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आगरा: एसएन के बाल रोग विभाग में वेंटीलेटर की कमी, निमोनिया के मामले बढ़ने से जरूरत बढ़ी

Mon, 25 Jan 2021 01:43 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 25 Jan 2021 01:43 PM IST
सार

  • आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में 16 बेड के लिए केवल चार वेंटिलेटर
  • जरूरत पर नवजात बच्चों को घंटों तक नहीं मिलते, प्री मैच्योर डिलीवरी के मामलों में पड़ती है अधिक जरूरत

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shortage of ventilators in the pediatric department of SN Medical College Agra
एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर की कमी है। यहां नवजात सघन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में 16 बेड के लिए चार ही वेंटिलेटर लगे हुए हैं, जबकि सभी बेड पर वेंटिलेटर जरूरी हैं। प्री मैच्योर डिलीवरी के मामलों के अलावा निमोनिया से पीड़ित बच्चों के इलाज के दौरान इनकी अधिक जरूरत होती है। 
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एनआईसीयू में 12 वेंटिलेटर की कमी होने के कारण गंभीर हाल के नवजात के इलाज में परेशानी हो रही है। तापमान कम होने पर निमोनिया से पीड़ित नवजातों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ गई है। रोजाना दो से तीन नवजात को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। वेंटिलेटर खाली होने तक इनको ऑक्सीजन पर रखा जाता है। कई तीमारदार नवजात को निजी अस्पताल में भर्ती कराने ले जाते हैं।
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केस: 1
आवास विकास कॉलोनी राधिका शर्मा की प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद नवजात को वेंटिलेटर की जरूरत थी। वेंटिलेटर खाली नहीं था। तीन घंटे के बाद नवजात को वेंटिलेटर मिल सका।
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केस: 2
फिरोजाबाद के असलम अली के नवजात को बाल रोग विभाग में रेफर किया। यहां वेंटिलेटर खाली नहीं थे। करीब पांच घंटे बाद उसे वेंटिलेटर मिल सका।

स्टाफ की भी है कमी
बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर संचालित करने के लिए स्टाफ की भी कमी है। यहां मानक के अनुसार 1 टेक्नीशियन, 22 स्टाफ नर्स, 20 वार्ड ब्वॉय होने चाहिए। जबकि 12 स्टाफ नर्स और आठ वार्ड ब्वाय ही हैं। टेक्नीशियन नहीं है, जरूरत पर दूसरे विभागों से बुलाया जाता है।

फरवरी में मिल जाएंगे वेंटिलेटर
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बाल रोग विभाग के एनआईसीयू के लिए वेंटिलेटर नेशनल हेल्थ मिशन के तहत खरीदे जाएंगे। इसके लिए शासन के निर्देश पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। फरवरी में वेंटिलेटर मिलना शुरू हो जाएंगे। नर्सिंग स्टाफ की कमी के बारे में भी शासन को लिखा है।
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