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हाथरस हादसा: गांव में फैला सन्नाटा, बच्चे अब भी डरे-सहमे...अपनों को तलाशती रहीं आंखें; ढांढस बंधाने पहुंचे लोग

Mon, 09 Sep 2024 07:11 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 09 Sep 2024 07:11 AM IST
सार

हाथरस हादसे के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। बच्चे अब भी डरे-सहमे हैं। आंखें अपनों को तलाशती रहीं। ढांढस बंधाने लोग पहुंचते रहे। 

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silence in village After Hathras incident children are still scared people keep coming to console family
हाथरस हादसा: गांव में फैला सन्नाटा, बच्चे अब भी डरे-सहमे...अपनों को तलाशती रहीं आंखें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी 17 लोगों की मौत हाथरस में सड़क हादसे में हो गई। जबकि 18 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से तीन बच्चे और दो पुरुष रविवार को घर पहुंचे। घर खाली देख बिलख पड़े। उनकी आंखें अपनों को तलाश रही थीं। जैसे ही पता चला कि जिन्हें वो तलाश रहे, अब वो दुनिया में नहीं हैं तो बदहवास होकर रोने लगे। मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें शांत किया।

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हादसे में घायल लतीफ खान अपनी नातिन आफरीन, नाती अलीराज, शहरुन और फरियाद एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए थे। इलाज के बाद परिजन उन्हें रविवार को घर ले आए। लतीफ के कंधे में फ्रैक्चर हुआ है। नाती और नातिन के पैरों में चोट है।

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लतीफ को जब अपने भाई मुन्ना और भतीजों की मौत की खबर मिली तो उनके आंसू देर तक नहीं थमे। आफरीन और अलीराज सहमे हुए अपनी मां की गोद से नहीं हट रहे हैं। वह सूफियान और शोएब को याद करते रहे मगर उन्हें नहीं पता कि दोनों भाई नहीं रहे। मां उन्हें इसी डर से घर से नहीं निकलने दे रही है।

वहीं शहरून के चेहरे पर चोट थी। भाई और भाभी को खोने वाली नूर मोहम्मद की बेटी शहरून खामोश है। अल्लाह का शुक्र मना रही है कि छोटा भाई रिहान बच गया। उसने बताया कि हादसे के बाद उसकी भाभी की गोद में बैठा अयान झाड़ियों में गिर जाने से बच गया। रिहान को खेती में हाथ बंटाने के लिए घर पर रोक लिया गया था। वह हादसे के बाद से गुमसुम है।
 
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फरियाद के शरीर में अंदरूनी चोटें हैं। उन्होंने बताया कि वह आगे बैठे थे। हादसे के बाद बेहोश हो गए। अस्पताल में पता चला कि उनके साथ गए 17 लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी बेटी मल्ला भी घायल है। उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिल सका है।

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