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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: ये कैसी जांच...पुलिस ने अब तक कब्जे में नहीं ली डीवीआर

Fri, 25 Jun 2021 08:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 25 Jun 2021 08:06 AM IST
सार

पुलिस की जांच पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। वीडियो किसने बनाया, अस्पताल में कितने लोगों की मौत हुई, यह अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज से भी सामने आ सकता था। मगर, पुलिस ने 16 दिन बाद भी सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को कब्जे में नहीं लिया है।

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Shri Paras Hospital Case: Agra Police Not Take Cctv Dvr
श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल के वायरल वीडियो के मामले में जांच के बाद प्रशासन ने संचालक को क्लीन चिट दे दी, जबकि संचालक के खिलाफ थाना न्यू आगरा में दर्ज मुकदमे में पुलिस की विवेचना अभी चल रही है। वायरल हुए चार वीडियो की सीडी फोरेंसिक लैब भेजी गई है। मगर, अहम तथ्य को नजर अंदाज किया जा रहा है, उससे पुलिस की जांच पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। वीडियो किसने बनाया, अस्पताल में कितने लोगों की मौत हुई, यह अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज से भी सामने आ सकता था। मगर, पुलिस ने 16 दिन बाद भी सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को कब्जे में नहीं लिया है। अगर, डीवीआर की फोरेंसिक जांच हो जाए तो कई सवालों से भी पर्दा उठ सकता है।  

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बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के सात जून को 28 अप्रैल को बनाए 26 अप्रैल की कहानी कहते चार वीडियो वायरल हुए थे। ये वीडियो संचालक के कक्ष में बनाए गए थे। एक कुर्सी पर बैठकर डॉ. अरिन्जय जैन वाकया बता रहे हैं।
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उनके सामने एक व्यक्ति स्टूल पर बैठा हुआ है। एक तरफ से यह वीडियो बनाया गया। डॉक्टर जिस तरह से पूरा वाकया बता रहे हैं, उससे सभी के परिचित होना ही लग रहा है। वीडियो के मुताबिक, संचालक ऑक्सीजन की कमी की बात कर रहे हैं। दर्ज मुकदमे के मुताबिक, इस तरह के कथन से भ्रम की स्थिति पैदा हुई, जबकि ऑक्सीजन की कमी नहीं थी।

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Shri Paras Hospital Case: Agra Police Not Take Cctv Dvr
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
इस मामले में आठ जून को मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने अस्पताल जाकर जांच की। 18 लोगों के बयान तक दर्ज किए। इसमें खुद संचालक भी शामिल थे। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों के मुताबिक, अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए थे। रिसेप्शन, वार्ड और आईसीयू तक को कवर किया है। पुलिस ने विवेचना शुरू करने के बाद डॉ. अरिन्जय जैन के बयान दर्ज किए। इसमें सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के बारे में भी पूछा। मगर, डॉ. अरिन्जय जैन ने फुटेज का सात दिन का बैकअप होने की बात कही। इस कारण पुलिस ने डीवीआर को भी कब्जे में नहीं लिया, जबकि यह सबसे अहम साक्ष्य साबित हो सकता है। डीवीआर को कब्जे में लेकर पुलिस फोरेंसिक लैब भेजती तो नए तथ्य सामने आ सकते थे, जिनको अब तक नजरअंदाज किया गया है।

मैंने कहा था, सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं : अशोक चावला
कृष्णा कॉलोनी, छत्ता निवासी अशोक चावला ने बताया कि उन्होंने श्री पारस अस्पताल में अपने पिता वासदेव चावला को भर्ती कराया था। उनमें आठ अप्रैल को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। 12 अप्रैल को हालत बिगड़ने पर पिता को भर्ती करा दिया। आरोप है कि 26 अप्रैल को डॉक्टर ने ऑक्सीजन की कमी बताई। ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतजाम करने के लिए कहा। इसके बाद अस्पताल को ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध करा दिया। 20 मिनट बाद ही उनके पिता की मौत की जानकारी मिली। 27 अप्रैल को छोटे भाई की पत्नी मनीषा की मृत्यु हो गई। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक नहीं देखे हैं।

डीवीआर को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए। इससे यह पता चल जाएगा कि अस्पताल में कितने मरीज भर्ती थे, कितने मरीजों की मृत्यु हो गई, वह बाहर निकाले गए होंगे तो सीसीटीवी फुटेज में जरूर आए होंगे। सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यह अहम साक्ष्य बन सकते हैं, जिस तरफ अब तक ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अशोक चावला ने सोशल मीडिया पर भी इस बारे में सवाल उठाते हुए मुहिम छेड़ रखी है।

Shri Paras Hospital Case: Agra Police Not Take Cctv Dvr
पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
फोरेंसिक टूल से रिकवर हो सकता है डिलीट डाटा : साइबर एक्सपर्ट
साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन बताते हैं कि सीसीटीवी फुटेज की डीवीआर बाजार में अलग-अलग कैटेगरी की उपलब्ध हैं। अमूमन लोग सात दिन से लेकर एक साल तक का बैकअप वाली डीवीआर रखते हैं। बैंक, अस्पताल, मॉल आदि बड़े संस्थान में छह महीने से लेकर एक साल का बैकअप रखा जाता हैं।

जब निर्धारित अवधि पूरी हो जाती है तो पुराने फुटेज स्वत: ही डिलीट हो जाते हैं। अगर, डिलीट हुए वीडियो को रिकवर करना है तो फोरेंसिक टूल की मदद ली जा सकती है। इन दिनों ऑनलाइन भी डाटा सेव किया जाता है, जिससे डीवीआर को क्षति पहुंचाने पर भी डाटा रिकवर किया जा सके। डिलीट डाटा रिकवर करना कई बार आसान नहीं होता है।

नए आईटी कानून बनेंगे मददगार
साइबर एक्सपर्ट दानिश शर्मा ने बताया कि नए आईटी कानून में बदलाव किए गए हैं। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल होने वाले वीडियो और अन्य कंटेट की उत्पत्ति के बारे में बताना अनिवार्य होगा। इसमें भी कुछ श्रेणी निर्धारित की गई हैं। जो कंटेंट देश के खिलाफ, महिला अपराध से संबंधित आदि को इसकी श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद पहली बार कंटेंट सोशल मीडिया पर डालने वाले की जानकारी मिल जाएगी।
 

Shri Paras Hospital Case: Agra Police Not Take Cctv Dvr
श्री पारस अस्पताल से बाहर निकलते मरीज (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
वीडियो बनाने वाले की पहचान तक नहीं
श्री पारस अस्पताल के संचालक का वीडियो किसने बनाया और किसने वायरल किया, यह आज तक पता नहीं चल सका है। पुलिस 18 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। इनमें डॉक्टर से लेकर कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं।

एफएसएल की रिपोर्ट के भरोसे पुलिस
पुलिस ने वायरल हुए चार वीडियो की सीडी बनाकर फोरेंसिक लैब में भेजे हैं। आरोपी डॉक्टर ने वीडियो में छेड़छाड़ की आशंका जाहिर की है। इस पर जांच की जाएगी कि वीडियो में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई। इसमें समय लग सकता है। पुलिस एफएसएल की रिपोर्ट के भरोसे है।

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