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सिस्टम के गड्ढे: पांच साल में निगल गए 8963 जिंदगियां

Sat, 21 Feb 2026 02:58 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:58 AM IST
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The pitfalls of the system: 8,963 lives were swallowed in five years.
आगरा। कालिंदी विहार की 100 फुटा रोड पर हुए सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने अफसरों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। जैन ने कहा कि साल 2018 से 2022 के बीच पांच साल में गड्ढों के कारण 21,279 दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 8963 लोगों की मौत हुई और 18,022 लोग घायल हुए। इसमें गड्ढों से ज्यादा अफसरों की लापरवाही दोषी है।
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उन्होंने कहा कि यह आंकड़े दिखाते हैं कि सड़कें कितनी असुरक्षित हैं। गहरे और लंबे समय से बने गड्ढों के कारण हादसे हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति ने अपनी 3 दिसंबर 2018 की रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की है कि यदि दुर्घटना गड्ढे, खुले मैनहोल या सड़क दोष के कारण होती है तो संबंधित सड़क स्वामी एजेंसी को 5 लाख तक का मुआवजा देना चाहिए।
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उच्च न्यायालयों ने भी यह कहा है कि सुरक्षित और गड्ढामुक्त सड़क नागरिकों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। यदि सड़क की खराब स्थिति के कारण किसी की जान जाती है तो इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम माना जाएगा। उन्होंने बताया कि याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि नगर निगम, राज्य सरकार हो, एनएचएआई या कोई अन्य सरकारी एजेंसी हो, वह भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी-82) के मानकों के अनुसार नियमित निरीक्षण करें।
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साथ ही प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून जांच अनिवार्य करें। साथ ही ऑनलाइन शिकायत और ट्रैकिंग प्रणाली बनाएं। दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करें और गड्ढों से हुई दुर्घटनाओं में मुआवजा दें।


मोटर वाहन अधिनियम में दंड का प्रावधान

सड़क को मानकों के अनुसार न बनाए रखना या उसका रखरखाव न करना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध है। धारा 198ए-मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (संशोधित 2019) को मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत जोड़ा गया जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई प्राधिकरण या व्यक्ति सड़क के डिजाइन, निर्माण या रखरखाव के निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है, तो वह दंड का भागी होगा जिसके अनुसार एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा।
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