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उपसभापति पद पर सपा का कब्जा
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 11 Sep 2015 02:00 AM IST
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नगर निगम कार्यकारिणी के उपसभापति के पद पर समाजवादी पार्टी का कब्जा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने बसपा से गठबंधन तोड़कर अप्रत्याशित रूप से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राकेश जैन को समर्थन दे दिया और राकेश जैन बसपा प्रत्याशी रजनी माधव के चार वोटों के मुकाबले आठ वोट से जीत गए।
कार्यकारिणी की बैठक निर्धारित समय 12 बजे से आधा घंटा देरी से शुरू हुई। मेयर इंद्रजीत आर्य के आदेश पर बैठक में सबसे पहले पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई। इसके बाद उपसभापति के चुनाव का प्रस्ताव रखा गया।
समाजवादी पार्टी की सदस्य शालिनी शर्मा ने राकेश जैन के नाम का प्रस्ताव रखा। बीजेपी की ओर से शोभाराम राठौर ने श्रीकृष्ण का नाम आगे बढ़ाया तो बसपा के मनोज सोनी ने रजनी माधव के नाम का प्रस्ताव दिया। भाजपा के प्रत्याशी श्रीकृष्ण ने अपनी तबियत खराब होने का हवाला देकर नाम वापस ले लिया। इस तरह मैदान में बसपा से रजनी माधव और सपा के राकेश जैन रह गए। मतदान में राकेश जैन के समर्थन में भाजपा के चारों कार्यकारिणी सदस्यों ने वोट दे दिया। इस तरह रजनी माधव को चार वोट और राकेश जैन को आठ मिले।
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इनबाक्स...
नहीं बैठ पाई भाजपा और बसपा की गोट
चुनाव से पहले लग रहा था कि भाजपा और बसपा के पार्षद सपा के पार्षदों को उपसभापति का पद नहीं लेने देंगे। पहले कोशिश हो रही थी कि भाजपा और बसपा संयुक्त प्रत्याशी उतारेंगे, लेकिन ऐन मौके पर बसपा ने भी अपना प्रत्याशी उतारने का निर्णय ले लिया। इस तरह से कार्यकारिणी में तीनों दलों के चार-चार वोट बंट गए। अंतिम वोट मेयर का होना था। मेयर पर दबाव यह था कि यदि वे सपा को वोट देते हैं तो उन पर दलगत राजनीति का आरोप लगता, लेकिन बसपा के तेवर ने खेल बिगाड़ दिया। भाजपा की ओर वरिष्ठ पार्षद कुंदनिका शर्मा ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। उधर, सपा पार्षद दल नेता मुकेश यादव की कूटनीति काम कर गई। हवा का रुख सपा की ओर मोड़ दिया। एक बार तो ऐसा लग रहा था कि सपा पार्षदों की आपसी फूट ही उनका काम बिगाड़ देगी।
इनबाक्स..
सिंधी मार्केट पर ली जाएगी विधिक राय
चुनाव के बाद कार्यकारिणी में अन्य प्रस्ताव भी लाए गए। मुकुट शोभायात्रा के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद को 50 हजार से बढ़ाकर 60 हजार कर दिया गया। बसई में लगने वाले शहीद मेले के लिए सहायता राशि 21 हजार से बढ़ाकर 31 हजार कर दी गई है। वृद्धाश्रम के प्रस्ताव पर बैठक में चर्चा नहीं हो सकी। सिंधी मार्केट में एसएन मेडिकल कालेज की दीवार से सटी दुकानों को हटाने के प्रस्ताव पर मेयर ने विधिक राय लेने के बाद कार्यकारिणी के समक्ष लाने का निर्देश दिया है। शहर में चल रहे अतिक्रमण अभियान के दौरान ऐसे भवनों के चबूतरे जो एतिहासिक हैं और नाली के पीछे बने हैं। तो उन्हें न तोड़ने का भी प्रस्ताव पारित किया गया है।
मैंने बसपा पार्षदों को समझाने का प्रयास किया था। उन्हें बताया था कि पहले आपसी सहमति से बसपा का उपसभापति बनाया गया, लिहाजा इस बार भाजपा को मौका दिया जाए, लेकिन बसपा के पार्षद नहीं माने। उन्होंने धोखा दिया तो मैं वहां से चली आई थी।
- कुंदनिका शर्मा, पार्षद भाजपा
भाजपाई गलत कह रहे हैं। सबसे पहले हमने ही उनका उपसभापति बनवाया था। उनका सपा से अंदरखाने समझौता हुआ है और अब ठीकरा बसपा के सिर फोड़ रहे हैं। यदि ऐसा था तो उन्होंने सपा की मदद से भाजपा के पार्षद को उपसभापति क्यों नहीं बनवाया।
- कर्मवीर सिंह, पार्षद भाजपा
