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जिंदा जलीं छह माह की जुड़वां बहनें: जरा सी नासमझी में चली गई मासूमों की जान, मां हुई बदहवास
Tue, 09 Jan 2024 12:03 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 09 Jan 2024 12:03 AM IST
सार
मैनपुरी के कस्बा औंछा में सोमवार की दोपहर अलाव की चिंगारी से चारपाई में आग लग गई। आग में चारपाई पर सो रही दो मासूम जुड़वां बहनों की जलने से दर्दनाक मौत हो गई। थाना पुलिस मौके पर पहुंची। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मृतका रिद्धि और सिद्धि
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मैनपुरी के कस्बा औंछा में सोमवार को जरा सी नासमझी ने दो मासूमों की जान ले ली। चारपाई के नीचे अलाव रखते समय मां को भी इसका अहसास नहीं था कि बेटियां मौत के आगोश में समा जाएंगी। घटना के बाद बदहवास रजनी रोए जा रही है।
कस्बा औंछा में सोमवार को दर्दनाक हादसे में दो मासूमों की मौत के बाद परिजन के अलावा ग्रामीण भी गमगीन हैं। हादसा इतना भयावह था कि उसकी कल्पना से भी माता-पिता सिहर उठते हैं। रजनी ने तो सर्दी में अपनी बच्चियों को राहत देने के लिए अलाव का तसला चारपाई के नीचे गर्माहट के लिए रखा था। उसे क्या पता था कि उसकी जरा सी नासमझी, उसे चहेती बेटियों से हमेशा के लिए दूर कर देगी। पहली गलती चारपाई के नीचे अलाव रख कर और दूसरी गलती बच्चियों को अकेला छोड़ कर नीचे जाने की कर दी। बस जरा सी नासमझी का नतीजा ही कहा जा सकता है कि दो मासूम बहनों ने आग में जलते हुए तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। बेटियों के गम में रजनी तो मानो बदहवास हो चुकी है। महिलाएं उसे जितना शांत करने का प्रयास कर रही हैं, वह उतना ही रोए जा रही है। बच्चियों की याद में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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कस्बा औंछा में सोमवार को दर्दनाक हादसे में दो मासूमों की मौत के बाद परिजन के अलावा ग्रामीण भी गमगीन हैं। हादसा इतना भयावह था कि उसकी कल्पना से भी माता-पिता सिहर उठते हैं। रजनी ने तो सर्दी में अपनी बच्चियों को राहत देने के लिए अलाव का तसला चारपाई के नीचे गर्माहट के लिए रखा था। उसे क्या पता था कि उसकी जरा सी नासमझी, उसे चहेती बेटियों से हमेशा के लिए दूर कर देगी। पहली गलती चारपाई के नीचे अलाव रख कर और दूसरी गलती बच्चियों को अकेला छोड़ कर नीचे जाने की कर दी। बस जरा सी नासमझी का नतीजा ही कहा जा सकता है कि दो मासूम बहनों ने आग में जलते हुए तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। बेटियों के गम में रजनी तो मानो बदहवास हो चुकी है। महिलाएं उसे जितना शांत करने का प्रयास कर रही हैं, वह उतना ही रोए जा रही है। बच्चियों की याद में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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आग बुझाते हुए जल गए रजनी के हाथ
बच्चियां आग में झुलस कर तड़प रहीं थीं। ऐसे में भला कौन सी मां होगी जो ये सब देखती रहेगी। रजनी के सामने बच्चियां चीख रहीं थी, रजनी ने कुछ नहीं देखा और रजाई, कंबल आदि हटा कर बच्चियों को आग से निकाला। इस दौरान रजनी के हाथ भी जल गए। लेकिन बच्चियों के असहनीय दर्द के आगे मां का ये दर्द तो कुछ भी नहीं था। मां को अफसोस है कि वो बेटियों को बचा नहीं सकी।
दूसरी संतान थीं रिद्धि और सिद्धि
कस्बा औंछा निवासी गौरव और रजनी के एक बेटी थी। छह माह पहले रजनी ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया था। परिजन का कहना है कि जुड़वा बेटियों के जन्म से माता-पिता बेहद खुश थे। बच्चियों का नाम रिद्धि और सिद्धि रखा था।
बच्चियां आग में झुलस कर तड़प रहीं थीं। ऐसे में भला कौन सी मां होगी जो ये सब देखती रहेगी। रजनी के सामने बच्चियां चीख रहीं थी, रजनी ने कुछ नहीं देखा और रजाई, कंबल आदि हटा कर बच्चियों को आग से निकाला। इस दौरान रजनी के हाथ भी जल गए। लेकिन बच्चियों के असहनीय दर्द के आगे मां का ये दर्द तो कुछ भी नहीं था। मां को अफसोस है कि वो बेटियों को बचा नहीं सकी।
दूसरी संतान थीं रिद्धि और सिद्धि
कस्बा औंछा निवासी गौरव और रजनी के एक बेटी थी। छह माह पहले रजनी ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया था। परिजन का कहना है कि जुड़वा बेटियों के जन्म से माता-पिता बेहद खुश थे। बच्चियों का नाम रिद्धि और सिद्धि रखा था।