{"_id":"9913b7501593104ff582feed12d8828d","slug":"truth-of-bridge-unveiled-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो साल में ही खुलने लगी ‘पुल की पोल’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो साल में ही खुलने लगी ‘पुल की पोल’
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 25 Jan 2016 02:18 AM IST
विज्ञापन
गुरुद्वारा गुरु का ताल (डबल फाटक) रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण की पोल दो वर्ष में ही खुलने लगी है। पुल पर कई जगह गड्ढे होने लगे हैं और रेलवे लाइन के ऊपर के पार्ट पर कंकरीट उखड़ने से लेंटर की सरिया भी नजर आने हैं। जल्द इन स्थानों की मरम्मत नहीं की गई तो पुल को अधिक नुकसान हो सकता है।
गुरुद्वारा गुरु का ताल आरओबी का निर्माण नवंबर 2012 में पूर्ण हुआ था। कई महीने तक पुल विधिवत उद्घाटन के इंतजार में चालू नहीं हो सका। इसको लेकर जनता ने आंदोलन किया तब जाकर 2013 में पुल पर आवागमन प्रारंभ हुआ। करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल को चालू हुए लगभग दो वर्ष ही बीते हैं कि पुल में गड्ढे होने लगे हैं। भावना टावर एंड से पुल पर चढ़ते गड्ढे हो गए हैं जिनकी वजह से वाहन चालकों को दिक्कत होती है। गुुरुद्वारा की ओर से आने पर पुल के मुख्य और बेहद अहम हिस्से में (रेल लाइन के ऊपर) कंकरीट उखड़ने लगा है। वहां एक गड्ढा भी हो गया और लेंटर की सरिया नजर आने लगी हैं। गड्ढे से महज कुछ इंच की दूरी पर ही ज्वाइंट्स के गार्डर हैं। जब वाहन यहां से गुजरता है तो जोर का झटका लगता है। ये झटके पुल के लिए खतरनाक हो सकते हैं। यही नहीं पुल की स्ट्रीट लाइट के सभी कंट्रोल पैनल खुले पड़े हैं। ये कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। लेकिन सेतु निगम के अधिकारियों को इसकी सुध नहीं है। ये हालात तब हैं जब सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर का कार्यालय इस पुल के नीचे बना है। अधिकारी रोज आते जाते हैं लेकिन इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
.
अंबेडकर पुल और शास्त्रीपुरम का भी था यही हाल
आगरा। ऐसा नहीं है कि यह समस्या गुरुद्वारा गुरु का ताल आरओबी पर हुई है। इससे पहले शास्त्रीपुरम आरओबी में यही दिक्कतें हुई थीं। शास्त्रीपुरम आरओबी एप्रोच रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे और पुल के मुख्य हिस्से में भी दरार आई थीं जिनकी दो बार मरम्मत हो चुकी है। इसी तरह यमुना नदी पर बने अंबेडकर पुल के ज्वाइंट्स के गार्डर टूट गए थे, जिन्हें जोड़ने के लिए पुल को एक सप्ताह तक बंद रखना पड़ा था।
विज्ञापन
सेतु निगम ने आगरा में बनाए हैं ये पुल
- अंबेडकर पुल (यमुना)
- शास्त्रीपुरम आरओबी
- सिकंदरा आरओबी
- गुरुद्वारा गुरु का ताल आरओबी
- रावली पुल (एमजी रोड)
- इनर रिंग रोड (निर्माणाधीन)
- यूपीएसआईडीसी आरओबी (निर्माणाधीन)
वर्ल्ड क्लास संस्था है राज्य सेतु निगम
आगरा। राज्य सेतु निगम वर्ल्ड क्लास संस्था है। देश विदेश में तमाम बड़े पुलों का निर्माण राज्य सेतु निगम कर चुका है। सेतु निगम को आईएसओ 9001 प्रमाण पत्र प्राप्त है। ऐसे में यदि पुलों में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है संस्था की साख पर बट्टा लगना स्वाभाविक है।
