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गजब.. ऑपरेटर से कराया काम, खुद डकार गए दाम
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:28 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
केंद्र सरकार की एक योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर रखे गए कंप्यूटर आपरेटरों से डाटा फीडिंग तो करा ली गई, लेकिन उनको दिए जाने वाला पैसा फर्जी बिलों के आधार पर कुछ लोगों ने खुद ही डकार लिया है। इस बात को लेकर डाटा फीडिंग आपरेटरों में जबरदस्त आक्रोश है जो कभी भी फूट सकता है।
इस पूरे मामले की शिकायत जनहित मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडेय ने स्वास्थ्य मंत्री से की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि मदर्स एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम में अलीगढ़ जिले की रैंकिंग में सुधार हुआ है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने विभाग के सभी संविदा कंप्यूटर आपरेटरों को लगा दिया था।
सभी ने योजना से संबंधित डाटा फीड किया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने संविदा कंप्यूटर आपरेटरों का पैसा उन्हें नहीं दिया। बल्कि फर्जी बिल लगाकर पैसा खुद ले लिया। इस बात की भनक जब कंप्यूटर आपरेटरों को लगी तो उनमें रोष फैल गया है।
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दागियों को फिर से ठेका
पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग में दागियों को फिर से वाहन और लांड्री का ठेका दे दिया गया है। यह वही कार्यदायी संस्थाएं हैं जिनका न सिर्फ भुगतान रोका जा चुका है, बल्कि उनको काली सूची में भी डाला जा चुका है।
-मेरे पास कोई भी बिल का भुगतान तभी होता है जब उसे सीएमओ और नोडल अधिकारी वैरीफाई कर देते हैं। यह बिल भी मार्च महीने में आया था और दोनों स्तरों पर वैरीफाई था। अब अगर इसमें कोई अनियमितता की बात सामने आती है तो उसकी जांच करायी जाएगी। जहां तक दागियों को ठेका देने का मामला है तो टेंडर से पहले शपथ पत्र लिया जाता है, जिसमें निविदा डालने वाला शपथपत्र देता है कि उसके खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही है। अगर टेंडर की शर्तों या झूठा शपथ पत्र किसी ने लगाया है तो उसके खिलाफ विधिक कार्यवाही होगी।
- मनोज कुमार, मुख्य लेखाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग।
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केंद्र सरकार की एक योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर रखे गए कंप्यूटर आपरेटरों से डाटा फीडिंग तो करा ली गई, लेकिन उनको दिए जाने वाला पैसा फर्जी बिलों के आधार पर कुछ लोगों ने खुद ही डकार लिया है। इस बात को लेकर डाटा फीडिंग आपरेटरों में जबरदस्त आक्रोश है जो कभी भी फूट सकता है।
इस पूरे मामले की शिकायत जनहित मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडेय ने स्वास्थ्य मंत्री से की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि मदर्स एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम में अलीगढ़ जिले की रैंकिंग में सुधार हुआ है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने विभाग के सभी संविदा कंप्यूटर आपरेटरों को लगा दिया था।
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सभी ने योजना से संबंधित डाटा फीड किया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने संविदा कंप्यूटर आपरेटरों का पैसा उन्हें नहीं दिया। बल्कि फर्जी बिल लगाकर पैसा खुद ले लिया। इस बात की भनक जब कंप्यूटर आपरेटरों को लगी तो उनमें रोष फैल गया है।
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दागियों को फिर से ठेका
पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग में दागियों को फिर से वाहन और लांड्री का ठेका दे दिया गया है। यह वही कार्यदायी संस्थाएं हैं जिनका न सिर्फ भुगतान रोका जा चुका है, बल्कि उनको काली सूची में भी डाला जा चुका है।
-मेरे पास कोई भी बिल का भुगतान तभी होता है जब उसे सीएमओ और नोडल अधिकारी वैरीफाई कर देते हैं। यह बिल भी मार्च महीने में आया था और दोनों स्तरों पर वैरीफाई था। अब अगर इसमें कोई अनियमितता की बात सामने आती है तो उसकी जांच करायी जाएगी। जहां तक दागियों को ठेका देने का मामला है तो टेंडर से पहले शपथ पत्र लिया जाता है, जिसमें निविदा डालने वाला शपथपत्र देता है कि उसके खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही है। अगर टेंडर की शर्तों या झूठा शपथ पत्र किसी ने लगाया है तो उसके खिलाफ विधिक कार्यवाही होगी।
- मनोज कुमार, मुख्य लेखाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग।