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सूख रहा है मासूमों का खून, कुपोषण के खिलाफ जंग में हार रहा है सरकारी तंत्र
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कासगंज पड़ताल की खबर से संबंधित फोटो पोषण पुनर्वास केंद्र में डेंगू के उपचार को बैठे स्वास्थ्यक?
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। कुपोषण से जंग जीत लेंगे हम ये बोल सुनने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन धरातल की रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है। जिले पर अब कुपोषण का बदनुमा दाग लग रहा है। यहां कुपोषण से जूझते मासूमों का खून सूखता जा रहा है। सेहत खतरे में है। तब भी जिम्मेदार संजीदा नहीं दिख रहे हैं। कोरोना की लड़ाई में कुपोषण से जीत का लक्ष्य भटक गए हैं। जिले में लंबे समय से पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं है।
जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है, लेकिन धरातल पर उन्हें पोषण की संजीवनी नहीं मिल पा रही। वैसे तो जिलेभर में तमाम केस हैं। यदि एक मात्र गांव सुल्तानपुर पर ही नजर दौड़ाएं तो यहां की अनीता कुमारी पत्नी दुरजन सिंह के पांच संतान हैं। बड़ा बेटा 7 साल का मोरमुकुट, दूसरी बेटी साढ़े पांच साल की रानी, उससे छोटी बेटी साढ़े तीन साल की किरन, दो साल की सरोज और पांच महीने की मोनिका है। इनमें मोरमुकुट और रानी अतिकुपोषित श्रेणी मे है। मोरमुकुट में 11 किलोवजन और खून 6 प्वाइंट है तो रानी में 8 किलो वजन है और खून 5 प्वाइंट है। मोनिका भी कुपोषित है। इस परिवार को भी खाद्यान्न और पुष्टाहार योजना का लाभ मिल रहा है जबकि अन्य योजनाओं के लाभ से यह परिवार वंचित है। इसके इतर इस परिवार को नि:शुल्क गो दान योजना का लाभ देने की कोशिश हुई तो यह परिवार दूध देती गाय मांग रहा था जो गोशालाओं में नहीं हैं।
कुपोषण से निपटने को गाय दान योजना की स्थिति
कुपोषित परिवारों को गाय देने की योजना की अधिकांश परिवारों को जानकारी ही नहीं है। वे नहीं जानते कि इस तरह की कोई योजना संचालित है। अब तक मात्र 6 कुपोषित बच्चों के परिवार को गाय मिली है, लेकिन परिवारों के लिए यह योजना हास्यपद दिखाई दे रही है। सेहत सुधारने के लिए गाय का दूध कुपोषित बच्चों को मिले, लेकिन इनमें से एक भी गाय दूध नहीं दे रही। कुपोषित बच्चों का परिवार अब इन गायों को चारा खिलाने का अतिरिक्त भार मान रहे हैं।
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कोरोना काल से ही समाप्त है पोषण पुनर्वास केंद्र
कोरोना काल में जिला अस्पताल को कोरोना अस्पताल बनाया गया तो वहां से पोषण पुर्नवास केंद्र समाप्त हो गया। लगभग दो सालों से पोषण पुर्नवास केंद्र अव्यवस्थित है। जिला अस्पताल में जो केंद्र कोरोना काल से पहले था वहां अब डेंगू वार्ड बना दिया गया है। अन्य बीमारियों से लड़ाई की जंग के बीच स्वास्थ्य महकमा कुपोषण से जंग में हार रहा है। हांलाकि दावा किया जा रहा है कि जल्द ही यह केंद्र फिर से व्यवस्थित किया जाएगा।
आंकड़े की नजर से-
- 6803 हैं जिले में कुपोषित बच्चे।
- 1830 हैं जिले में अति कुपोषित बच्चे।
जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र कोरोना काल में खत्म कर दिया गया। अब वहां डेंगू वार्ड बना दिया गया है। जल्द ही पोषण पुनर्वास केंद्र शुरू किया जाएगा। इसकी तैयारी कर ली गई है- डा. एसपी सिंह, डिप्टी सीएमओ।
कुपोषित परिवारों को गाय दी जा रही हैं। अब तक 6 परिवारों को गाय दी जा चुकी हैं और जो परिवार इच्छुक होंगे उन्हें भी गाय उपलब्ध कराई जाएगी- एके सागर, डिप्टी सीवीओ।
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जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है, लेकिन धरातल पर उन्हें पोषण की संजीवनी नहीं मिल पा रही। वैसे तो जिलेभर में तमाम केस हैं। यदि एक मात्र गांव सुल्तानपुर पर ही नजर दौड़ाएं तो यहां की अनीता कुमारी पत्नी दुरजन सिंह के पांच संतान हैं। बड़ा बेटा 7 साल का मोरमुकुट, दूसरी बेटी साढ़े पांच साल की रानी, उससे छोटी बेटी साढ़े तीन साल की किरन, दो साल की सरोज और पांच महीने की मोनिका है। इनमें मोरमुकुट और रानी अतिकुपोषित श्रेणी मे है। मोरमुकुट में 11 किलोवजन और खून 6 प्वाइंट है तो रानी में 8 किलो वजन है और खून 5 प्वाइंट है। मोनिका भी कुपोषित है। इस परिवार को भी खाद्यान्न और पुष्टाहार योजना का लाभ मिल रहा है जबकि अन्य योजनाओं के लाभ से यह परिवार वंचित है। इसके इतर इस परिवार को नि:शुल्क गो दान योजना का लाभ देने की कोशिश हुई तो यह परिवार दूध देती गाय मांग रहा था जो गोशालाओं में नहीं हैं।
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कुपोषण से निपटने को गाय दान योजना की स्थिति
कुपोषित परिवारों को गाय देने की योजना की अधिकांश परिवारों को जानकारी ही नहीं है। वे नहीं जानते कि इस तरह की कोई योजना संचालित है। अब तक मात्र 6 कुपोषित बच्चों के परिवार को गाय मिली है, लेकिन परिवारों के लिए यह योजना हास्यपद दिखाई दे रही है। सेहत सुधारने के लिए गाय का दूध कुपोषित बच्चों को मिले, लेकिन इनमें से एक भी गाय दूध नहीं दे रही। कुपोषित बच्चों का परिवार अब इन गायों को चारा खिलाने का अतिरिक्त भार मान रहे हैं।
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कोरोना काल से ही समाप्त है पोषण पुनर्वास केंद्र
कोरोना काल में जिला अस्पताल को कोरोना अस्पताल बनाया गया तो वहां से पोषण पुर्नवास केंद्र समाप्त हो गया। लगभग दो सालों से पोषण पुर्नवास केंद्र अव्यवस्थित है। जिला अस्पताल में जो केंद्र कोरोना काल से पहले था वहां अब डेंगू वार्ड बना दिया गया है। अन्य बीमारियों से लड़ाई की जंग के बीच स्वास्थ्य महकमा कुपोषण से जंग में हार रहा है। हांलाकि दावा किया जा रहा है कि जल्द ही यह केंद्र फिर से व्यवस्थित किया जाएगा।
आंकड़े की नजर से-
- 6803 हैं जिले में कुपोषित बच्चे।
- 1830 हैं जिले में अति कुपोषित बच्चे।
जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र कोरोना काल में खत्म कर दिया गया। अब वहां डेंगू वार्ड बना दिया गया है। जल्द ही पोषण पुनर्वास केंद्र शुरू किया जाएगा। इसकी तैयारी कर ली गई है- डा. एसपी सिंह, डिप्टी सीएमओ।
कुपोषित परिवारों को गाय दी जा रही हैं। अब तक 6 परिवारों को गाय दी जा चुकी हैं और जो परिवार इच्छुक होंगे उन्हें भी गाय उपलब्ध कराई जाएगी- एके सागर, डिप्टी सीवीओ।