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अब पुलिस का व्यवहार, भ्रष्टाचार और अनुशासन नियंत्रण करेगी तीसरी आंख
Updated Fri, 31 Aug 2018 02:28 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
वक्त के साथ बदल रही पुलिस स्वयं की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए प्रयास कर रही है। इसी क्रम में अब न सिर्फ थाने बल्कि लिपिकीय स्टाफ सहित पुलिस अधिकारियों के कार्यालय भी कैमरों की जद में लाए जा रहे हैं। यही नहीं थाना प्रभारी का सार्वजनिक मूवमेंट भी अब कैमरे में कैद रहेगा, जिससे अधिकारी कभी भी चेक कर सकते हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले दो या तीन दिन में एडीजी अजय आनंद इस व्यवस्था की शुरुआत करने अलीगढ़ आ सकते हैं।
पुलिस पर अक्सर ही अभद्रता करने, बदजुबानी करने, घर में घुसकर मारपीट करने जैसे आरोप लगते रहते हैं। अधिकांश मामलों में यह आरोप दूसरे पक्ष द्वारा अपना पक्ष भारी रखने के लिए लगाए जाते हैं। जिनका कोई आधार नहीं होता। पुलिस की इसी समस्या को देखते हुए कुछ वर्ष पहले थानों में कैमरे लगाने की शुरुआत हुई थी। अब इससे भी आगे जाते हुए व्यवस्था की गई है कि पुलिस की प्रत्येक गतिविधि कैमरे की नजर में रहेगी।
इससे पुलिस समय पड़ने पर उस फुटेज को साक्ष्य के रूप में भी प्रस्तुत कर सके और अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को गलत सिद्ध कर सके। इसके तहत पुलिस अधिकारियों के क्लर्क स्टाफ के कक्षों में भी कैमरेे लगेंगे। जिससे उन पर नजर रखी जा सके और यहां होने वाले भ्रष्टाचार के साथ ही व्यहार पर निगरानी हो सके। बड़े अधिकारी भी इससे अलग नहीं है।
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नाहक बदनाम है पुलिस, सबसे भ्रष्ट तो शिक्षा विभाग
अभी हाल ही में एक सर्वे की रिपोर्ट जारी हुई जिसमें पाया गया कि भ्रष्टाचार के मामले में में उत्तर प्रदेश की पुलिस नवें पायदान पर है। इस सर्वे की चौंकाने वाली बात यह रही कि पहले स्थान पर शिक्षा, दूसरे स्थान पर बिजली, तीसरे स्थान पर सिंचाई, चौथे स्थान पर लोक निर्माण और पांचवें स्थान पर राजस्व के साथ ही चिकित्सा विभाग शामिल हैं।
‘गुड पुलिसिंग, पीपुल फ्रेंडली पुलिसिंग पर बहुत काम हो रहा है। पुलिस भी बदली है और पुलिस की छवि भी बदली है। अगर हम गलत नहीं हैं तो हमें स्वयं को पारदर्शी व्यवस्था में रखने में कोई समस्या नहीं है। इसी उद्देश्य से यह सब हाईटेक बदलाव हो रहे हैं। इससे हमें भी मदद मिलेगी’ - अजय कुमार साहनी, एसएसपी।
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वक्त के साथ बदल रही पुलिस स्वयं की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए प्रयास कर रही है। इसी क्रम में अब न सिर्फ थाने बल्कि लिपिकीय स्टाफ सहित पुलिस अधिकारियों के कार्यालय भी कैमरों की जद में लाए जा रहे हैं। यही नहीं थाना प्रभारी का सार्वजनिक मूवमेंट भी अब कैमरे में कैद रहेगा, जिससे अधिकारी कभी भी चेक कर सकते हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले दो या तीन दिन में एडीजी अजय आनंद इस व्यवस्था की शुरुआत करने अलीगढ़ आ सकते हैं।
पुलिस पर अक्सर ही अभद्रता करने, बदजुबानी करने, घर में घुसकर मारपीट करने जैसे आरोप लगते रहते हैं। अधिकांश मामलों में यह आरोप दूसरे पक्ष द्वारा अपना पक्ष भारी रखने के लिए लगाए जाते हैं। जिनका कोई आधार नहीं होता। पुलिस की इसी समस्या को देखते हुए कुछ वर्ष पहले थानों में कैमरे लगाने की शुरुआत हुई थी। अब इससे भी आगे जाते हुए व्यवस्था की गई है कि पुलिस की प्रत्येक गतिविधि कैमरे की नजर में रहेगी।
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इससे पुलिस समय पड़ने पर उस फुटेज को साक्ष्य के रूप में भी प्रस्तुत कर सके और अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को गलत सिद्ध कर सके। इसके तहत पुलिस अधिकारियों के क्लर्क स्टाफ के कक्षों में भी कैमरेे लगेंगे। जिससे उन पर नजर रखी जा सके और यहां होने वाले भ्रष्टाचार के साथ ही व्यहार पर निगरानी हो सके। बड़े अधिकारी भी इससे अलग नहीं है।
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नाहक बदनाम है पुलिस, सबसे भ्रष्ट तो शिक्षा विभाग
अभी हाल ही में एक सर्वे की रिपोर्ट जारी हुई जिसमें पाया गया कि भ्रष्टाचार के मामले में में उत्तर प्रदेश की पुलिस नवें पायदान पर है। इस सर्वे की चौंकाने वाली बात यह रही कि पहले स्थान पर शिक्षा, दूसरे स्थान पर बिजली, तीसरे स्थान पर सिंचाई, चौथे स्थान पर लोक निर्माण और पांचवें स्थान पर राजस्व के साथ ही चिकित्सा विभाग शामिल हैं।
‘गुड पुलिसिंग, पीपुल फ्रेंडली पुलिसिंग पर बहुत काम हो रहा है। पुलिस भी बदली है और पुलिस की छवि भी बदली है। अगर हम गलत नहीं हैं तो हमें स्वयं को पारदर्शी व्यवस्था में रखने में कोई समस्या नहीं है। इसी उद्देश्य से यह सब हाईटेक बदलाव हो रहे हैं। इससे हमें भी मदद मिलेगी’ - अजय कुमार साहनी, एसएसपी।