{"_id":"685e177d9cb01ef9c60d30c6","slug":"who-was-commander-hesing-of-fauj-e-hind-at-whose-grave-dutch-soldiers-bowed-their-heads-2025-06-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: कौन थे फौज-ए-हिंद के कमांडर हेसिंग, बनवाया था लाल ताजमहल...उनके मकबरे पर डच सैनिकों ने झुकाया सिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: कौन थे फौज-ए-हिंद के कमांडर हेसिंग, बनवाया था लाल ताजमहल...उनके मकबरे पर डच सैनिकों ने झुकाया सिर
Fri, 27 Jun 2025 09:31 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 27 Jun 2025 09:31 AM IST
सार
नीदरलैंड के सैन्य अफसरों का प्रतिनिधिमंडल हेसिंग का मकबरा देखने आया। इस दौरान डच सैनिकों ने उनके मकबरे पर सिर झुकाया।
विज्ञापन
लाल ताजमहल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नीदरलैंड और आगरा के बीच 250 साल पुराने ऐतिहासिक संबंध हैं, जिन्हें बयां करने और डच कमांडर रहे कर्नल जॉन हेसिंग को सम्मान देने के लिए डच डिफेंस अकादमी के अफसर आगरा आए। यहां उन्होंने मराठा शासन में फौज-ए-हिंद के कमांडर रहे जॉन हेसिंग के मकबरे पर सिर झुकाया और श्रद्धांजलि अर्पित की।
विज्ञापन
नीदरलैंड दूतावास ने एएसआई और सिंधिया अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर डच प्रतिनिधिमंडल का आगरा दौरा किया। भगवान टॉकीज चौराहे के पास मराठा शासक महादजी सिंधिया और दौलतराव सिंधिया की फौज के कमांडर रहे जॉन हेसिंग का मकबरा देखने के लिए नीदरलैंड की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के अधिकारी आए।
ये भी पढ़ें - Circle Rate: आगरा में सर्किल रेट की नई सूची जारी, जानिए कहां सबसे महंगी और कहां सस्ती है जमीन
ये भी पढ़ें - Circle Rate: आगरा में सर्किल रेट की नई सूची जारी, जानिए कहां सबसे महंगी और कहां सस्ती है जमीन
विज्ञापन
विज्ञापन
भ्रमण के दौरान एएसआई की सहायक पुरातत्वविद आकांक्षा राय चौधरी ने लाल ताजमहल के नाम से मशहूर मकबरे के इतिहास और वास्तुकला की जानकारी दी। सिंधिया अनुसंधान केंद्र के प्रमुख अरुणांश बी गोस्वामी ने सिंधिया शासन और नीदरलैंड के बीच सैन्य और कूटनीतिक संबंधों के बारे में बताया कि 18वीं शताब्दी में मराठा शक्ति को डच सैनिकों ने मजबूत किया। डच सैन्य अफसरों ने मकबरे में सिर झुकाया और दीवारों को छूकर अपने पूर्वज की मौजूदगी का एहसास किया।
कौन थे लाल ताजमहल वाले जॉन हेसिंग
नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में वर्ष 1739 में जन्मे जॉन हेसिंग सैनिक थे, जिन्होंने डच ईस्ट इंडिया कंपनी में सेवा की। हेसिंग वर्ष 1763 में भारत आए और यहां पैसे के लिए हैदराबाद के निजाम की सेना में काम किया। बाद में मराठा शासक महादजी सिंधिया की सेना में सेवा की। उनकी मृत्यु के बाद दौलतराव सिंधिया ने वर्ष 1799 में हेसिंग को आगरा किला का कमांडर बना दिया। वर्ष 1803 में मराठा-अंग्रेजों के बीच युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
ये भी पढ़ें - UP: आलू का ऐसा बीज...साल में दो बार किसान कर सकेंगे फसल, उच्च तापमान का भी नहीं पड़ेगा कोई असर
नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में वर्ष 1739 में जन्मे जॉन हेसिंग सैनिक थे, जिन्होंने डच ईस्ट इंडिया कंपनी में सेवा की। हेसिंग वर्ष 1763 में भारत आए और यहां पैसे के लिए हैदराबाद के निजाम की सेना में काम किया। बाद में मराठा शासक महादजी सिंधिया की सेना में सेवा की। उनकी मृत्यु के बाद दौलतराव सिंधिया ने वर्ष 1799 में हेसिंग को आगरा किला का कमांडर बना दिया। वर्ष 1803 में मराठा-अंग्रेजों के बीच युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
ये भी पढ़ें - UP: आलू का ऐसा बीज...साल में दो बार किसान कर सकेंगे फसल, उच्च तापमान का भी नहीं पड़ेगा कोई असर
डच-भारत संबंधों की अनूठी पहचान
हेसिंग की पत्नी एन हेसिंग ने एक लाख रुपये में तब हेसिंग का मकबरा बनवाया, जो लाल पत्थर से बना होने के कारण लाल ताजमहल के नाम से चर्चित हुआ। यह पहला स्मारक है, जिसे पत्नी ने सीमित संसाधनों में अपने पति की याद में बनवाया। यहां फारसी में शिलालेख हैं, जिन पर एन हेसिंग ने अपनी पति की मृत्यु पर महसूस किए गए दुख को दर्शाया है। यह डच और भारतीयों के बीच के संबंधों की अनूठी पहचान है।
हेसिंग की पत्नी एन हेसिंग ने एक लाख रुपये में तब हेसिंग का मकबरा बनवाया, जो लाल पत्थर से बना होने के कारण लाल ताजमहल के नाम से चर्चित हुआ। यह पहला स्मारक है, जिसे पत्नी ने सीमित संसाधनों में अपने पति की याद में बनवाया। यहां फारसी में शिलालेख हैं, जिन पर एन हेसिंग ने अपनी पति की मृत्यु पर महसूस किए गए दुख को दर्शाया है। यह डच और भारतीयों के बीच के संबंधों की अनूठी पहचान है।