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Agra News: चांदी के रोज चमक बदलने से सराफा बाजार में हैरानी
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आगरा। सराफा बाजार की रानी यानी चांदी की चमक रोज बदल रही है। भाव पर अस्थिरता का माहौल है। बाजार से लेकर कारखाने तक प्रभावित हैं। पिछले तीन महीने में चांदी के भाव में 50 हजार रुपये प्रति किलो तक तेजी आई है। बृहस्पतिवार को चांदी का भाव 1.84 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।
आगरा चांदी की सबसे बड़ी मंडी है। यह एशिया का प्रमुख बाजार है। यहां चांदी की करीब 2500 फर्म हैं। जबकि कुटीर उद्योग के रूप में पायल बनाने के काम से करीब एक लाख लोग जुड़े हुए हैं। दिवाली के बाद चांदी में रोज तेजी दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार सुबह चांदी वायदा कारोबार में 1.84 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
रात करीब 9 बजे भाव में गिरावट आई। 1.78 लाख के भाव पर बाजार बंद हुआ। इसका सबसे बड़ा असर सहालग में चांदी खरीदने वालों पर पड़ रहा है। भाव बढ़ने से ग्राहक इसे खरीदने से कतरा रहे हैं। जो पायल पहले 2000 से 2500 रुपये में आ रही थी, उतने वजन की पायल अब 5000 से 6000 रुपये तक में पड़ रही है। ऐसे में लोग जरूरत के हिसाब से खरीद रहे हैं।
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मध्यम वर्ग की जेब पर भी चांदी भारी पड़ रही है। दूसरी तरफ चांदी में मिलावट और कम टंच के कारण ग्राहकों का भरोसा भी डगमगाया है। इसलिए चांदी में निवेश करने पर उन्हें उतना रिटर्न भी नहीं मिल पा रहा। उधर, चांदी कारखानों में मजदूरों की छंटनी शुरू हो गई है। मांग के अनुरूप बिक्री नहीं होने के कारण सराफ अपने खर्च घटा रहे हैं।
ऐसे बढ़ा तीन महीने में भाव
- 12 दिसंबर : 1.84 लाख रुपये/किलो
- 12 नवंबर : 1.52 लाख रुपये/किलो
- 12 अक्तूबर : 1.61 लाख रुपये/किलो
- 12 सितंबर : 1.25 लाख रुपये/किलो
व्यापारियों की पीड़ा.... फोटो कोट
नहीं मिल रहे ग्राहक
- सहालग में बाजार खाली पड़ा है। ग्राहक नहीं मिल रहे। भाव अस्थिर है। रोज बदल रहा है। ऐसे में व्यापारी भी घबरा रहे हैं। - तरुन अग्रवाल, ट्रेडर्स कूचा साधु राम
व्यापार हो रहा प्रभावित
- पायलों का बड़े पैमाने पर यहां कारोबार है। रोज की तेजी और मंदी से व्यापार प्रभावित है। - योगेश अग्रवाल, मैन्युफैक्चर्स, चौबेजी का फाटक
कारीगर भी खाली हाथ
- चांदी पायल का काम यहां कुटीर उद्योग की तरह है। एक लाख से अधिक लोग घरों में पायल बनाते हैं। अब कारीगर भी खाली हाथ हैं। - योगेश वर्मा, कारीगर, लोहामंडी
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आगरा चांदी की सबसे बड़ी मंडी है। यह एशिया का प्रमुख बाजार है। यहां चांदी की करीब 2500 फर्म हैं। जबकि कुटीर उद्योग के रूप में पायल बनाने के काम से करीब एक लाख लोग जुड़े हुए हैं। दिवाली के बाद चांदी में रोज तेजी दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार सुबह चांदी वायदा कारोबार में 1.84 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
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रात करीब 9 बजे भाव में गिरावट आई। 1.78 लाख के भाव पर बाजार बंद हुआ। इसका सबसे बड़ा असर सहालग में चांदी खरीदने वालों पर पड़ रहा है। भाव बढ़ने से ग्राहक इसे खरीदने से कतरा रहे हैं। जो पायल पहले 2000 से 2500 रुपये में आ रही थी, उतने वजन की पायल अब 5000 से 6000 रुपये तक में पड़ रही है। ऐसे में लोग जरूरत के हिसाब से खरीद रहे हैं।
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मध्यम वर्ग की जेब पर भी चांदी भारी पड़ रही है। दूसरी तरफ चांदी में मिलावट और कम टंच के कारण ग्राहकों का भरोसा भी डगमगाया है। इसलिए चांदी में निवेश करने पर उन्हें उतना रिटर्न भी नहीं मिल पा रहा। उधर, चांदी कारखानों में मजदूरों की छंटनी शुरू हो गई है। मांग के अनुरूप बिक्री नहीं होने के कारण सराफ अपने खर्च घटा रहे हैं।
ऐसे बढ़ा तीन महीने में भाव
- 12 दिसंबर : 1.84 लाख रुपये/किलो
- 12 नवंबर : 1.52 लाख रुपये/किलो
- 12 अक्तूबर : 1.61 लाख रुपये/किलो
- 12 सितंबर : 1.25 लाख रुपये/किलो
व्यापारियों की पीड़ा.... फोटो कोट
नहीं मिल रहे ग्राहक
- सहालग में बाजार खाली पड़ा है। ग्राहक नहीं मिल रहे। भाव अस्थिर है। रोज बदल रहा है। ऐसे में व्यापारी भी घबरा रहे हैं। - तरुन अग्रवाल, ट्रेडर्स कूचा साधु राम
व्यापार हो रहा प्रभावित
- पायलों का बड़े पैमाने पर यहां कारोबार है। रोज की तेजी और मंदी से व्यापार प्रभावित है। - योगेश अग्रवाल, मैन्युफैक्चर्स, चौबेजी का फाटक
कारीगर भी खाली हाथ
- चांदी पायल का काम यहां कुटीर उद्योग की तरह है। एक लाख से अधिक लोग घरों में पायल बनाते हैं। अब कारीगर भी खाली हाथ हैं। - योगेश वर्मा, कारीगर, लोहामंडी