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UP: महिला को खुद के ही बाल खाने की भयानक बीमारी, ऑपरेशन में पेट से निकला इतना बड़ा गुच्छा; डॉक्टर भी हैरान
Fri, 10 Oct 2025 10:22 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 10 Oct 2025 10:22 AM IST
सार
आगरा की एक महिला को अपने ही बालों को नोंचकर खाने की भयानक बीमारी लग गई। वो पिछले 50 साल से बाल खा रही थी। ऑपरेशन के बाद उसके पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया। चिकित्सक ने बताया कि ये महिला मानसिक बीमारी ट्राइकोफैगिया से पीड़ित है।
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महिला के पेट से निकला बालों का गुच्छा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
ट्राइकोफैगिया ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें मरीज खुद के ही बाल नोंचकर खाता है। ऐसी ही बीमारी से ग्रसित यमुनापार की 62 साल की महिला के 50 साल से बाल खाने से पेट में गुच्छा बन गया। इससे आंतों में रुकावट होने लगी। हालत गंभीर होने पर साकेत कॉलोनी स्थित नवदीप हॉस्पिटल में इसका ऑपरेशन कर 760 ग्राम बाल निकाले हैं।
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आगरा सर्जंस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और अस्पताल निदेशक डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि 35 साल पहले भी ये महिला नवदीप हॉस्पिटल में भर्ती हुई थी। तब इसकी उम्र 27 साल थी। उस वक्त इसके पेट से करीब 200 ग्राम बाल निकाले थे। सर्जरी करने के बाद इनके परिजन को मानसिक रोग विशेषज्ञ से इलाज कराने के लिए कहा था। परिजन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। 6 अक्तूबर को पेट दर्द, उल्टी होने की समस्या पर भर्ती कराया। एंडोस्कॉपी से पता चला कि आंत ब्लॉक हो गई थीं। इससे मरीज की हालत बिगड़ गई। सर्जरी कर 760 ग्राम बाल निकाले हैं। अब मरीज की हालत ठीक है।
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इलाज-काउंसलिंग से ठीक हो जाती है ट्राइकोफैगिया
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निर्देश प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि ट्राइकोफेजिया या रॅपंजेल सिंड्रोम कहते हैं। इसमें बाल तोड़ने का आवेग आता है। बीमारी के चलते मरीज का मस्तिष्क पर नियंत्रण नहीं होता। ऐसा नहीं करने पर बेचैनी होने लगती है। ऐसे में बाल तोड़कर ही उसका आवेग शांत होता है। कई मरीज इसमें बाल खा भी लेते हैं। इलाज और काउंसलिंग से मर्ज ठीक हो जाता है। आवेग आने पर बेचैनी, बाल तोड़ने के बाद मन शांत होता है तो ऐसे मरीज का मानसिक रोग विशेषज्ञ से इलाज कराएं।
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मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निर्देश प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि ट्राइकोफेजिया या रॅपंजेल सिंड्रोम कहते हैं। इसमें बाल तोड़ने का आवेग आता है। बीमारी के चलते मरीज का मस्तिष्क पर नियंत्रण नहीं होता। ऐसा नहीं करने पर बेचैनी होने लगती है। ऐसे में बाल तोड़कर ही उसका आवेग शांत होता है। कई मरीज इसमें बाल खा भी लेते हैं। इलाज और काउंसलिंग से मर्ज ठीक हो जाता है। आवेग आने पर बेचैनी, बाल तोड़ने के बाद मन शांत होता है तो ऐसे मरीज का मानसिक रोग विशेषज्ञ से इलाज कराएं।
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