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जिंदगी भर याद रहेगा अखबार छपने का दृश्य
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:48 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अखबार की जिंदगी महज आधे घंटे की होती है, लेकिन इतनी जिंदगी देने के लिए लाखों लोगों की 24 घंटे की अटूट मेहनत होती है। वाकई में यह काम काफी चैलेंजिंग वाला है।
ये उद्गार थे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के एक सेंटर के विद्यार्थी के। यह विद्यार्थी शनिवार को तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में विजिट करने आए थे।
विजिट में अलग-अलग बैच के 42 विद्यार्थी आए थे। इन्होंने सबसे पहले संपादकीय विभाग में अमर उजाला की शॉर्ट फिल्म देखी। इसके बाद विद्यार्थियों ने सवाल भी किए, जैसे खबर के बारे में इतनी जल्दी कैसे जानकारी हो जाती है? खबरों की सत्यता कैसे परखते हैं।
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आउटपुट, इनपुट समझने के बाद स्टूडेंट कंप्यूटर टू प्लेट (सीटीपी) गए, जहां उन्होंने प्लेट के बारे में जानकारी दी गई। फिर, स्टूडेंट मशीन रूम पहुंचे, जहां उन्होंने पहली बार अखबार छपते देखा। इस दृश्य को कैद करने के लिए स्टूडेंट में होड़ सी मच गई। स्टूडेंट का कहना था कि यह दृश्य उन्हें जिंदगी भर याद रहेगा। स्टूडेंट के साथ फैकल्टी हर्षवर्धन, संदीप राघव, अंबिका भारद्वाज थीं।
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अखबार की जिंदगी महज आधे घंटे की होती है, लेकिन इतनी जिंदगी देने के लिए लाखों लोगों की 24 घंटे की अटूट मेहनत होती है। वाकई में यह काम काफी चैलेंजिंग वाला है।
ये उद्गार थे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के एक सेंटर के विद्यार्थी के। यह विद्यार्थी शनिवार को तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में विजिट करने आए थे।
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विजिट में अलग-अलग बैच के 42 विद्यार्थी आए थे। इन्होंने सबसे पहले संपादकीय विभाग में अमर उजाला की शॉर्ट फिल्म देखी। इसके बाद विद्यार्थियों ने सवाल भी किए, जैसे खबर के बारे में इतनी जल्दी कैसे जानकारी हो जाती है? खबरों की सत्यता कैसे परखते हैं।
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