‘स्ट्रीट लाइट का कार्य नगर निगम या विकास प्राधिकरण की ओर से कराया गया है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। रही बात आरओबी के स्ट्रैक्चर की कहीं टूट फूट की तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा। पुल में कहीं और भी किसी प्रकार की दिक्कत होगी तो उसका भी परीक्षण कराया जाएगा।’
नवाब सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, राज्य सेतु निगम
विज्ञापन
गुरुद्वारा गुरु का ताल आरओबी का निर्माण नवंबर 2012 में पूर्ण हुआ था। कई महीने तक पुल विधिवत उद्घाटन के इंतजार में चालू नहीं हो सका। इसको लेकर जनता ने आंदोलन किया तब जाकर 2013 में पुल पर आवागमन प्रारंभ हुआ। करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल को चालू हुए लगभग दो वर्ष ही बीते हैं कि पुल में गड्ढे होने लगे हैं। भावना टावर एंड से पुल पर चढ़ते गड्ढे हो गए हैं जिनकी वजह से वाहन चालकों को दिक्कत होती है। गुुरुद्वारा की ओर से आने पर पुल के मुख्य और बेहद अहम हिस्से में (रेल लाइन के ऊपर) कंकरीट उखड़ने लगा है। वहां एक गड्ढा भी हो गया और लेंटर की सरिया नजर आने लगी हैं। गड्ढे से महज कुछ इंच की दूरी पर ही ज्वाइंट्स के गार्डर हैं। जब वाहन यहां से गुजरता है तो जोर का झटका लगता है। ये झटके पुल के लिए खतरनाक हो सकते हैं। यही नहीं पुल की स्ट्रीट लाइट के सभी कंट्रोल पैनल खुले पड़े हैं। ये कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। लेकिन सेतु निगम के अधिकारियों को इसकी सुध नहीं है। ये हालात तब हैं जब सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर का कार्यालय इस पुल के नीचे बना है। अधिकारी रोज आते जाते हैं लेकिन इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
विज्ञापन
.
अंबेडकर पुल और शास्त्रीपुरम का भी था यही हाल
आगरा। ऐसा नहीं है कि यह समस्या गुरुद्वारा गुरु का ताल आरओबी पर हुई है। इससे पहले शास्त्रीपुरम आरओबी में यही दिक्कतें हुई थीं। शास्त्रीपुरम आरओबी एप्रोच रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे और पुल के मुख्य हिस्से में भी दरार आई थीं जिनकी दो बार मरम्मत हो चुकी है। इसी तरह यमुना नदी पर बने अंबेडकर पुल के ज्वाइंट्स के गार्डर टूट गए थे, जिन्हें जोड़ने के लिए पुल को एक सप्ताह तक बंद रखना पड़ा था।
विज्ञापन
सेतु निगम ने आगरा में बनाए हैं ये पुल
- अंबेडकर पुल (यमुना)
- शास्त्रीपुरम आरओबी
- सिकंदरा आरओबी
- गुरुद्वारा गुरु का ताल आरओबी
- रावली पुल (एमजी रोड)
- इनर रिंग रोड (निर्माणाधीन)
- यूपीएसआईडीसी आरओबी (निर्माणाधीन)
वर्ल्ड क्लास संस्था है राज्य सेतु निगम
आगरा। राज्य सेतु निगम वर्ल्ड क्लास संस्था है। देश विदेश में तमाम बड़े पुलों का निर्माण राज्य सेतु निगम कर चुका है। सेतु निगम को आईएसओ 9001 प्रमाण पत्र प्राप्त है। ऐसे में यदि पुलों में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है संस्था की साख पर बट्टा लगना स्वाभाविक है।
‘स्ट्रीट लाइट का कार्य नगर निगम या विकास प्राधिकरण की ओर से कराया गया है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। रही बात आरओबी के स्ट्रैक्चर की कहीं टूट फूट की तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा। पुल में कहीं और भी किसी प्रकार की दिक्कत होगी तो उसका भी परीक्षण कराया जाएगा।’
नवाब सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, राज्य सेतु निगम