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महिला समानता दिवस: आठवीं के बाद पढ़ाई बंद, सड़क नहीं तो एंबुलेंस भी नहीं पहुंचती; ये है सुंसार की कड़वी सच्चाई

Wed, 26 Aug 2026 12:33 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 26 Aug 2026 12:33 PM IST
सार

महिला समानता दिवस पर आगरा के सुंसार गांव की महिलाओं की हकीकत सवाल खड़े करती है, जहां आठवीं के बाद बेटियों की पढ़ाई का कोई इंतजाम नहीं है और गांव तक पक्की सड़क भी नहीं पहुंची। खस्ताहाल रास्ते के कारण बारिश में एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती, जबकि महिलाएं शिक्षा और रोजगार के अवसरों से भी वंचित हैं।
 

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Women Equality Day Sunsar Village Women Struggle Without Road Education And Healthcare
सुंसार की कड़वी सच्चाई बयां करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 एक तरफ जहां पूरा देश 26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाकर आधी आबादी के अधिकारों और आत्मनिर्भरता का ढोल पीट रहा है, वहीं आगरा में यमुना किनारे बसा गांव सुंसार रास्ता, स्कूल, अस्पताल के लिए भी तरस रहा है। करीब 400 से 500 की आबादी वाले इस गांव की महिलाओं का सारा संसार अपने घर की दहलीज तक सिमटा है।
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सुंसार गांव में जाने वाला रास्ता कच्चा है कि वहां बारिश के दौरान कोई गाड़ी या एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती। स्वास्थ्य सेवाओं का आलम यह है कि पिछले साल जुलाई में एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल न पहुंचा पाने के कारण उसने ट्रैक्टर में ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया, जिसके साथ उसके पेट में पल रहे मासूम की भी मौत हो गई।
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गांव में केवल आठवीं तक का स्कूल है। इसके बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए बच्चियों और महिलाओं के पास कोई विकल्प नहीं है। खस्ताहाल रास्तों के कारण न तो लड़कियां बाहर पढ़ने जा पाती हैं और न ही कोई गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) या रोजगार से जुड़ी योजनाएं गांव तक पहुंच पाती हैं। लोग खेती या बाहर जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं।
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समाजसेवी नरेंद्र सिंह भारतीय ने कहा कि चुनाव के समय विधायक, सांसद और पार्षद वोट मांगने आते हैं तथा चार-छह महीने में पक्की सड़क बनाने का वादा करके चले जाते हैं। इसके बाद कोई सुध नहीं लेता।

स्थानीय निवासी लक्ष्मी हम पढ़ना और खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं, लेकिन गांव से बाहर जाने का कोई रास्ता ही नहीं है। 8वीं के बाद पढ़ाई छूट गई और अब पूरी जिंदगी चौका-बर्तन में बीत रही है। 

 स्थानीय निवासी श्रीदेवी ने कहा कि महिला समानता का नारा हमारे लिए बेमानी है। जब प्रसव के समय अस्पताल जाने के लिए सड़क और गाड़ी तक नहीं मिलती, तो हम कैसे मान लें कि हमें समान अधिकार मिले हैं।


स्थानीय निवासी राजकुमारी ने कहा कि अगर गांव में आगे की पढ़ाई का साधन या कोई सिलाई-कढ़ाई का काम सिखाने वाली संस्था आ जाए तो हम भी कमा सकती हैं। लेकिन जर्जर रास्तों के कारण कोई यहां नहीं आता।
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