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वायरल फीवर और और पीलिया का खतरा: एसएन में मरीजों की भीड़, इमरजेंसी फुल; कुछ को देनी पड़ रही ऑक्सीजन
Sat, 05 Sep 2026 09:52 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 05 Sep 2026 09:52 AM IST
सार
बदलते मौसम और प्रदूषण के बीच आगरा में वायरल फीवर, डायरिया, निमोनिया और पीलिया के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी फुल चल रही है। गंभीर हालत में पहुंच रहे अस्थमा और सांस के मरीजों को ऑक्सीजन देनी पड़ रही है, जबकि रोजाना 30-40 मरीज भर्ती हो रहे हैं।
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एसएन इमरजेंसी में भर्ती मरीज
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
बदलता मौसम लोगों को बीमार कर रहा है। अस्थमा-सांस रोगियों की परेशानी भी बढ़ा रहा है। हालत गंभीर होने पर मरीज इमरजेंसी आ रहे हैं। इनको ऑक्सीजन भी देनी पड़ रही है। वायरल फीवर, डायरिया, निमोनिया और पीलिया के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। इससे इमरजेंसी फुल है।
आकस्मिक अधिकारी डॉ. संजीव बघेल ने बताया कि मौसम बदलने, प्रदूषण से एलर्जी बढ़ रही है। अस्थमा और सांस रोगियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। सीने में जकड़न के साथ सांस उखड़ रही है। इससे अस्थमा अटैक का खतरा भी है। ऐसे मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। इनको दवा देने के साथ मरीज को ऑक्सीजन भी दी जा रही है।
इमरजेंसी प्रभारी डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि बारिश हो रही है और तापमान में भी लगातार अंतर आ रहा है। इससे पीलिया, वायरल फीवर, निमोनिया, डायरिया के मरीजों की संख्या दोगुना तक बढ़ गई है। हालत खराब होने पर रोजाना 30-40 मरीज भर्ती हो रहे हैं। राहत की बात है कि इलाज के बाद 24 घंटे में अधिकांश मरीज डिस्चार्ज हो रहे हैं।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते सांस, अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। दरअसल, सांस नलिकाओं में कार्बन तत्व और धूल के अति सूक्ष्म कण पहुंचने से संक्रमित हो जाती हैं। इससे सीने में जकड़न, खांसी होने लगती है। टीबी के मरीजों के खांसी के साथ खून आने की भी शिकायत मिल रही है। मरीजों को दवाओं की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है। बचाव के बारे में भी बताया जा रहा है।
इन बातों का रखें ध्यान
- पानी को उबालने के बाद उपयोग करें।
- गले-कटे हुए फल खाने से बचें।
- दूषित स्थानों पर बिकने वाली सामग्री न खाएं-पिएं।
- सुबह-शाम गर्म पानी से भाप लें, सेंधा नमक से गरारे करें।
- बुखार आने पर पैरासिटामॉल लें, आराम न मिलने पर डॉक्टर को दिखाएं।
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आकस्मिक अधिकारी डॉ. संजीव बघेल ने बताया कि मौसम बदलने, प्रदूषण से एलर्जी बढ़ रही है। अस्थमा और सांस रोगियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। सीने में जकड़न के साथ सांस उखड़ रही है। इससे अस्थमा अटैक का खतरा भी है। ऐसे मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। इनको दवा देने के साथ मरीज को ऑक्सीजन भी दी जा रही है।
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इमरजेंसी प्रभारी डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि बारिश हो रही है और तापमान में भी लगातार अंतर आ रहा है। इससे पीलिया, वायरल फीवर, निमोनिया, डायरिया के मरीजों की संख्या दोगुना तक बढ़ गई है। हालत खराब होने पर रोजाना 30-40 मरीज भर्ती हो रहे हैं। राहत की बात है कि इलाज के बाद 24 घंटे में अधिकांश मरीज डिस्चार्ज हो रहे हैं।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते सांस, अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। दरअसल, सांस नलिकाओं में कार्बन तत्व और धूल के अति सूक्ष्म कण पहुंचने से संक्रमित हो जाती हैं। इससे सीने में जकड़न, खांसी होने लगती है। टीबी के मरीजों के खांसी के साथ खून आने की भी शिकायत मिल रही है। मरीजों को दवाओं की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है। बचाव के बारे में भी बताया जा रहा है।
इन बातों का रखें ध्यान
- पानी को उबालने के बाद उपयोग करें।
- गले-कटे हुए फल खाने से बचें।
- दूषित स्थानों पर बिकने वाली सामग्री न खाएं-पिएं।
- सुबह-शाम गर्म पानी से भाप लें, सेंधा नमक से गरारे करें।
- बुखार आने पर पैरासिटामॉल लें, आराम न मिलने पर डॉक्टर को दिखाएं।