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Agra News: बीमारियों से बचाव के लिए पशुओं के टीकाकरण में जुटा विभाग
Mon, 23 Jun 2025 11:57 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 23 Jun 2025 11:57 PM IST
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मैनपुरी। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में पशुओं में गलघोंटू जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है। जिले में पशु पालन विभाग की ओर से वैक्सीनेशन का काम तेजी के साथ जारी है।
पशु चिकित्साधिकारी सोमदत्त सिंह ने बताया कि अभी करीब 165800 पशुओं को गलघोंटू आदि बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जा चुके हैं। जिले में संचालित 51 गोशालाओं में करीब 11800 गोवंश है। इन सभी का टीकाकरण भी चल रहा है। सलाह दी कि मानसून के दौरान पशु को सही मात्रा में आहार दें ताकि पोषक तत्वों की कमी पूरी हो सके। इसके अलावा पशुओं के आस पास साफ सफाई, पशुओं को दूषित आहार पानी न पिलाएं। पशु के शेड में नमी न होने दें और कच्चे फर्श पर न छोड़ें।
मानसून में इन बीमारियों का रहता है खतरा
मानसून में पशु ज्यादा गीला चारा खा लेते हैं तो वह मल त्याग नहीं कर पाते। जिस वजह से खाना पीना बंद कर देते हैं। इसके अलावा थनैला का रोग अक्सर दूध देने वाले पशुओं में होता है। इसमें थनों से दूध की जगह खून और पस आने लगता है। गलघोंटू रोग सबसे खतरनाक है। इसकी वजह से पशुओं की मौत 1 से 2 दिन में हो जाती है। लंगड़ा बुखार ये रोग पशु को गीली मिट्टी में पैदा होने वाले जीव की वजह से या किसी संक्रमित पशु की चपेट में आने से हो जाता है। इन सभी रोगों का टीकाकरण पशुपालकों के लिए जरूरी है।
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पशु चिकित्साधिकारी सोमदत्त सिंह ने बताया कि अभी करीब 165800 पशुओं को गलघोंटू आदि बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जा चुके हैं। जिले में संचालित 51 गोशालाओं में करीब 11800 गोवंश है। इन सभी का टीकाकरण भी चल रहा है। सलाह दी कि मानसून के दौरान पशु को सही मात्रा में आहार दें ताकि पोषक तत्वों की कमी पूरी हो सके। इसके अलावा पशुओं के आस पास साफ सफाई, पशुओं को दूषित आहार पानी न पिलाएं। पशु के शेड में नमी न होने दें और कच्चे फर्श पर न छोड़ें।
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मानसून में इन बीमारियों का रहता है खतरा
मानसून में पशु ज्यादा गीला चारा खा लेते हैं तो वह मल त्याग नहीं कर पाते। जिस वजह से खाना पीना बंद कर देते हैं। इसके अलावा थनैला का रोग अक्सर दूध देने वाले पशुओं में होता है। इसमें थनों से दूध की जगह खून और पस आने लगता है। गलघोंटू रोग सबसे खतरनाक है। इसकी वजह से पशुओं की मौत 1 से 2 दिन में हो जाती है। लंगड़ा बुखार ये रोग पशु को गीली मिट्टी में पैदा होने वाले जीव की वजह से या किसी संक्रमित पशु की चपेट में आने से हो जाता है। इन सभी रोगों का टीकाकरण पशुपालकों के लिए जरूरी है।
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