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झूला तो पड़ गए, अमवा की डाल पे जी...
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आगरा। झूला तो पड़ गए, अमवा की डाल पे जी...गुनगुनाती हुईं रीना देवी पुरानी यादों में खो जाती हैं। सावन के महीने में बारिश की बूंदों के बीच झूले की पींग बढ़ाते जाना। सखियों के बीच की होड़ कि कौन सबसे ऊंचाई तक जाता है। बोलीं कि अब वह बात कहां। त्योहार की औपचारिकता रह गई है। झूले हैं न सखियों के साथ की वह ठिठोली। बस यह सुकून है कि घरों में महिलाएं तीज पर मेहंदी लगाने की परंपरा को अभी भी नहीं भूली हैं।
हरियाली तीज का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा हालांकि यह दस अगस्त को शाम 6:05 बजे शुरू हो जाएगी। घरों में त्योहार की तैयारी हो रही हैं। महिलाओं का कहना है अब वह बात नहीं है। पिछले दो दशक में त्योहार का उल्लास और रंग जाता रहा है।
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हरियाली तीज पर गांव में झूले की कतारें दिखती थीं। हर घर के दरवाजे और आंगन में झूला पड़ा होता था। अब कहीं झूले दिखते ही नहीं हैं।
-सुनीत भास्कर, शास्त्रीपुरम
हरियाली तीज पर महिलाएं मायके जाती थीं। क्या रौनक होती। सभी सहेलियां मिलतीं और यादें ताजा करतीं। अब न पहले की तरह मायके से बुलावा आता है न कोई जाता है।
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-रेनू कुमारी, आवास विकास
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मैं अब 68 साल की हो गई हूं। 40 साल पहले तक तीज पर वह रौनक देखी है कि क्या बताऊं। पेड़ की सबसे ऊंची और मजबूत डाल का चयन कर झूला पड़ता था।
-तारा अग्रवाल, बल्केश्वर कॉलोनी
पं. सुभाष चंद्र शास्त्री ने बताया कि हरियाली तीज मुख्य रूप से 11 अगस्त को मनाई जाएगी। हालांकि तीज 10 अगस्त से शाम छह बजकर पांच मिनट पर शुरू हो जाएगी। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। शिवजी प्रसन्न हुए। हरियाली तीज के दिन पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। हरियाली तीज के दिन हरी चूड़ियां, हरे कपड़े, सोलह शृंगार और मेहंदी लगाने का विशेष महत्व है।
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हरियाली तीज का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा हालांकि यह दस अगस्त को शाम 6:05 बजे शुरू हो जाएगी। घरों में त्योहार की तैयारी हो रही हैं। महिलाओं का कहना है अब वह बात नहीं है। पिछले दो दशक में त्योहार का उल्लास और रंग जाता रहा है।
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हरियाली तीज पर गांव में झूले की कतारें दिखती थीं। हर घर के दरवाजे और आंगन में झूला पड़ा होता था। अब कहीं झूले दिखते ही नहीं हैं।
-सुनीत भास्कर, शास्त्रीपुरम
हरियाली तीज पर महिलाएं मायके जाती थीं। क्या रौनक होती। सभी सहेलियां मिलतीं और यादें ताजा करतीं। अब न पहले की तरह मायके से बुलावा आता है न कोई जाता है।
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-रेनू कुमारी, आवास विकास
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मैं अब 68 साल की हो गई हूं। 40 साल पहले तक तीज पर वह रौनक देखी है कि क्या बताऊं। पेड़ की सबसे ऊंची और मजबूत डाल का चयन कर झूला पड़ता था।
-तारा अग्रवाल, बल्केश्वर कॉलोनी
पं. सुभाष चंद्र शास्त्री ने बताया कि हरियाली तीज मुख्य रूप से 11 अगस्त को मनाई जाएगी। हालांकि तीज 10 अगस्त से शाम छह बजकर पांच मिनट पर शुरू हो जाएगी। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। शिवजी प्रसन्न हुए। हरियाली तीज के दिन पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। हरियाली तीज के दिन हरी चूड़ियां, हरे कपड़े, सोलह शृंगार और मेहंदी लगाने का विशेष महत्व है।