Mathura: फूलबंगला में विराज ठाकुरजी ने किया नौका विहार, मनोहर दृश्य देख झूम उठे भक्त
सोमवती अमावस्या पर कृष्ण नगरी मथुरा के मंदिरों में दिनभर श्रृद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिरों पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्राचीन केशवदेव और दीर्घविष्णु मंदिर में हुए कार्यक्रम के दौरान ठाकुरजी ने नौका विहार किया।
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मथुरा में सोमवती अमावस्या पर मंदिर श्रीद्वारिकाधीश, प्राचीन केशवदेव और दीर्घविष्णु मंदिर में भव्य धार्मिक आयोजन किए गए। फूलबंगला सजाया गया। ठाकुरजी ने नौका विहार किया। विभिन्न मनोरथ के दर्शन कर भक्त आनंदित हो गए। इस दौरान बड़ पूजन भी किया गया।
सोमवार को सोमवती अमावस्या पर ठाकुर द्वारिकाधीश ने नाव में विराजमान होकर दर्शन दिए। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि जेष्ठ मास में ठाकुर द्वारिकाधीश जी महाराज के लिए भव्य फूलबंगला सजाया गया। राजाधिराज जी को शीतलता प्रदान करने वाले विभिन्न कार्यक्रम किए। इसी प्रकार प्राचीन मंदिर श्रीकेशवदेव में फूलबंगला और नौका विहार का आयोजन हुआ।
गुलाब जल से कराया अभिषेक
भगवान श्रीकेशवदेव का सेवायत जगदीश गोस्वामी, श्यामाचरण गोस्वामी, गौरव गोस्वामी का केवड़ा गुलाब जल से अभिषेक कराया। ठाकुरजी को नवीन वस्त्र धारण कराए गए। भव्य फूलबंगला सजाया गया। भगवान को नौका विहार कराया गया। श्रीकृष्ण सामूहिक संकीर्तन मंडल के भक्तों ने भगवान को भजन सुनाकर रिझाया। भजन संध्या व्यवस्था में संस्थान अध्यक्ष पंडित सोहनलाल शर्मा, मीडिया प्रभारी नारायण प्रसाद शर्मा, सुरेश अग्रवाल, मुन्नी लाल गोस्वामी, बिहारी लाल गोस्वामी, रमन लाल गुप्ता, दिनेश लोहिया, राकेश शर्मा, दीपक शर्मा, दिलीप पांडे, पीपी शर्मा मंगला शामिल रहे।
ठाकुरजी का किया गया शृंगार
प्राचीन श्रीदीर्घ विष्णु मंदिर में वैदिक अनुष्ठानों के साथ ठाकुरजी का पूजन अर्चन किया गया। ऋतु अनुकूल शीत वस्त्र धारण कर, सुगंधित पुष्पों से ठाकुरजी का शृंगार किया। विश्व मंगल की कामना के लिए मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक अनुष्ठान किया गया। मंदिर के सेवायत महंत कांतानाथ चतुर्वेदी सहित श्री दीर्घ विष्णु मंदिर सेवा संस्थान के संयोजक आचार्य बृजेंद्र नागर, प्रवक्ता रामदास चतुर्वेदी पार्षद, सेवायत सचिव बालकृष्ण चतुर्वेदी, सेवायत महाप्रबंधक लालकृष्ण चतुर्वेदी, आचार्य मुरलीधर शास्त्री, कदम चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे। इस दिन को बड़ अमावस्या के रूप में भी मनाया गया। महिलाओं ने बड़ की पूजा की।