{"_id":"624ef630f502db17c348b2cf","slug":"six-elderly-people-took-shelter-in-ramlal-old-age-home-in-agra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आगरा: बहू करवाती थी घर का सारा काम, बेटा करता था पिटाई, वृद्धाश्रम में आए बुजुर्गों का छलका दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा: बहू करवाती थी घर का सारा काम, बेटा करता था पिटाई, वृद्धाश्रम में आए बुजुर्गों का छलका दर्द
Thu, 07 Apr 2022 08:16 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 07 Apr 2022 08:16 PM IST
सार
जिनके लिए पाई-पाई जोड़कर घर बनाया, उन्हीं संतानों ने मां-बाप को बेघर कर दिया। आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम में बीते तीन दिनों में छह बुजुर्गों ने आश्रम लिया है।
विज्ञापन
रामलाल वृद्धाश्रम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पिछले तीन दिनों में आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम में छह बुजुर्गों ने आश्रय लिया है। इनमें से किसी के बेटे ने घर से बाहर निकाल दिया तो किसी की बहू अपने साथ रखना नहीं चाहती है। डाबर गांव की रहने वाली 73 वर्षीय अंगूरी देवी ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव पर उन्होंने घर से बारह निकाल दिया। बहू घर का सारा काम करवाती थी। मना करने पर बेटा पिटाई करता था। अब घर लौटकर नहीं जाऊंगी, यह कहकर उनके आंखें भर आईं।
आगरा कचहरी घाट निवासी 72 वर्षीय त्रिलोकीनाथ ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। जिस घर को मेहनत कर बनाया उसी घर से उन्हें निकाल दिया। पत्नी के नाम घर होने के कारण बेटे मां को रखते हैं। एटा निवासी 77 वर्षीय सत्यप्रकाश कहते हैं कि अपनों द्वारा दिया गया दर्द इतना ज्यादा है कि अब जीने का मन नहीं करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आगरा कचहरी घाट निवासी 72 वर्षीय त्रिलोकीनाथ ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। जिस घर को मेहनत कर बनाया उसी घर से उन्हें निकाल दिया। पत्नी के नाम घर होने के कारण बेटे मां को रखते हैं। एटा निवासी 77 वर्षीय सत्यप्रकाश कहते हैं कि अपनों द्वारा दिया गया दर्द इतना ज्यादा है कि अब जीने का मन नहीं करता है।
विज्ञापन
बेटों ने घर से निकाला
शिकोहाबाद के 66 वर्षीय विशंभर नाथ के दो बेटे हैं और पत्नी का देहांत हो चुका है। उन्होंने बताया कि दोनों बेटों में से कोई भी अपने साथ रखने को तैयार नहीं हैं। फिरोजाबाद के रहने वाले 70 वर्षीय उमेश जिंदल ने बताया कि उनके दोनों बेटों ने यह कहकर घर से निकाल दिया कि अब वह किसी काम के नहीं है।
विज्ञापन
रामनगर निवासी 75 वर्षीय राधेश्याम का कहना है कि बच्चों ने बुढ़ापे में मुंह फेर लिया। आश्रम के मुख्य संरक्षक राजकुमार जैन, सुनील जैन, संदेश जैन, डॉ मदनमोहन शर्मा, विनय शर्मा आदि ने सभी बुजुर्गों का सम्मान सहित स्वागत किया और बेहतर सेवा देने का भरोसा दिलाया।
ऐसी सोच सुनकर कष्ट होता है
रामलाल वृद्धाश्रम के अध्यक्ष शिवप्रसाद शर्मा ने बताया कि युवाओं की ऐसी सोच सुनकर मन को कष्ट होता है। आश्रम में बुजुर्गों के बच्चों को बुलाकर समझाया जाता है। ताकि बुजुर्ग अपनों की बीच जा सकें।