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World Suicide Prevention Day: किशोरों में बढ़ रहे हैं आत्महत्या के मामले, परिजनों से बात कर दूर करें तनाव

Thu, 10 Sep 2020 12:09 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 10 Sep 2020 12:09 AM IST
सार

  • युवाओं में आत्महत्या के मामले अधिक सामने आ रहे हैं जिसका कारण मानसिक तनाव अधिक बन रहा है
  • अगर कोई परेशानी है तो परिजनों के साथ साझा करें। इससे समस्या का हल जरूर निकलेगा
  • आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है

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World Suicide Prevention Day:  People Are Taking Suicidal Steps By Being Angry
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2020

विस्तार

खुदकुशी सिर्फ एक इंसान की जान नहीं लेती, बल्कि उस पर आश्रित परिवार के अन्य लोग भी जीते जी मर जाते हैं। जरा से आवेश में आकर लोग आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। कोई फांसी लगाकर आत्महत्या कर रहा है तो कोई विषाक्त पदार्थ खाकर।

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आत्महत्या करने वालों का रोजाना आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। जिलेभर में वर्ष 2020 में अब तक करीब 158 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। अकेले जिला अस्पताल में ही 68 लोगों की मौत हुई है। अधिकांश मामलों में आत्महत्या की ठोस वजह भी नहीं रही।  
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किशोरों में बढ़ रहे हैं आत्महत्या के मामले
किशोरावस्था में भी आत्महत्या करने के मामले बढ़े हैं। कुर्रा क्षेत्र में एक जुलाई को छेड़छाड़ से परेशान 16 वर्षीय किशोरी ने फांसी लगा ली। चार सितंबर को भोगांव क्षेत्र के गांव विक्रमपुर में 12 वर्षीय किशोर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह घास लेने खेत पर नहीं जाना चाहता था, इस पर परिजनों ने उसे डांट लगा दी। हाल ही में पुरानी मैनपुरी में मोबाइल पर गेम खेलने से रोकने पर 13 वर्षीय किशोर ने फांसी लगाकर जान दे दी। 

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परिजनों को बताएं परेशानी 
युवा वर्ग में आत्महत्या के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। जिसका कारण मानसिक तनाव अधिक बन रहा है। अगर कोई परेशानी है तो परिजनों के साथ साझा करें। इससे समस्या का हल जरूर निकलेगा। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। आत्महत्या का प्रयास करने वालों को बाद में अपने ही निर्णय पर पछतावा होता है। बच्चों की भी मां-बाप समय-समय पर काउंसलिंग करें।
- शैलेंद्र यादव, मनोचिकित्सक

डांटे नहीं, गलती का अहसास कराएं 

कुछ सालों में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। मां-बाप अपने बच्चों का ख्याल रखें। उनसे अच्छा व्यवहार करें। बच्चों को डांटने की जगह, उन्हें सामान्य तरीके से समझाएं और उनकी गलती का अहसास कराएं। महिलाओं में भी आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है। महिलाओं को अगर ससुराल में परेशानी है तो पुलिस और न्यायालयों की शरण लें। आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है।
- आराधना गुप्ता, सदस्य बाल कल्याण समिति

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