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UP: आगरा में गंगा दशहरा पर अनोखा प्रदर्शन, पानी से नहीं रेत से किया स्नान; जानें क्या रही वजह

Mon, 17 Jun 2024 01:51 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 17 Jun 2024 01:51 PM IST
सार

आगरा में यमुना का हाल बेहाल है। यहां आचमन तक के लिए पानी नहीं है। इसे लेकर गंगा दशहरा पर लोगों ने अनोखा प्रर्दशन किया। 
 

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Unique performance on Ganga Dussehra in Agra bathed with sand and not with water Know reason
रेत से स्नान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में गंगा दशहरा पर यमुना की दुर्दशा पर रिवर कनेक्ट कैंपेन के तहत यमुना किनारा मार्ग पर आरती स्थल पर रविवार को अनोखा प्रदर्शन किया गया। यमुना मैया की जय बोलकर सिर पर बाल्टी से बालू डालकर प्रतीकात्मक स्नान किया गया। योगी-मोदी सुनो हमारी, यमुना को पानी दो... के नारे भी लगाए। जुगल श्रोत्रिय ने कहा कि यमुना में आचमन तक के लिए पानी नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार चाहें तो आगरा को बैराज देकर पानी का संकट दूर कर सकती हैं। वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल, चतुर्भुज तिवारी, शशिकांत उपाध्याय, डॉ. हरेंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे।
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स्नान की औपचारिकता
 गंगा दशहरा पर यमुना स्नान के लिए श्रद्धालु सुबह से ही घाटों पर डटे रहे। मंदिरों में भी भीड़ रही। यमुना में जल बहुत कम था, वह भी साफ नहीं था, इसलिए कुछ ने डुबकी लगाई तो कुछ भक्तों ने शरीर पर जल छिड़ककर स्नान की औपचारिकता पूरी की। बल्केश्वर के पार्वती घाट पर ज्यादा भीड़ दिखी। यहां यमुना नदी की धारा घाट पर ही थी, इसलिए लोग स्नान करने यहां पहुंचे। महालक्ष्मी मंदिर के घाट पर भी श्रद्धालुओं ने स्नान किया। शहर के प्रमुख हाथी घाट पर अव्यवस्था रही। रामबाग घाट, दयालबाग का पोइया घाट, कैलाश घाट, दशहरा घाट आदि पर भी रौनक रही।

यमुना स्नान के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो इसलिए नगर निगम ने घाटों पर बैरिकेडिंग कराई थी। बल्केश्वर घाट पर पुलिस और पीएसी तैनात रही। बल्केश्वर महादेव मंदिर, कैलाश मंदिर, बेलनगंज में यमुना के किनारे के देवालयों, मनःकामेश्वर मंदिर सहित रावतपाड़ा के अन्य मंदिरों में विशेष पूजन किया गया।

 
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खरबूज, तरबूज और सुराही का दान
गंगा दशहरा पर खरबूज, तरबूज और सुराही की बिक्री काफी हुई। इसके दान करने की परंपरा है। यमुना के घाटों पर इनकी खेती होती है, यह घाटों के किनारे आसानी से मिल जाता था। इसको दान करके फिर घाट पर खाने की परंपरा शुरू हुई जो आज भी है।

 
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घाट पर कराया मुंडन
बच्चों का मुंडन कराने के लिए भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बच्चों का मुंडन कराने के बाद यमुना में स्नान किया और मंदिर में पूजा अर्चना की।

 

लगी शर्बत की प्याऊ
शहर में जगह-जगह शर्बत की प्याऊ लगाई गई। श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत स्तर पर शर्बत पिलाया, वहीं सामाजिक संगठनों ने भी प्याऊ लगाईं।
 
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