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नुमाइश में 26 में से 12 झूले अनफिट, हटाए जाएंगे
Sun, 03 Feb 2019 01:12 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 03 Feb 2019 01:12 AM IST
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मकड़जाल झूले का टूटा था तार।
- फोटो : Rupesh
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नुमाइश में शुक्रवार को पावर झूला टूटने से बारह व्यक्तियों के घायल होने के बाद शनिवार को हुई झूलों की जांच में 26 में से 12 झूले अनफिट पाए गए हैं। यह सभी अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं।
नुमाइश प्रभारी एवं एडीएम प्रशासन अजय श्रीवास्तव ने इन सभी झूलों को तत्काल प्रभाव से नुमाइश से हटाने के निर्देश दिये हैं। शेष 14 झूलों, जिनकी बेल्ट या यांत्रिकी सिस्टम कमजोर है, उनके संचालकों को बेल्ट बदलने और यांत्रिक सिस्टम बदलवाने को कहा है। टायर से चलने वाले झूलों के टायर समय-समय पर बदलवाने तथा प्रत्येक झूले में वजन तोलने वाली मशीन रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
ड्रैगन झूले पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यही नहीं दुर्घटना की संभावना को निर्मूल करने के लिए झूलों की गति भी निर्धारित की गई है। सह प्रभारी अधिकारी एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जोगिंदर सिंह ने ेसभी झूला संचालकों को निर्देश दिये कि वेलेड पाए गए 14 झूलों को छोड़कर अन्य को तत्काल प्रभाव से नुमाइश से हटा लिया जाय।
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डगमगाते झूलों को पहले मंजूरी, फिर बंद कराए
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में शुक्रवार की रात टावर वाले झूले की बोगियां गिरने के बाद बंद कराए गए झूलों को शनिवार को पहले संचालन की मंजूरी दी गई, डेढ़ घंटे बाद इन्हें फिर से बंद करा दिया गया। जिस झूले की बोगी गिरी थी, उसे वहां से हटा दिया गया है। झूला टूटने के प्रकरण में एक आपरेटर पप्पू सहित झूलों के ठेकेदार दिल्ली एमयूजमेंट कंपनी के इमरान के खिलाफ एक्सीडेंट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इससे पहले शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों और रोडवेज व आरटीओ विभाग के इंजीनियरों की टीम ने नुमाइश के प्रत्येक झूले का तकनीकी परीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि किसी भी झूले की फिटनेस मानकों के अनुरूप नहीं थी।
शनिवार को एसीएम रंजीत सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों व राजकीय इंजीनियरों की टीम नुमाइश परिसर पहुंची। यहां पर प्रत्येक झूले का चलवा कर परीक्षण किया गया। वह झूला जिसकी बोगी गिरी थी, उसे यहां से हटवा दिया है। उसकी केबल टूट गई थी। झूलों के परीक्षण में पता चला कि झूलों के फाउंडेशन की जगह नीचे लकड़ी के तख्ते रखे गए और उनके ऊपर पूरा ढांचा खड़ा कर दिया गया। जब अधिकारियों ने झूला संचालकों से पूछा कि बारिश के समय कच्ची मिट्टी में दलदल होने पर अगर यह नीचे धंस गए तो पूरा ढांचा टेढ़ा हो जाएगा। तब क्या होगा? इसका झूला आपरेटरों पर कोई जवाब नहीं था। परीक्षण के समय पाया कि झूलों पर सुरक्षा मानक जैसे फायर एक्टिंग्युशर, फर्स्ट एड, चेतावनी आदि की कोई जगह नहीं थी। सीओ द्वितीय नीरज जादौन के अनुसार एक्सीडेंट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बिना तकनीकी अनुमति के झूले नहीं चलेंगे।
मौके के कुएं के अंदर उखड़ी मिली लकड़ी
नुमाइश में लगे मौत के कुंए में लगे तख्ते शनिवार को जब देखे गए तो कुछ तख्ते उखड़े हुए थे। तो कुछ टूटे हुए थे। यही नहीं यहां पर चलने वाली बाइकों और कारों की बाडी की हालत भी खस्ताहाल थी। यहां पर जो दर्शकों के लिए ढंाचा खड़ा किया गया है, उसकी जंग को छिपाने के लिए पेंट किया गया है। जो लोग मौत का कुआं देख चुके हैं, उन्होंने बताया कि जब अंदर गाड़ियां चलती हैं तो पूरा ढांचा बुरी तरह हिल जाता है।
