आगरा: बीमा कंपनी अधिकारी बनकर 200 लोगों से तीन करोड़ रुपये ठगे, तीन आरोपी गिरफ्तार
बीमा कंपनी के ग्राहकों को कंपनी अधिकारी बनकर कॉल करते थे आरोपी
आरोपियों के खाते से तीन साल में करीब तीन करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ
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आगरा रेंज की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बीमा कंपनी का अधिकारी बनकर पॉलिसी धारकों से ठगी करने वाले गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि गैंग तीन साल से यह काम कर रहा था। पहले कॉल सेंटर में सभी काम करते थे।
वहां से लोगों का डाटा चोरी करने के बाद कॉल करके रुकी हुई पालिसी का भुगतान दिलाने के नाम पर सरचार्ज राशि के रूप में रकम जमा कराते थे। आरोपियों के पांच खातों में तीन करोड़ से अधिक धनराशि का लेन-देन हुआ है। आशंका है कि उन्होंने तकरीबन 200 लोगों को ठगी का शिकार बनाया।
आईजी रेंज ए. सतीश गणेश ने बताया कि मथुरा जिले के थाना रिफाइनरी निवासी ललित पाठक के पास एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने पॉलिसी के 1247392 रुपये डीडी के माध्यम से दिलाने की बात कही। उनकी एलआईसी पालिसी में नाम ललित पाठक की जगह ललित किशोर था। पॉलिसी का लाभ दिलवाने के नाम पर 43 हजार रुपये की मांग की। शक होने पर ललित ने रेंज साइबर थाना में शिकायत की।
जांच में सीओ हरीपर्वत अभिषेक अग्रवाल को लगाया गया। विवेचना के बाद गैंग के तीन सदस्यों को सोमवार को एमजी रोड से एसएन मेडिकल कॉलेज के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस टीम को आशंका है कि गैंग ने तकरीबन तीन साल में 200 से अधिक लोगों से तीन करोड़ की ठगी की है। पीड़ितों के बारे में टीम जानकारी जुटाई जा रही है।
इनकी हुई गिरफ्तारी
- सुमित कश्यप निवासी गांव देवला, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा।
- रमेश प्रसाद गिरी निवासी गांव हलोरा, शौहरतगढ़, सिद्धार्थ नगर।
- मोहम्मद आकिब निवासी हिंदूपुरा खेड़ा, दिपू सराय, संभल।
ये हुई बरामदगी
- छह मोबाइल
- सात सिम कार्ड
- दो एटीएम कार्ड
- एक पैन कार्ड
- दो आधार कार्ड
- दो मेट्रो कार्ड
- चार पहचान पत्र
- दो आरसी
- एक्सल फाइल में डाटा
- पांच खातों को विवरण
कॉल सेंटर से चोरी किया ग्राहकों का डाटा
आईजी के मुताबिक, तीनों आरोपी सुमित, रमेश और मोहम्मद आकिब तीन साल पूर्व दिल्ली एनसीआर की आईआईएफएल नाम की एक कंपनी में काम करते थे। कंपनी बीमा कंपनी के लिए कॉल सेंटर के रूप में कार्य करती थी। कर्मचारी लैप्स पॉलिसी को फिर से चालू कराने और शेयर ट्रेडिंग के लिए कहते थे। तीनों अभियुक्तों ने कंपनी में काम करते लोगों से ठगी का प्लान बनाया। उन्होंने विभिन्न बीमा पॉलिसी के धारकों का डाटा चोरी कर लिया। कंपनी बंद होने पर खुद काम करने लगे।
सरचार्ज के रूप में जमा कराते थे रकम
पुलिस ने बताया कि आरोपी बीमा कंपनी के ग्राहकों को कॉल कंपनी अधिकारी बनकर करते थे। कहते थे कि रुकी पॉलिसी में अच्छा रिटर्न मिल रहा है। इसके लिए कुछ कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। डीडी बनकर घर पहुंच जाएगा। पॉलिसी को आसानी ईएमआई में चालू करा दिया जाएगा।
इसके साथ ही चालू पालिसी में किस्त जमा नहीं करने पर कुल रकम में कमी होने का भय भी दिखाते थे। इसके बाद लोगों को व्हाट्स एप और ईमेल पर फर्जी डीडी की फोटो भेजते थे, जिससे लोग विश्वास करने लगते हैं। इसके बाद 30 से 50 हजार रुपये खाते में सरचार्ज के रूप में जमा करा लेते थे।
ग्राहकों के कागजात से ही खुलवाए बैंक खाते
रेंज साइबर क्राइम थाना पुलिस के मुताबिक, लोगों से रकम चेक के माध्यम से लेते थे। इसके बदले फर्जी पॉलिसी बांड और डीडी दिखाते थे। फर्जी कागजात पर खाते खुलवा रखे थे, जिनमें चेक लगाया जाता था। रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करके निकालते थे। खाते खुलवाने के लिए लगाए कागजात पीड़ितों के ही होते थे।
उनसे पॉलिसी शुरू करने के नाम पर यह कागजत और फोटो लेते थे। इनसे सिम भी लेते थे, जिनका इस्तेमाल कॉल करने में करते थे। लोगों को अपने नाम जितेंद्र माथुर, विनोद बंसल, सिद्धार्थ मिश्रा, मुकेश माथुर, अनुराग त्रिपाठी, राजीव कुमार आदि बताते थे। टीम को आरोपियों के आईडीएफसी बैंक के एक खाता, तीन यूनियन बैंक के खाते और एक आईसीआईसीआई बैंक के खातों की जानकारी मिली है।
इनके बैंक खातों से तीन करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ है। इन खातों में रकम आने के बाद अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करते थे। पुलिस ने कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, एक्सिस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचडीएफसी बैंक के खातों में जमा तकरीबन 12 लाख रुपये को फ्रीज कराया है।