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एक रुपये का पर्चा, डेढ़ लाख की सर्जरी: एसएन में पहली बार हुई शोल्डर आर्थोस्कोपी, कंधे के मर्ज से मिलेगी मुक्ति
Mon, 14 Jul 2025 09:21 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 14 Jul 2025 09:21 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज में अब कंधा उतरने, झिल्ली फटने समेत अन्य परेशानी की दूरबीन विधि से ऑपरेशन हो सकेंगे।
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एसएन में पहली बार हुई शोल्डर आर्थोस्कोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
एसएन मेडिकल कॉलेज में कंधे में सूजन, झिल्ली फटने समेत अन्य कैसी भी परेशानी की दूरबीन विधि से निशुल्क सर्जरी होगी। हड्डी रोग विभाग में शोल्डर आर्थोस्कोपी शुरू हो गई है। पहले मरीज की सर्जरी भी की गई। इससे आगरा समेत आसपास के जिलों के मरीजों को काफी लाभ होगा।
खेलकूद, चोट लगने या फिर अन्य वजह से कंधों की मांसपेशियां फट जाना, कंधा उतर जाना, फ्रोजन शोल्डर (कंधा जाम होना) समेत अन्य दिक्कतें होती हैं। लापरवाही बरतने से मरीज को दर्द होता है, वजन उठाने की क्षमता कम होने लगती है। कामकाज में भी दिक्कत होती है।
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खेलकूद, चोट लगने या फिर अन्य वजह से कंधों की मांसपेशियां फट जाना, कंधा उतर जाना, फ्रोजन शोल्डर (कंधा जाम होना) समेत अन्य दिक्कतें होती हैं। लापरवाही बरतने से मरीज को दर्द होता है, वजन उठाने की क्षमता कम होने लगती है। कामकाज में भी दिक्कत होती है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में अब तक कंधों के फ्रैैक्चर की ही सर्जरी हो रही थी। अब शोल्डर आर्थोस्कॉपी की सुविधा भी शुरू हो गई है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि हड्डी रोग विभाग में शोल्डर आर्थोस्कॉपी की सुविधा होने से निजी अस्पताल के मुकाबले मरीजों का खर्चा बचेगा।
निजी अस्पतालों में डेढ़ लाख तक का खर्च
शोल्डर आर्थोस्कॉपी के विशेषज्ञ डॉ. रजत कपूर ने बताया कि ओपीडी में कंधे की ऐसी परेशानी के 500 से अधिक मरीज महीनेभर में आते हैं। इनमें खिलाड़ी, युवा, बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। इसमें मामूली छिद्र कर दूरबीन से सर्जरी करते हैं। इसमें रक्तस्राव बेहद कम होता है। सर्जरी के दो सप्ताह बाद फिजियोथेरेपी के 6 सप्ताह के बाद मरीज का कंधा सामान्य रूप से कार्य करने लगता है। निजी अस्पतालों में इसका खर्च एक से डेढ़ लाख रुपये आता है। एसएन में ऑपरेशन निशुल्क है। जरूरी सामान की कीमत सरकारी दर पर है।
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शोल्डर आर्थोस्कॉपी के विशेषज्ञ डॉ. रजत कपूर ने बताया कि ओपीडी में कंधे की ऐसी परेशानी के 500 से अधिक मरीज महीनेभर में आते हैं। इनमें खिलाड़ी, युवा, बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। इसमें मामूली छिद्र कर दूरबीन से सर्जरी करते हैं। इसमें रक्तस्राव बेहद कम होता है। सर्जरी के दो सप्ताह बाद फिजियोथेरेपी के 6 सप्ताह के बाद मरीज का कंधा सामान्य रूप से कार्य करने लगता है। निजी अस्पतालों में इसका खर्च एक से डेढ़ लाख रुपये आता है। एसएन में ऑपरेशन निशुल्क है। जरूरी सामान की कीमत सरकारी दर पर है।
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एक रुपये का पर्चा, हर बृहस्पतिवार को ओपीडी
कंधों में ऐसी परेशानी पर मरीज हड्डी रोग विभाग में दिखा सकते हैं। इसके लिए काउंटर से एक रुपये का पर्चा बनवाना पड़ेगा। बृहस्पतिवार को ओपीडी परिसर के कमरा नंबर 7 में विशेष ओपीडी लगेगी। इसमें सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलेगी।
कंधों में ऐसी परेशानी पर मरीज हड्डी रोग विभाग में दिखा सकते हैं। इसके लिए काउंटर से एक रुपये का पर्चा बनवाना पड़ेगा। बृहस्पतिवार को ओपीडी परिसर के कमरा नंबर 7 में विशेष ओपीडी लगेगी। इसमें सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलेगी।