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इस दीपावली पर चलाइये ईको फ्रेंडली पटाखे
Updated Sat, 03 Nov 2018 02:20 AM IST
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की संभावना के चलते दिल्ली एवं एनसीआर में ग्रीन आतिशबाजी चलाने के आदेश दिए हैं। भले ही अलीगढ़ इस दायरे में नहीं आता है, लेकिन यहां भी आतिशबाजी बाजार में कम आवाज क्षमता के परंपरागत पटाखों के साथ ईको फ्रेंडली भी ग्राहकों को लुभाने के लिए तैयार हैं। 100 से 500 रुपये तक की रेंज में आने वाले इन नए पटाखों का क्रेज तो एक दो दिन में मार्केट उठने के बाद ही पता चल सकेगा। परंतु इस नयी रेंज ने परंपरागत पटाखों के बाजार को प्रभावित करने की तैयारी जरूर कर ली है।
ईको फ्रेंडली पटाखे व दाम-
उछलने वाला मेंढक तो अंडे देने वाली मुर्गी पटाखा है आकर्षण का केंद्र
-मुर्गी देती है अंडा-100 रुपये
-उछलने वाला मेंढक-100 रुपये
-500 आवाज वाली म्यूजिकल चटाई-200 रुपये
-हल्क वारियर-300 रुपये
-12 कलर 12 शाट वाला रंगीला-250 रुपये
-हवा में म्यूजिक देने वाला बिजी बिजी-200 रुपये
-पांच फंक्शन वाला भीम बाय-40 रुपये
-आसमान में लाइटिंग करने वाला कलर्ड मोर-250 रुपये
-थ्री डी कलर वाला अनार-500 रुपये
-म्यूजिकल चटाई एलर्ट लड़-200 रुपये
परंपरागत आतिशबाजी
-मिनी चटाई-दस हजार रुपये
-16 फंक्शन वाली स्वीट सिक्सटीन-500 रुपये
-स्काई बूस्टर-4500 रुपये
-एस्वलेस-1000 रुपये
-मारवल-300 रुपये
-सुप्रीमो-300 रुपये
-जंपिंग चकई-100 रुपये
-रंगीली डिलाइट-200 रुपये
-म्यूजिकल चटाई-200 रुपये
-कलरफुल अनार सुप्रीमो-80 रुपये
मगर दुकानदारों पर जीएसटी की मार
जीएसटी के चलते कंपनियों ने आतिशबाजी पर एमआरपी घटा दी है। इससे ग्राहकों को मार्जिन देना मुश्किल हो गया है। ग्राहक पहले की तरह छूट मांग रहे हैं। न देने पर वापस लौट रहे हैं।
संतोष, दुकानदार आतिशबाजी बाजार
इस बार आतिशबाजी पर महंगाई नहीं बढ़ी है, लेकिन जीएसटी के डर से कंपनियों ने एमआरपी घटा दी है। ग्राहकों को अभी भी आदत है कि वे पटाखों के दामों में छूट की मांग कर रहे हैं।
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यश कुमार, विक्रेता आतिशबाजी बाजार
साउथ की कंपनियों ने जीएसटी विवाद के चलते मई तक बनी आतिशबाजी की एमआरपी कम रखी है तो उसके बाद बनी आतिशबाजी पर एमआरपी बढ़ा दी है। इससे दिक्कत खड़ी हो गई है।
रोहित वार्ष्णेय, विक्रेता
नुमाइश प्रशासन ने दुकान का किराया दो हजार रुपये बढ़ा दिया है। जो किराया लिया है, उसकी रसीद में जीएसटी का जिक्र नहीं किया गया है। इससे व्यापारियों में असंतोष है। काक ब्रांड के पटाखे पिछले साल की तुलना में सस्ते हैं।
धनंजय, विक्रेता
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सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की संभावना के चलते दिल्ली एवं एनसीआर में ग्रीन आतिशबाजी चलाने के आदेश दिए हैं। भले ही अलीगढ़ इस दायरे में नहीं आता है, लेकिन यहां भी आतिशबाजी बाजार में कम आवाज क्षमता के परंपरागत पटाखों के साथ ईको फ्रेंडली भी ग्राहकों को लुभाने के लिए तैयार हैं। 100 से 500 रुपये तक की रेंज में आने वाले इन नए पटाखों का क्रेज तो एक दो दिन में मार्केट उठने के बाद ही पता चल सकेगा। परंतु इस नयी रेंज ने परंपरागत पटाखों के बाजार को प्रभावित करने की तैयारी जरूर कर ली है।
ईको फ्रेंडली पटाखे व दाम-
उछलने वाला मेंढक तो अंडे देने वाली मुर्गी पटाखा है आकर्षण का केंद्र
-मुर्गी देती है अंडा-100 रुपये
-उछलने वाला मेंढक-100 रुपये
-500 आवाज वाली म्यूजिकल चटाई-200 रुपये
-हल्क वारियर-300 रुपये
-12 कलर 12 शाट वाला रंगीला-250 रुपये
-हवा में म्यूजिक देने वाला बिजी बिजी-200 रुपये
-पांच फंक्शन वाला भीम बाय-40 रुपये
-आसमान में लाइटिंग करने वाला कलर्ड मोर-250 रुपये
-थ्री डी कलर वाला अनार-500 रुपये
-म्यूजिकल चटाई एलर्ट लड़-200 रुपये
परंपरागत आतिशबाजी
-मिनी चटाई-दस हजार रुपये
-16 फंक्शन वाली स्वीट सिक्सटीन-500 रुपये
-स्काई बूस्टर-4500 रुपये
-एस्वलेस-1000 रुपये
-मारवल-300 रुपये
-सुप्रीमो-300 रुपये
-जंपिंग चकई-100 रुपये
-रंगीली डिलाइट-200 रुपये
-म्यूजिकल चटाई-200 रुपये
-कलरफुल अनार सुप्रीमो-80 रुपये
मगर दुकानदारों पर जीएसटी की मार
जीएसटी के चलते कंपनियों ने आतिशबाजी पर एमआरपी घटा दी है। इससे ग्राहकों को मार्जिन देना मुश्किल हो गया है। ग्राहक पहले की तरह छूट मांग रहे हैं। न देने पर वापस लौट रहे हैं।
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संतोष, दुकानदार आतिशबाजी बाजार
इस बार आतिशबाजी पर महंगाई नहीं बढ़ी है, लेकिन जीएसटी के डर से कंपनियों ने एमआरपी घटा दी है। ग्राहकों को अभी भी आदत है कि वे पटाखों के दामों में छूट की मांग कर रहे हैं।
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यश कुमार, विक्रेता आतिशबाजी बाजार
साउथ की कंपनियों ने जीएसटी विवाद के चलते मई तक बनी आतिशबाजी की एमआरपी कम रखी है तो उसके बाद बनी आतिशबाजी पर एमआरपी बढ़ा दी है। इससे दिक्कत खड़ी हो गई है।
रोहित वार्ष्णेय, विक्रेता
नुमाइश प्रशासन ने दुकान का किराया दो हजार रुपये बढ़ा दिया है। जो किराया लिया है, उसकी रसीद में जीएसटी का जिक्र नहीं किया गया है। इससे व्यापारियों में असंतोष है। काक ब्रांड के पटाखे पिछले साल की तुलना में सस्ते हैं।
धनंजय, विक्रेता