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फाइलों में दबा दीं मांगें: खुले नालों में दफन हुईं तीन जिंदगियां, एक माह में तीन हादसे; फिर भी नहीं जागा निगम
Mon, 07 Sep 2026 09:29 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 07 Sep 2026 09:29 AM IST
सार
आगरा में खुले नालों ने एक महीने में तीन जिंदगियां लील लीं, जबकि हादसों से पहले ही पार्षदों और स्थानीय लोगों ने नाले ढकने की मांग की थी। नगर निगम को भेजे गए पत्र और ज्ञापन फाइलों में दबे रहे और समय रहते कार्रवाई नहीं होने से हादसों का सिलसिला जारी रहा।
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खुला नाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के केदार नगर, फ्री गंज और सुभाष बाजार...तीनों जगह खुले नाले में गिरकर तीन जिंदगियां दफन हो गईं। तीनों मामलों में नगर निगम प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही भारी पड़ गई। क्षेत्र के पार्षदों और स्थानीय व्यापारियों ने तीनों जगह हादसे से पहले ही निगम को पत्र देकर नाले ढकने की मांग की थी लेकिन ज्ञापन फाइलों में दबा दिए गए।
बीते माह मंटोला नाले में गंगा देवी और फ्रीगंज क्षेत्र में 69 वर्षीय शीला देवी की खुले नाले में गिरने से मौत हुई थी। शुक्रवार रात केदार नगर में नाले में गिरने से शंकरपुरी निवासी ओमप्रकाश की सांसें थम गईं। तीनों मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्षदों ने एक महीने पहले नगर निगम को पत्र भेजकर गहरे नालों को स्लैब से ढकने की मांग की थी।
क्षेत्र के सेनेटरी इंस्पेक्टर और निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और फाइलें दफ्तर की मेजों के नीचे दबी रहीं।
मांग के बाद भी नहीं कराई मरम्मत
सुभाष बाजार समिति के व्यापारियों ने मंटोला नाले पर बनी दुकान का सीसी फर्श जर्जर होने पर कई बार ज्ञापन देकर मरम्मत की मांग की थी। फाइल नगर निगम के दफ्तर में धूल फांकती रही। जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन नगर आयुक्त के ऑफिस में ही मरम्मत की फाइल रखी हुई थी। व्यापारी नेता जय पुरसनानी का आरोप है कि गलती नगर निगम की थी लेकिन खामियाजा गंगा देवी और आठ दुकानों के व्यापारियों को चुकाना पड़ा।
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लोगों बोले- हादसा नहीं हत्या
केदार नगर के निवासियों का आरोप है कि यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर, निर्माण विभाग के इंजीनियर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी पत्राचार करने के बावजूद चेतावनियों को नजरअंदाज करते हैं। घनश्याम ने बताया कि केदार नगर वेलफेयर सोसायटी की ओर से इस नाला निर्माण के लिए नगर आयुक्त को पत्र भी दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के भ्रष्टाचार के चलते हादसा नहीं हुआ बल्कि एक व्यक्ति की हत्या हुई है।
बेटे ने कहा - अब किसी और की जान न जाए
मृतक ओमप्रकाश के बेटे आशीष की आंखों से आंसू बह रहे हैं। उनका कहना है कि हादसे की रात जब वो घटनास्थल पर पहुंचे तो पिता कीचड़ से लथपथ थे। पापा ने रास्ते में मेरे हाथ में दम तोड़ दिया। नगर निगम की लापरवाही से उनके पिता की जान चली गई। उन्हें कोई मुआवजा नहीं चाहिए। सिर्फ इतना चाहते हैं कि जितने भी नाले खुले हुए हैं उन्हें जल्द से जल्द ढक दिया जाए जिससे किसी और की जान न जाए।
केदार नगर पार्षद गुड्डू मेनन ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी अगर पार्षदों के पत्र पर कार्रवाई करते तो यह हादसा नहीं होता। जनता की समस्याओं के लिए उन्हें एक महीने पहले ही चेताया था लेकिन पत्र को किसी फाइल में दबा दिया गया।
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बीते माह मंटोला नाले में गंगा देवी और फ्रीगंज क्षेत्र में 69 वर्षीय शीला देवी की खुले नाले में गिरने से मौत हुई थी। शुक्रवार रात केदार नगर में नाले में गिरने से शंकरपुरी निवासी ओमप्रकाश की सांसें थम गईं। तीनों मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्षदों ने एक महीने पहले नगर निगम को पत्र भेजकर गहरे नालों को स्लैब से ढकने की मांग की थी।
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क्षेत्र के सेनेटरी इंस्पेक्टर और निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और फाइलें दफ्तर की मेजों के नीचे दबी रहीं।
मांग के बाद भी नहीं कराई मरम्मत
सुभाष बाजार समिति के व्यापारियों ने मंटोला नाले पर बनी दुकान का सीसी फर्श जर्जर होने पर कई बार ज्ञापन देकर मरम्मत की मांग की थी। फाइल नगर निगम के दफ्तर में धूल फांकती रही। जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन नगर आयुक्त के ऑफिस में ही मरम्मत की फाइल रखी हुई थी। व्यापारी नेता जय पुरसनानी का आरोप है कि गलती नगर निगम की थी लेकिन खामियाजा गंगा देवी और आठ दुकानों के व्यापारियों को चुकाना पड़ा।
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लोगों बोले- हादसा नहीं हत्या
केदार नगर के निवासियों का आरोप है कि यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर, निर्माण विभाग के इंजीनियर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी पत्राचार करने के बावजूद चेतावनियों को नजरअंदाज करते हैं। घनश्याम ने बताया कि केदार नगर वेलफेयर सोसायटी की ओर से इस नाला निर्माण के लिए नगर आयुक्त को पत्र भी दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के भ्रष्टाचार के चलते हादसा नहीं हुआ बल्कि एक व्यक्ति की हत्या हुई है।
बेटे ने कहा - अब किसी और की जान न जाए
मृतक ओमप्रकाश के बेटे आशीष की आंखों से आंसू बह रहे हैं। उनका कहना है कि हादसे की रात जब वो घटनास्थल पर पहुंचे तो पिता कीचड़ से लथपथ थे। पापा ने रास्ते में मेरे हाथ में दम तोड़ दिया। नगर निगम की लापरवाही से उनके पिता की जान चली गई। उन्हें कोई मुआवजा नहीं चाहिए। सिर्फ इतना चाहते हैं कि जितने भी नाले खुले हुए हैं उन्हें जल्द से जल्द ढक दिया जाए जिससे किसी और की जान न जाए।
केदार नगर पार्षद गुड्डू मेनन ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी अगर पार्षदों के पत्र पर कार्रवाई करते तो यह हादसा नहीं होता। जनता की समस्याओं के लिए उन्हें एक महीने पहले ही चेताया था लेकिन पत्र को किसी फाइल में दबा दिया गया।