वृंदावन: बिखरी उम्मीदों को संवारेगा नया साल, तीर्थनगरी में फिर लौटेगी रौनक
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बीता साल 2020 तीर्थनगरी वृंदावन के लिए पीड़ादायक रहा। कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों के बंद होने से लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। कई काम-धंधे बंद हो गए। विकास का पहिया पूरी तरह से थम गया था। इसमें भी मंदिरों के आसपास खुदी सड़कें लोगों को वर्ष भर पीड़ा का अहसास कराती रहीं। अब नया साल 2021 बांकेबिहारी की नगरी के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है।
वृंदावन जहां सब कुछ धार्मिक पर्यटन पर निर्भर है, वहां सात माह तक कान्हा के भक्तों के कदम न पड़ने से सब कुछ ठहर सा गया था। यह पहली बार हुआ जब विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी सहित सभी मंदिरों में पट बंद रहे। कोरोना संक्रमण के कारण पैदा हुई इस स्थिति ने वृंदावन के 50 हजार से ज्यादा लोगों को झकझोर कर रख दिया।
धार्मिक पर्यटन पर निर्भर यहां का रोजगार भी चौपट हो गया। करीब 500 करोड़ से ज्यादा का लोगों को नुकसान हुआ। इससे अधिकांश लोगों के समक्ष दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया। यहां तक कि विकास परियोजनाओं को भी ब्रेक लग गया। खुदी सड़कें वर्ष भर दुश्वारियां पैदा करती रहीं। वृंदावन कुंभ बैठक के लिए प्रस्तावित बजट सिर्फ 25 करोड़ में सिमट गया।
नए साल में एक बार फिर नई उम्मीद जगी है। मंदिरों में फिर चहल-पहल बढ़ने लगी है। श्रद्धालुओं के आने से दुकानदारों के चेहरों पर भी चमक आने लगी है। देश-विदेश जानी वाली ठाकुर जी की पोशाक की खरीदारी भी शुरू हो गई है।
टूटी हुईं गलियों में काम पूरा होने पर जल्द सुंदर लुक आने की उम्मीद है। यमुना पर घाट तैयार हो रहा है। स्वच्छता के लिए अतिरिक्त प्रबंध पर्यटन की संभावना को बढ़ा रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे और मथुरा से वृंदावन को आने वाले मार्गों का विस्तारीकरण भी नए साल में होने जा रहा है।
कुंभ बैठक देगी वृंदावन को एक और पहचान
नए साल में हरिद्वार से पहले आयोजित होने वाली कुंभ मेला बैठक वृंदावन को एक और नई पहचान देने जा रही है। इसमें हजारों साधु-संतों की मौजूदगी वृंदावन की धार्मिक महिमा को और बढ़ाएगी। प्रदेश सरकार इस आयोजन का प्रदेश स्तर पर प्रचार भी करेगी। यहां नवीन घाट सहित अनेक नई परियोजनाएं भी इसके माध्यम से मिलेंगी।