क्लेम करें तो मिल सकता है 25 लाख तक का कवर
झूला हादसे के शिकार हुए लोगों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें झूला संचालक कंपनी द्वारा कराए गए 25 लाख रुपये तक के बीमा कवर का लाभ मिल सकता है। यह बात शनिवार को अधिकारियों के निरीक्षण के समय स्वयं झूला संचालक कंपनी के लोगों ने उन्हें बतायी। इस बीमा कवर में जनहानि होने और कोई हादसा होने की स्थिति में पीड़ितों को 25 लाख रुपये का का बीमा कवर किया गया है। झूला संचालक कंपनी ने इसके लिए बीमा कंपनी को 33900 रुपये का प्रीमियम दिया है। मौके पर पहुंचे एसीएम प्रथम रंजीत सिंह ने झूला कंपनी संचालक से कहा है कि वह इसका अधिक से अधिक प्रचार करें और ताजा हादसे के शिकार हुए लोगों को बीमा कवर का लाभ दिलवाएं। दिल्ली के दरियागंज में कैप्टन वाली गली में दिल्ली एमयूजमेंट कंपनी ने ओरियंटल इंश्योरेंश कंपनी से जन दायित्व और गैर औद्योगिक पालिसी के तहत 25 लाख तक का कवर झूले में बैठने वालों को दिया है।
घायलों को इस तरह मिल सकता है पैसा
बीमा विशेषज्ञ शरद बंसल कहते हैं कि उन्होंने झूला संचालक कंपनी दिल्ली एमयूजमेंट के दस्तावेज का अध्ययन किया है। इसके मुताबिक पहले तो पीड़ित पक्ष झूला संचालक फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं। इसके बाद अदालत झूला कंपनी से अदालत बीमा दस्तावेज मांगेगी। कंपनी अदालत को बीमा कवर दिखाएगी। जिसके बाद किस पीड़ित को कितनी धनराशि मिलेगी, इस बात का फैसला अदालत करेगी।
भूल कर भी झूले पर नहीं जाएंगे: घायल
शुक्रवार को झूला हादसे में घायल और मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती उस्मानपाड़ा निवासी ईफाम पुत्र अकबर, शीशियापाड़ा निवासी अर्जुन सिंह, बेगम बाग निवासी कमल शर्मा, चरखवालान निवासी आसिफ, अलताफ, आमिर की आंखों में हादसे का खौफ देखा जा सकता है। यह सभी मूक बघिर है। इन्होंने संकेतों में अपने परिजनों को बताया कि वह भूल कर भी झूले पर नहीं जाएंगे।
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नुमाइश प्रभारी एवं एडीएम प्रशासन अजय श्रीवास्तव ने इन सभी झूलों को तत्काल प्रभाव से नुमाइश से हटाने के निर्देश दिये हैं। शेष 14 झूलों, जिनकी बेल्ट या यांत्रिकी सिस्टम कमजोर है, उनके संचालकों को बेल्ट बदलने और यांत्रिक सिस्टम बदलवाने को कहा है। टायर से चलने वाले झूलों के टायर समय-समय पर बदलवाने तथा प्रत्येक झूले में वजन तोलने वाली मशीन रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
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ड्रैगन झूले पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यही नहीं दुर्घटना की संभावना को निर्मूल करने के लिए झूलों की गति भी निर्धारित की गई है। सह प्रभारी अधिकारी एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जोगिंदर सिंह ने ेसभी झूला संचालकों को निर्देश दिये कि वेलेड पाए गए 14 झूलों को छोड़कर अन्य को तत्काल प्रभाव से नुमाइश से हटा लिया जाय।
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डगमगाते झूलों को पहले मंजूरी, फिर बंद कराए
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में शुक्रवार की रात टावर वाले झूले की बोगियां गिरने के बाद बंद कराए गए झूलों को शनिवार को पहले संचालन की मंजूरी दी गई, डेढ़ घंटे बाद इन्हें फिर से बंद करा दिया गया। जिस झूले की बोगी गिरी थी, उसे वहां से हटा दिया गया है। झूला टूटने के प्रकरण में एक आपरेटर पप्पू सहित झूलों के ठेकेदार दिल्ली एमयूजमेंट कंपनी के इमरान के खिलाफ एक्सीडेंट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इससे पहले शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों और रोडवेज व आरटीओ विभाग के इंजीनियरों की टीम ने नुमाइश के प्रत्येक झूले का तकनीकी परीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि किसी भी झूले की फिटनेस मानकों के अनुरूप नहीं थी।
शनिवार को एसीएम रंजीत सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों व राजकीय इंजीनियरों की टीम नुमाइश परिसर पहुंची। यहां पर प्रत्येक झूले का चलवा कर परीक्षण किया गया। वह झूला जिसकी बोगी गिरी थी, उसे यहां से हटवा दिया है। उसकी केबल टूट गई थी। झूलों के परीक्षण में पता चला कि झूलों के फाउंडेशन की जगह नीचे लकड़ी के तख्ते रखे गए और उनके ऊपर पूरा ढांचा खड़ा कर दिया गया। जब अधिकारियों ने झूला संचालकों से पूछा कि बारिश के समय कच्ची मिट्टी में दलदल होने पर अगर यह नीचे धंस गए तो पूरा ढांचा टेढ़ा हो जाएगा। तब क्या होगा? इसका झूला आपरेटरों पर कोई जवाब नहीं था। परीक्षण के समय पाया कि झूलों पर सुरक्षा मानक जैसे फायर एक्टिंग्युशर, फर्स्ट एड, चेतावनी आदि की कोई जगह नहीं थी। सीओ द्वितीय नीरज जादौन के अनुसार एक्सीडेंट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बिना तकनीकी अनुमति के झूले नहीं चलेंगे।
मौके के कुएं के अंदर उखड़ी मिली लकड़ी
नुमाइश में लगे मौत के कुंए में लगे तख्ते शनिवार को जब देखे गए तो कुछ तख्ते उखड़े हुए थे। तो कुछ टूटे हुए थे। यही नहीं यहां पर चलने वाली बाइकों और कारों की बाडी की हालत भी खस्ताहाल थी। यहां पर जो दर्शकों के लिए ढंाचा खड़ा किया गया है, उसकी जंग को छिपाने के लिए पेंट किया गया है। जो लोग मौत का कुआं देख चुके हैं, उन्होंने बताया कि जब अंदर गाड़ियां चलती हैं तो पूरा ढांचा बुरी तरह हिल जाता है।
क्लेम करें तो मिल सकता है 25 लाख तक का कवर
झूला हादसे के शिकार हुए लोगों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें झूला संचालक कंपनी द्वारा कराए गए 25 लाख रुपये तक के बीमा कवर का लाभ मिल सकता है। यह बात शनिवार को अधिकारियों के निरीक्षण के समय स्वयं झूला संचालक कंपनी के लोगों ने उन्हें बतायी। इस बीमा कवर में जनहानि होने और कोई हादसा होने की स्थिति में पीड़ितों को 25 लाख रुपये का का बीमा कवर किया गया है। झूला संचालक कंपनी ने इसके लिए बीमा कंपनी को 33900 रुपये का प्रीमियम दिया है। मौके पर पहुंचे एसीएम प्रथम रंजीत सिंह ने झूला कंपनी संचालक से कहा है कि वह इसका अधिक से अधिक प्रचार करें और ताजा हादसे के शिकार हुए लोगों को बीमा कवर का लाभ दिलवाएं। दिल्ली के दरियागंज में कैप्टन वाली गली में दिल्ली एमयूजमेंट कंपनी ने ओरियंटल इंश्योरेंश कंपनी से जन दायित्व और गैर औद्योगिक पालिसी के तहत 25 लाख तक का कवर झूले में बैठने वालों को दिया है।
घायलों को इस तरह मिल सकता है पैसा
बीमा विशेषज्ञ शरद बंसल कहते हैं कि उन्होंने झूला संचालक कंपनी दिल्ली एमयूजमेंट के दस्तावेज का अध्ययन किया है। इसके मुताबिक पहले तो पीड़ित पक्ष झूला संचालक फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं। इसके बाद अदालत झूला कंपनी से अदालत बीमा दस्तावेज मांगेगी। कंपनी अदालत को बीमा कवर दिखाएगी। जिसके बाद किस पीड़ित को कितनी धनराशि मिलेगी, इस बात का फैसला अदालत करेगी।
भूल कर भी झूले पर नहीं जाएंगे: घायल
शुक्रवार को झूला हादसे में घायल और मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती उस्मानपाड़ा निवासी ईफाम पुत्र अकबर, शीशियापाड़ा निवासी अर्जुन सिंह, बेगम बाग निवासी कमल शर्मा, चरखवालान निवासी आसिफ, अलताफ, आमिर की आंखों में हादसे का खौफ देखा जा सकता है। यह सभी मूक बघिर है। इन्होंने संकेतों में अपने परिजनों को बताया कि वह भूल कर भी झूले पर नहीं जाएंगे।