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UP: अब अपराधियों की भी होगी यूनिक आई-डी, पुलिस के पास रहेगा फोटो, फिंगरप्रिंट और वॉइस सैंपल तक का रिकॉर्ड
Sat, 21 Feb 2026 11:37 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:37 AM IST
सार
आगरा पुलिस कमिश्नरेट 50 हजार से अधिक आरोपियों का फोटो, फिंगरप्रिंट और वॉइस सैंपल लेकर एआई आधारित ‘यक्ष’ एप में यूनिक आईडी तैयार करेगी। इससे एक क्लिक पर अपराधी का पूरा रिकॉर्ड मिलेगा और दोबारा अपराध करने पर तुरंत पहचान संभव होगी।
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आगरा पुलिस, पुलिस आयुक्त, agra police, police commissioner
- फोटो : संवाद
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विस्तार
आगरा कमिश्नरेट पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए एआई की मदद ले रही है। सीसीटीवी कैमरों के साथ 3-डी कैमरे तक का प्रयोग किया जा रहा है। अब जल्द ही पुलिस के पास अपराधियों की यूनिक आईडी होगी। आधार की तरह डाटा फीड होगा। घर-घर जाकर आरोपियों के फोटो और फिंगर प्रिंट लिए जाएंगे। इससे एक क्लिक पर अपराधी की जानकारी पुलिस को मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर मिल जाएगी।
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कमिश्नरेट के नगर जोन में 26673 अपराधी पंजीकृत है। तकरीबन 24 हजार पूर्वी और पश्चिमी जोन में हैं। इनमें 21 श्रेणियों के डकैती, लूट, चोरी, हत्या, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, साइबर अपराध, गुंडा, गैंगस्टर आदि के मामलों के अपराधी शामिल हैं। इनका डाटा यक्ष एप पर फीड किया जा रहा है। कई बार चोरी और लूट के मामले में पुलिस को फुटेज मिलने के बाद भी अपराधियों की पहचान करने में समय लग जाता है। इस कारण घटनाओं के खुलासे में देरी होती है।
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इसके साथ ही किसी अपराधी के पकड़े जाने पर उसका आपराधिक इतिहास खंगालना भी टेढ़ी खीर होता है। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि कमिश्नरेट में 50 हजार से अधिक आरोपी और अपराधी हैं। इन सभी का डाटा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए बीट सिपाही और दरोगा को लगाया गया है। वह आरोपियों के घर जाएंगे। उनकी फोटो खींचेंगे। इसके बाद फिंगर प्रिंट भी दर्ज करेंगे। इससे भविष्य में कभी अपराधी दोबारा अपराध करने पर पकड़े जाएंगे तो बायोमेट्रिक से पता चल जाएगा। इसके माध्यम से हर किसी का एक यूनिक नंबर होगा। उसके घर परिजन की जानकारी भी होगी।
पहले से हैं त्रिनेत्र और पहचान एप
पूर्व में पुलिस के पास त्रिनेत्र और पहचान एप भी हैं। त्रिनेत्र एप में जेल भेजे गए अपराधी का पूरा डोजियर तैयार होता है। इसमें अंगूठे की छाप ली जाती है। इसमें परिजन की जानकारी होती है। निवास स्थान का ब्योरा भरा जाता है। पहचान एप में अपराधी का नाम और उसके बारे में ही जानकारी होती है। अब यक्ष एप में एफआईआर और आरोप पत्र में सामने आई जानकारी को दर्ज किया जाएगा। अपराधी की आवाज का भी नमूना होगा। फोटो भी होगी।
पूर्व में पुलिस के पास त्रिनेत्र और पहचान एप भी हैं। त्रिनेत्र एप में जेल भेजे गए अपराधी का पूरा डोजियर तैयार होता है। इसमें अंगूठे की छाप ली जाती है। इसमें परिजन की जानकारी होती है। निवास स्थान का ब्योरा भरा जाता है। पहचान एप में अपराधी का नाम और उसके बारे में ही जानकारी होती है। अब यक्ष एप में एफआईआर और आरोप पत्र में सामने आई जानकारी को दर्ज किया जाएगा। अपराधी की आवाज का भी नमूना होगा। फोटो भी होगी।
एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी
डीसीपी सिटी ने बताया कि यक्ष एप के माध्यम से फोटो डालने पर एआई की मदद से पहचान हो जाएगी। अगर फोटो से नहीं मिल पा रहा है तो आवाज का सैंपल लेकर भी इस एप पर डाल दिया जाएगा। इसका प्रयोग लूट, डकैती जैसी घटनाओं में ही हो सकेगा। एक क्लिक पर अपराधी की जानकारी होगी। अन्य जिले में पकड़े जाने पर भी वहां की पुलिस डाटा फीड करेगी। एक से अधिक अपराध मिलने पर यूनिट आईडी से पुराना रिकॉर्ड सामने आ जाएगा। जेल से बाहर आने पर भी नोटिफिकेशन मिलेगा। उनका सत्यापन किया जाएगा।
डीसीपी सिटी ने बताया कि यक्ष एप के माध्यम से फोटो डालने पर एआई की मदद से पहचान हो जाएगी। अगर फोटो से नहीं मिल पा रहा है तो आवाज का सैंपल लेकर भी इस एप पर डाल दिया जाएगा। इसका प्रयोग लूट, डकैती जैसी घटनाओं में ही हो सकेगा। एक क्लिक पर अपराधी की जानकारी होगी। अन्य जिले में पकड़े जाने पर भी वहां की पुलिस डाटा फीड करेगी। एक से अधिक अपराध मिलने पर यूनिट आईडी से पुराना रिकॉर्ड सामने आ जाएगा। जेल से बाहर आने पर भी नोटिफिकेशन मिलेगा। उनका सत्यापन किया जाएगा।