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Meet At Agra: गन्ना-कैक्टस से बन रहे जूते-चप्पल...लेदर फुटवियर से सस्ते, आरामदायक होने के साथ ही बेहद टिकाऊ
Sun, 09 Nov 2025 10:23 AM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 09 Nov 2025 10:23 AM IST
सार
पेड़-पाैधों से तैयार होने वाले लेदर को प्लांटिंग वीगन लेदर कहते हैं। इसके बने जूते-चप्पल समेत अन्य उत्पाद 7 से 10 साल तक चलते हैं। कई देशों में इसके उत्पादों का निर्यात हो रहा है।
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गन्ना और कैक्टस से तैयार लेदर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
चमड़ा, कपड़ा और सिंथेटिक के जूते-चप्पलों के बीच तकनीक ने इस उद्यम के लिए नए विकल्प भी तलाशे हैं। पेड़-पाैधों की छाल के साथ ही गन्ने और कैक्टस से भी फुटवियर बन रहे हैं, जो पैरों के लिए आरामदायक होने के साथ ही बेहद टिकाऊ भी हैं। आगरा मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के सींगना स्थित आगरा ट्रेड सेंटर में चल रहे मीट एट आगरा में लगे स्टॉलों पर जूता उद्योग को इको फ्रेंडली बनाने वाले उत्पाद उद्यमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
अहमदाबाद से आए आनंद अग्रवाल ने बताया कि गन्ने की खोई और कैक्टस से जूता, चप्पल, बैग, पर्स, सोफा, गारमेंट समेत कई तरह के उत्पाद बन रहे हैं। ये चमड़े से सस्ते और सिंथेटिक से महंगे हैं। इसे प्लांटिंग वीगन लेदर कहते हैं। स्टाइलिश होने के साथ इसके उत्पाद बेहद टिकाऊ भी हैं। इसके बने जूते-चप्पल समेत अन्य उत्पाद 7 से 10 साल तक चलते हैं। कई देशों में इसके उत्पादों का निर्यात हो रहा है।
उन्होंने बताया कि प्लांटिंग वीगन लेदर को प्लांट में तैयार करते हैं और खुद ही मेक्सिको प्रजाति के कैक्टस की 10 एकड़ में खेती भी करते हैं। कैक्टस की इस प्रजाति में कांटे नहीं होते हैं। किसानों को भी इसका ब्रीड देकर पैदावार कर प्रति पत्ता पांच रुपये में खरीदते हैं। किसानों से गन्ने की खोई लेते हैं। प्लांटिंग वीगन लेदर निर्माण के लिए प्लांट भी लगाए हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है।
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मीट एट आगरा में जूता, सोल, मशीनरी समेत 253 स्टॉल लगे हैं। मीट के दूसरे दिन 6922 विजिटर आए। देश-विदेश के 3,140 उद्यमियों ने स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की बुकिंग भी कराई है। इसमें नॉन लेदर प्रोडक्ट के स्टॉल अधिक हैं। उद्यमियों का मानना है कि नॉन लेदर जूते, चप्पल, बैग, शीट कवर, सजावटी सामान समेत कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। दुनिया में इन उत्पादों की मांग में तेजी आने से कई देशों में निर्यात भी बढ़ा है।
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अहमदाबाद से आए आनंद अग्रवाल ने बताया कि गन्ने की खोई और कैक्टस से जूता, चप्पल, बैग, पर्स, सोफा, गारमेंट समेत कई तरह के उत्पाद बन रहे हैं। ये चमड़े से सस्ते और सिंथेटिक से महंगे हैं। इसे प्लांटिंग वीगन लेदर कहते हैं। स्टाइलिश होने के साथ इसके उत्पाद बेहद टिकाऊ भी हैं। इसके बने जूते-चप्पल समेत अन्य उत्पाद 7 से 10 साल तक चलते हैं। कई देशों में इसके उत्पादों का निर्यात हो रहा है।
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उन्होंने बताया कि प्लांटिंग वीगन लेदर को प्लांट में तैयार करते हैं और खुद ही मेक्सिको प्रजाति के कैक्टस की 10 एकड़ में खेती भी करते हैं। कैक्टस की इस प्रजाति में कांटे नहीं होते हैं। किसानों को भी इसका ब्रीड देकर पैदावार कर प्रति पत्ता पांच रुपये में खरीदते हैं। किसानों से गन्ने की खोई लेते हैं। प्लांटिंग वीगन लेदर निर्माण के लिए प्लांट भी लगाए हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है।
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मीट एट आगरा में जूता, सोल, मशीनरी समेत 253 स्टॉल लगे हैं। मीट के दूसरे दिन 6922 विजिटर आए। देश-विदेश के 3,140 उद्यमियों ने स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की बुकिंग भी कराई है। इसमें नॉन लेदर प्रोडक्ट के स्टॉल अधिक हैं। उद्यमियों का मानना है कि नॉन लेदर जूते, चप्पल, बैग, शीट कवर, सजावटी सामान समेत कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। दुनिया में इन उत्पादों की मांग में तेजी आने से कई देशों में निर्यात भी बढ़ा है।
आधुनिक मशीनें आईं, चुटकी बजते ही चिपकता चमड़ा
मीट एट आगरा में जूता निर्माण के लिए आधुनिक मशीनें भी लगी हैं। इसमें कटाई, सिलाई और पेस्टिंग आसानी से होती है। इससे जूता उत्पाद की दर दो गुना तक बढ़ गई है। इसमें चमड़ा और सोल को चिपकाने के लिए स्प्रे सिस्टम मशीन का उपयोग करते हैं। नई दिल्ली से आए विवेक गोयल ने बताया कि स्प्रे सिस्टम मशीन से चुटकी बजाते ही चमड़ा-सोल चिपक जाता है।
इससे केमिकल और समय की बचत होती है। इसकी पकड़ बेहद मजबूत होती है। ऐसे ही जूते की फिनिशिंग और सिलाई के लिए भी ग्रिप मशीन है। इसमें जूते को फंसाकर फिनिशिंग करते हैं। चारों ओर लगे शीशे में पूरे जूते पर सिलवट समेत अन्य विकृति भी देख सकते हैं।
अरे ये जूता तो मुझसे भी ऊंचा है...
