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अपने ही तालीमी इदारे के शहर में बेगाने हो गए मंटो
Updated Sun, 23 Sep 2018 02:13 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
मशहूर अफसाना निगार सआदत हसन मंटो अपने ही तालीमी इदारे के शहर में बेगाने हो गए हैं। शहर के सिनेमाघरों में उनके जीवन पर बनी फिल्म के लिए कोई जगह नहीं मिली है। इसका प्रमुख कारण कारोबार से जुड़ा होना भी बताया जा रहा है। वहीं मंटो से जुड़े साहित्यकार, उनको पढ़ने वाले स्कॉलर व उनके प्रशंसक शहर के एक भी सिनेमाघर में फिल्म न चलने से मायूस हैं।
सआदत हसन मंटो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 1934 में स्नातक करने आए थे। साहित्य सृजन की शुरुआत भी उन्होंने इसी शहर से की। एएमयू में मंटो की मुलाकात बारी अलीग से हुई। उन्होंने मंटो की रहनुमाई की। उनकी प्रेरणा से मंटो की यहां साहित्य के लिए जहनसाजी (मानसिकता) बनी। बारी साहब इनको सही नजरिए तक ले गए। इस बात का जिक्र मंटो ने अपनी कई सारी किताबों में भी किया है। इसके बाद वह प्रगतिशील लेखन के आंदोलन से जुड़े। सृजन के अंकुर यहीं फूटे और साहित्य की अमूल्य धरोहर बन गए। इसके बावजूद जब मंटो के जीवन पर आधारित फिल्म प्रसिद्ध अभिनेत्री नंदिता दास ने बनाई तो उस फिल्म के लिए अलीगढ़ में एक भी सिनेमाघर नहीं मिला। हालांकि सिने प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फिल्म की स्क्रीनिंग अलीगढ़ में भी हो सकती है।
मंटो जैसी शख्सियत कभी एएमयू का छात्र रही है। इससे विश्वविद्यालय को गर्व है। अलीगढ़ में बहुत से लोग मंटो के चाहने वाले हैं। अगर शहर में फिल्म लगती तो हम और उनके चाहने वाले जरूर देखने जाएंगे। यहां फिल्म जरूर चलनी चाहिए।
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- राहत अबरार, पूर्व पीआरओ व डायरेक्टर ऑफ उर्दू एकेडमी, एएमयू।
प्रोग्रामिंग सेट न होने की वजह से फिल्म नहीं चल पाई है। डिस्ट्रीब्यूटर की डिमांड पर प्राड्यूशर तय करते हैं कि फिल्म चले या नहीं चले। इन्हीं सब के चलते फिल्म अलीगढ़ में नहीं चलाई गई है।
- सुनील शर्मा, मैनेजर डीडी सिनेमा।
इस हफ्ते एक साथ कई फिल्में रिलीज हुई हैं। जाहिर है कि प्रोग्रामिंग सेट न होने के चलते फिल्म नहीं चल पाई है।
- अनिल कुमार शुक्ला, मैनेजर स्टार वर्ल्ड सिनेमा।
मंटो की फिल्म का इंतजार है। ऐसी शानदार शख्सियत के जीवन पर बनी फिल्म बडे़ पर्दे पर देखना रोमांचक होगा।
- अक्षय उपमन्यु, एएमयू जन संचार छात्र
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मशहूर अफसाना निगार सआदत हसन मंटो अपने ही तालीमी इदारे के शहर में बेगाने हो गए हैं। शहर के सिनेमाघरों में उनके जीवन पर बनी फिल्म के लिए कोई जगह नहीं मिली है। इसका प्रमुख कारण कारोबार से जुड़ा होना भी बताया जा रहा है। वहीं मंटो से जुड़े साहित्यकार, उनको पढ़ने वाले स्कॉलर व उनके प्रशंसक शहर के एक भी सिनेमाघर में फिल्म न चलने से मायूस हैं।
सआदत हसन मंटो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 1934 में स्नातक करने आए थे। साहित्य सृजन की शुरुआत भी उन्होंने इसी शहर से की। एएमयू में मंटो की मुलाकात बारी अलीग से हुई। उन्होंने मंटो की रहनुमाई की। उनकी प्रेरणा से मंटो की यहां साहित्य के लिए जहनसाजी (मानसिकता) बनी। बारी साहब इनको सही नजरिए तक ले गए। इस बात का जिक्र मंटो ने अपनी कई सारी किताबों में भी किया है। इसके बाद वह प्रगतिशील लेखन के आंदोलन से जुड़े। सृजन के अंकुर यहीं फूटे और साहित्य की अमूल्य धरोहर बन गए। इसके बावजूद जब मंटो के जीवन पर आधारित फिल्म प्रसिद्ध अभिनेत्री नंदिता दास ने बनाई तो उस फिल्म के लिए अलीगढ़ में एक भी सिनेमाघर नहीं मिला। हालांकि सिने प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फिल्म की स्क्रीनिंग अलीगढ़ में भी हो सकती है।
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मंटो जैसी शख्सियत कभी एएमयू का छात्र रही है। इससे विश्वविद्यालय को गर्व है। अलीगढ़ में बहुत से लोग मंटो के चाहने वाले हैं। अगर शहर में फिल्म लगती तो हम और उनके चाहने वाले जरूर देखने जाएंगे। यहां फिल्म जरूर चलनी चाहिए।
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- राहत अबरार, पूर्व पीआरओ व डायरेक्टर ऑफ उर्दू एकेडमी, एएमयू।
प्रोग्रामिंग सेट न होने की वजह से फिल्म नहीं चल पाई है। डिस्ट्रीब्यूटर की डिमांड पर प्राड्यूशर तय करते हैं कि फिल्म चले या नहीं चले। इन्हीं सब के चलते फिल्म अलीगढ़ में नहीं चलाई गई है।
- सुनील शर्मा, मैनेजर डीडी सिनेमा।
इस हफ्ते एक साथ कई फिल्में रिलीज हुई हैं। जाहिर है कि प्रोग्रामिंग सेट न होने के चलते फिल्म नहीं चल पाई है।
- अनिल कुमार शुक्ला, मैनेजर स्टार वर्ल्ड सिनेमा।
मंटो की फिल्म का इंतजार है। ऐसी शानदार शख्सियत के जीवन पर बनी फिल्म बडे़ पर्दे पर देखना रोमांचक होगा।
- अक्षय उपमन्यु, एएमयू जन संचार छात्र