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चार माह बीता, बच्चों को नहीं मिलीं किताबें
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आगरा। शैक्षणिक सत्र 2021-22 के चार माह बीतने की ओर है, अभी तक परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। जो किताबें जून तक आई, वह भी नहीं बंट पाई हैं। इस बार विद्यार्थियों को पुरानी किताबें भी वितरित नहीं की गई थीं, जिससे वह पढ़ाई कर सकें।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री बृजेश दीक्षित का कहना है कि विद्यालयों तक निशुल्क किताबें पहुंची नहीं है। विद्यालय तक किताबें पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की है। ऑनलाइन पढ़ाई से बहुत कम विद्यार्थी जुड़ पाए हैं। चालू सत्र में विद्यार्थियों की भौतिक रूप से कक्षाएं नहीं लगी, इससे गत सत्र की किताबें जमा कराकर उसे विद्यार्थियों को वितरित नहीं किया जा सका।
यूटा के जिला महामंत्री राजीव वर्मा का कहना है कि एक भी किताब अभी स्कूलों में प्राप्त नहीं हुई है। जिले में करीब 2.48 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में 20 फीसदी से भी कम विद्यार्थी जुड़े रहे हैं, वह भी नियमित रूप से नहीं। किताब ही पढ़ाई का मुख्य साधन है। किताबें पहुंच जाती तो विद्यार्थी कुछ न कुछ पढ़ता रहता। बिना किताब के जो ऑनलाइन जुड़े हैं, वह भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। किताबों को जल्द से जल्द पहुंचाने की जरूरत है।
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बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ शुक्रवार को समीक्षा बैठक की जाएगी। इसमें निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण के साथ अन्य योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। जो प्रकाशक पुस्तकों को भेजने में देरी कर रहे हैं, उनको नोटिस जारी कराया जाएगा। - महेश चंद्र, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री बृजेश दीक्षित का कहना है कि विद्यालयों तक निशुल्क किताबें पहुंची नहीं है। विद्यालय तक किताबें पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की है। ऑनलाइन पढ़ाई से बहुत कम विद्यार्थी जुड़ पाए हैं। चालू सत्र में विद्यार्थियों की भौतिक रूप से कक्षाएं नहीं लगी, इससे गत सत्र की किताबें जमा कराकर उसे विद्यार्थियों को वितरित नहीं किया जा सका।
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यूटा के जिला महामंत्री राजीव वर्मा का कहना है कि एक भी किताब अभी स्कूलों में प्राप्त नहीं हुई है। जिले में करीब 2.48 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में 20 फीसदी से भी कम विद्यार्थी जुड़े रहे हैं, वह भी नियमित रूप से नहीं। किताब ही पढ़ाई का मुख्य साधन है। किताबें पहुंच जाती तो विद्यार्थी कुछ न कुछ पढ़ता रहता। बिना किताब के जो ऑनलाइन जुड़े हैं, वह भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। किताबों को जल्द से जल्द पहुंचाने की जरूरत है।
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बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ शुक्रवार को समीक्षा बैठक की जाएगी। इसमें निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण के साथ अन्य योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। जो प्रकाशक पुस्तकों को भेजने में देरी कर रहे हैं, उनको नोटिस जारी कराया जाएगा। - महेश चंद्र, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक