{"_id":"69cdf0f6bab1ed3fdf0e2fee","slug":"world-autism-awareness-day-child-avoids-eye-contact-and-repeats-words-don-t-ignore-signs-of-autism-2026-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Autism: बच्चा नजर नहीं मिलाता, बार-बार दोहराता है एक ही बात? नजरअंदाज न करें; इस बीमारी के हैं ये संकेत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Autism: बच्चा नजर नहीं मिलाता, बार-बार दोहराता है एक ही बात? नजरअंदाज न करें; इस बीमारी के हैं ये संकेत
Thu, 02 Apr 2026 10:00 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 02 Apr 2026 10:00 AM IST
सार
World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म एक डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चे की भाषा, व्यवहार और संवाद प्रभावित होते हैं, लेकिन उनका बौद्धिक स्तर सामान्य होता है। समय पर पहचान और थेरेपी से ऐसे बच्चों के विकास में काफी सुधार किया जा सकता है।
विज्ञापन
ऑटिज्म की समस्या के बारे में जानिए
- फोटो : Amarujala.com
विस्तार
World Autism Awareness Day 2026: सुनने-समझ में दिलचस्पी नहीं ले रहा। नजर नहीं मिला रहा। एक ही बात की रट लगाए हुए तो ये ऑटिज्म के लक्षण हैं। ऐसे बच्चों को मंदबुद्धि नहीं समझें। चिकित्सक बताते हैं कि इनके बौद्धिक स्तर में कोई कमी नहीं होती है। ये जन्मजात परेशानी है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि शिशुओं के मस्तिष्क की संरचना में बदलाव होने के कारण भाषा, संवाद और व्यवहार प्रभावित होता है। ऐसे में ये बच्चे प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। सुनने-समझने और एकाग्रता भी प्रभावित होती है। कई बार लोग ऐसे बच्चों को मंदबुद्धि मान बैठते हैं, हकीकत में ऐसा नहीं है। इनकी बौद्धिक स्तर सामान्य बच्चों की तरह ही है, लेकिन इसे व्यक्त करने में अलग हैं। ऐसे में इनकी अनदेखी से परेशानी और बढ़ जाती है।
ऑटिज्म बीमारी नहीं, डिसऑर्डर
एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि ऑटिज्म बीमारी नहीं, डिसऑर्डर है। बीमारी में बच्चों के सोचने-समझने और व्यवहार प्रभावित होता है। इसमें बच्चा अकेले रहना, आंख न मिलाना, देर से बोलना और एक ही हरकत-बात को बार-बार दोहराता है। ये लक्षण तीन साल की आयु में ही दिखने लगते हैं। ऐसे बच्चों को स्पीच थेरेपी से बोलने, ऑक्यूपेशनल थेरेपी से दैनिक कार्यों को सीखना और बिहेवियर थेरेपी से व्यवहार संबंधी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि शिशुओं के मस्तिष्क की संरचना में बदलाव होने के कारण भाषा, संवाद और व्यवहार प्रभावित होता है। ऐसे में ये बच्चे प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। सुनने-समझने और एकाग्रता भी प्रभावित होती है। कई बार लोग ऐसे बच्चों को मंदबुद्धि मान बैठते हैं, हकीकत में ऐसा नहीं है। इनकी बौद्धिक स्तर सामान्य बच्चों की तरह ही है, लेकिन इसे व्यक्त करने में अलग हैं। ऐसे में इनकी अनदेखी से परेशानी और बढ़ जाती है।
विज्ञापन
ऑटिज्म बीमारी नहीं, डिसऑर्डर
एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि ऑटिज्म बीमारी नहीं, डिसऑर्डर है। बीमारी में बच्चों के सोचने-समझने और व्यवहार प्रभावित होता है। इसमें बच्चा अकेले रहना, आंख न मिलाना, देर से बोलना और एक ही हरकत-बात को बार-बार दोहराता है। ये लक्षण तीन साल की आयु में ही दिखने लगते हैं। ऐसे बच्चों को स्पीच थेरेपी से बोलने, ऑक्यूपेशनल थेरेपी से दैनिक कार्यों को सीखना और बिहेवियर थेरेपी से व्यवहार संबंधी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
विज्ञापन