहर में वेंडिंग जोन नहीं होने के कारण अतिक्रमण की समस्या बढ़ रही है। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से पथ विक्रेता कानून 2014 लागू नहीं किया जा रहा है। यदि यह कानून पूरे जिले में लागू हो जाता है तो शहर को 40 फीसदी अतिक्रमण से मुक्ति मिल जाएगी।
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समिति ने कई ज्ञापन नगर निगम में दिए हैं, लेकिन वहां से इस कानून को लागू करने में उदासीनता बरती जा रही है। पत्र में कहा गया है कि शहर में 12 हजार से ज्यादा फुटपाथ व्यापारी हैं।
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जिनका सर्वेक्षण सन 2015 से अब तक कोलकाता की एक एजेंसी द्वारा किया गया है। सर्वेक्षण मात्र 5470 लोगों का हुआ है। छह हजार वेंडर अभी भी सर्वेक्षण से छूट गए हैं। 5470 वेंडरों में से भी मात्र 3400 वेंडरों के ही बायोमेट्रिक कार्ड बन पाए हैं। पत्र में कहा है कि जब तक वेंडिंग जोनों का निर्धारण नहीं हो जाता है।
तब तक वेेंडर के कार्य स्थल के आगे नीली या लाल रेखा ही खिंचवा दी जाए। क्षेत्रीय पुलिस द्वारा धारा 34 में मनमाने ढंग से चालान काटा जाता है। जो कि गलत है। इसको रुकवाया जाए। पत्र में सुनील वर्मा, रामलाल, गौरव, राहुल, जितेंद्र सैनी, प्रदीप कुमार, इस्लाम, नजर, पंकज, शान मोहम्मद आदि के हस्ताक्षर हैं।