भाजपा ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शहर हित में फैसला लिया है। इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं हुई है और ना ही कोई समझौता हुआ है।
- मुकेश यादव, पार्षद सपा
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कार्यकारिणी की बैठक निर्धारित समय 12 बजे से आधा घंटा देरी से शुरू हुई। मेयर इंद्रजीत आर्य के आदेश पर बैठक में सबसे पहले पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई। इसके बाद उपसभापति के चुनाव का प्रस्ताव रखा गया।
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समाजवादी पार्टी की सदस्य शालिनी शर्मा ने राकेश जैन के नाम का प्रस्ताव रखा। बीजेपी की ओर से शोभाराम राठौर ने श्रीकृष्ण का नाम आगे बढ़ाया तो बसपा के मनोज सोनी ने रजनी माधव के नाम का प्रस्ताव दिया। भाजपा के प्रत्याशी श्रीकृष्ण ने अपनी तबियत खराब होने का हवाला देकर नाम वापस ले लिया। इस तरह मैदान में बसपा से रजनी माधव और सपा के राकेश जैन रह गए। मतदान में राकेश जैन के समर्थन में भाजपा के चारों कार्यकारिणी सदस्यों ने वोट दे दिया। इस तरह रजनी माधव को चार वोट और राकेश जैन को आठ मिले।
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नहीं बैठ पाई भाजपा और बसपा की गोट
चुनाव से पहले लग रहा था कि भाजपा और बसपा के पार्षद सपा के पार्षदों को उपसभापति का पद नहीं लेने देंगे। पहले कोशिश हो रही थी कि भाजपा और बसपा संयुक्त प्रत्याशी उतारेंगे, लेकिन ऐन मौके पर बसपा ने भी अपना प्रत्याशी उतारने का निर्णय ले लिया। इस तरह से कार्यकारिणी में तीनों दलों के चार-चार वोट बंट गए। अंतिम वोट मेयर का होना था। मेयर पर दबाव यह था कि यदि वे सपा को वोट देते हैं तो उन पर दलगत राजनीति का आरोप लगता, लेकिन बसपा के तेवर ने खेल बिगाड़ दिया। भाजपा की ओर वरिष्ठ पार्षद कुंदनिका शर्मा ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। उधर, सपा पार्षद दल नेता मुकेश यादव की कूटनीति काम कर गई। हवा का रुख सपा की ओर मोड़ दिया। एक बार तो ऐसा लग रहा था कि सपा पार्षदों की आपसी फूट ही उनका काम बिगाड़ देगी।
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सिंधी मार्केट पर ली जाएगी विधिक राय
चुनाव के बाद कार्यकारिणी में अन्य प्रस्ताव भी लाए गए। मुकुट शोभायात्रा के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद को 50 हजार से बढ़ाकर 60 हजार कर दिया गया। बसई में लगने वाले शहीद मेले के लिए सहायता राशि 21 हजार से बढ़ाकर 31 हजार कर दी गई है। वृद्धाश्रम के प्रस्ताव पर बैठक में चर्चा नहीं हो सकी। सिंधी मार्केट में एसएन मेडिकल कालेज की दीवार से सटी दुकानों को हटाने के प्रस्ताव पर मेयर ने विधिक राय लेने के बाद कार्यकारिणी के समक्ष लाने का निर्देश दिया है। शहर में चल रहे अतिक्रमण अभियान के दौरान ऐसे भवनों के चबूतरे जो एतिहासिक हैं और नाली के पीछे बने हैं। तो उन्हें न तोड़ने का भी प्रस्ताव पारित किया गया है।
मैंने बसपा पार्षदों को समझाने का प्रयास किया था। उन्हें बताया था कि पहले आपसी सहमति से बसपा का उपसभापति बनाया गया, लिहाजा इस बार भाजपा को मौका दिया जाए, लेकिन बसपा के पार्षद नहीं माने। उन्होंने धोखा दिया तो मैं वहां से चली आई थी।
- कुंदनिका शर्मा, पार्षद भाजपा
भाजपाई गलत कह रहे हैं। सबसे पहले हमने ही उनका उपसभापति बनवाया था। उनका सपा से अंदरखाने समझौता हुआ है और अब ठीकरा बसपा के सिर फोड़ रहे हैं। यदि ऐसा था तो उन्होंने सपा की मदद से भाजपा के पार्षद को उपसभापति क्यों नहीं बनवाया।
- कर्मवीर सिंह, पार्षद भाजपा
भाजपा ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शहर हित में फैसला लिया है। इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं हुई है और ना ही कोई समझौता हुआ है।
- मुकेश यादव, पार्षद सपा