Gaming App: अलीगढ़ के 18 लाख लोग गेमिंग एप पर लगा रहे हार जीत का दांव, 36 करोड़ फंसे
जिनकी छोटी रकम 100, 200 या 500, 1000 रुपये तक है वह एप में सुरक्षित है। वह एक आसान प्रक्रिया के बाद वापस हो सकती है। मगर जो लोग बड़ी रकम लगाकर रियल मनी ऑफरिंग के जरिये रकम फंसाए हुए थे। उनके विषय में कोई तस्वीर स्पष्ट नहीं हैं।
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बात अजीब मगर बेहद चौंकाने वाली है। अपने अलीगढ़ जिले में 18 लाख से अधिक लोग मोबाइल गेमिंग एप चलाकर रुपयों से हार-जीत का दांव लगा रहे थे। अब सरकार ने इन सभी गेमिंग एप पर प्रतिबंध लगाकर इसके खिलाफ कानून बना दिया है। इसके बाद से इनमें रुपये लगाने वाले अपनी रकम वापसी को लेकर चिंतित हैं। अकेले अपने जिले से इन लोगों के 36 करोड़ से अधिक रुपये फंसे होने का अनुमान है।
संसद में रखी गई रिपोर्ट के आधार पर अभी साइबर टीमों को एमएचए के जरिये प्रदेश या जिला वार इसके आंकड़े जारी होने का इंतजार है कि किस जिले से कितने लोग इन एपों से जुड़े होंगे। साइबर इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार के अनुसार एक अनुमान के तौर पर अलीगढ़ में 18 लाख से अधिक लोग इन गेमों को खेल रहे थे। जिसमें सर्वाधिक युवा व अधेड़ उम्र शामिल हैं। साथ में जिस तरह से आंकड़े पेश किए गए हैं, उसके मुताबिक 36 करोड़ से अधिक रकम अपने जिले के लोगों की फंसे होने का अनुमान है। अब संकेत हैं कि जल्द इस संबंध में प्रदेशवार रिपोर्ट भारत सरकार का केंद्रीयकृत साइबर पोर्टल जारी करेगा। जिससे स्पष्ट होगा कि किस राज्य या जिले से कितने लोग इन गेमों में फंसे होंगे।
केंद्र सरकार के स्तर पर रुपयों की हार-जीत वाली सभी गेमिंग एप के प्रतिबंध को लेकर निर्णय लिया गया है। उसके संबंध में जो भी गाइड लाइन या निर्देश प्राप्त होंगे, उसी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएंगी। हमारी साइबर टीमें भी नजर रखे हुए हैं।-संजीव सुमन, एसएसपी
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छोटी रकम मिलना आसान
इस विषय में जिला पुलिस के साइबर विशेषज्ञ सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि कानून लागू होने के बाद यह तो गेमिंग कंपनियों ने स्पष्ट कर दिया है, कि जिनकी छोटी रकम 100, 200 या 500, 1000 रुपये तक है वह एप में सुरक्षित है। वह एक आसान प्रक्रिया के बाद वापस हो सकती है। मगर जो लोग बड़ी रकम लगाकर रियल मनी ऑफरिंग के जरिये रकम फंसाए हुए थे। उनके विषय में कोई तस्वीर स्पष्ट नहीं हैं। रियल मनी ऑफरिंग के जरिये बड़ा जुआ या बड़ा दांव लगाने वाले लोग अपने खाते से एप को लिंक कर खेलते थे। वे बुकी के रूप में ग्रुप बनाकर भी लोगों को खिलवाते थे। वे एक निवेशक के रूप में इस खेल में शामिल रहते थे। उनकी बड़ी रकम मिलने की संभावना बिल्कुल शून्य है। यह बड़ी रकम लोगों की फंसी है।
जिले के अनगिनत खाते भी हुए फ्रीज
साइबर सेल के इंचार्ज राहुल चौधरी बताते हैं कि बेशक यह एप दो दिन पहले बंद हो गए। मगर जो लोग अपने खातों से एप को जोडक़र रियल मनी ऑफरिंग के जरिये दांव लगाते थे। ऐसे बहुत से लोगों के कुछ दिन पहले तक खाते फ्रीज हुए हैं। अपने जिले में ऐसी दो-चार शिकायतें हर दिन आ रही थीं। इसकी वजह में जब जांच की गई तो पता चला कि इन गेमिंग एप में हार जीत की रकम साइबर ठगी के जरिये भी इधर से उधर हो रही थी। जब साइबर ठगी की रकम किसी जीतने वाले के खाते में पहुंची तो उसे मनी ट्रेल में सामने आने पर फ्रीज किया जाता था। अब ऐसी शिकायतें रुकेंगी।
साइबर टीमों ने शुरू की निगरानी
रुपयों की हार जीत वाले गेम बंद होने व कानून बनने के बाद साइबर टीमें भी इस पर निगरानी कर रही हैं। अभी तक अपने जिले से कोई प्रमोटर या एप संचालक सामने नहीं आया है। अगर आता है तो कार्रवाई की जाएगी।