प्रदर्शनी में लगा करीब छह फीट ऊंचा लेडीज जूता आकर्षण का केंद्र रहा। इसे देखकर विजिटर भी चौंक गए। कई ने उसके साथ फोटो और सेल्फी भी खिंचवाई। कई लोग इसे देखकर बोले...अरे ये जूता तो मुझसे भी ऊंचा है।
मीट एट आगरा में जूता निर्माण के लिए आधुनिक मशीनें भी लगी हैं। इसमें कटाई, सिलाई और पेस्टिंग आसानी से होती है। इससे जूता उत्पाद की दर दो गुना तक बढ़ गई है। इसमें चमड़ा और सोल को चिपकाने के लिए स्प्रे सिस्टम मशीन का उपयोग करते हैं। नई दिल्ली से आए विवेक गोयल ने बताया कि स्प्रे सिस्टम मशीन से चुटकी बजाते ही चमड़ा-सोल चिपक जाता है।
इससे केमिकल और समय की बचत होती है। इसकी पकड़ बेहद मजबूत होती है। ऐसे ही जूते की फिनिशिंग और सिलाई के लिए भी ग्रिप मशीन है। इसमें जूते को फंसाकर फिनिशिंग करते हैं। चारों ओर लगे शीशे में पूरे जूते पर सिलवट समेत अन्य विकृति भी देख सकते हैं।
अरे ये जूता तो मुझसे भी ऊंचा है...
प्रदर्शनी में लगा करीब छह फीट ऊंचा लेडीज जूता आकर्षण का केंद्र रहा। इसे देखकर विजिटर भी चौंक गए। कई ने उसके साथ फोटो और सेल्फी भी खिंचवाई। कई लोग इसे देखकर बोले...अरे ये जूता तो मुझसे भी ऊंचा है।
योजनाओं की दी जानकारी, कहा- नौकरी देने वाला बनें
मीट एट आगरा में हुए सेमिनार में 911 विद्यार्थी और युवा शामिल हुए। मुख्य अतिथि एफडीडीआई के प्रबंध निदेशक विवेक शर्मा कहा कि नौकरियां सीमित हो रही हैं। ऐसे में युवा उद्यम की सोच रखें। इससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकेंगे। इससे आर्थिक तरक्की भी बढ़ेगी। एफमेक अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने कहा कि इस मेले से फुटवियर के अलावा फर्नीचर, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्राॅनिक्स समेत कई तरह के उद्यम शुरू करने के रास्ते विकसित हुए हैं। फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके लिए कई स्टार्टअप योजनाएं भी शुरू की हैं। भविष्य निधि के श्रवण कुमार मिश्रा, पीएनबी के डीजीएम अमित ग्रोवर, एसबीआई के प्रभाकर पांडे और पुनीत शर्मा और इंडिया फैक्टरिंग के संपर्क मैनेजर अनुज कुमार ने उद्यम की योजनाएं, लोन समेत अन्य की जानकारी दी। कार्यक्रम में संस्थापक अध्यक्ष दलजीत सिंह, उपाध्यक्ष राजेश सहगल, महासचिव प्रदीप वासन, राजीव वासन, कैप्टन एएस राणा, कुलबीर सिंह, चंद्रमोहन सचदेवा आदि मौजूद रहे।
मीट एट आगरा : आंकड़े
6922: विजिटर दूसरे दिन पहुंचे
3140: उद्यमियों ने कराई बुकिंग।
911: युवाओं ने उद्यम के बारे में जाना।
ये भी पढ़ें-UP: नाैकरी के नाम पर ठगी...फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर ठगे 14 लाख रुपये, 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज
मीट एट आगरा में हुए सेमिनार में 911 विद्यार्थी और युवा शामिल हुए। मुख्य अतिथि एफडीडीआई के प्रबंध निदेशक विवेक शर्मा कहा कि नौकरियां सीमित हो रही हैं। ऐसे में युवा उद्यम की सोच रखें। इससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकेंगे। इससे आर्थिक तरक्की भी बढ़ेगी। एफमेक अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने कहा कि इस मेले से फुटवियर के अलावा फर्नीचर, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्राॅनिक्स समेत कई तरह के उद्यम शुरू करने के रास्ते विकसित हुए हैं। फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके लिए कई स्टार्टअप योजनाएं भी शुरू की हैं। भविष्य निधि के श्रवण कुमार मिश्रा, पीएनबी के डीजीएम अमित ग्रोवर, एसबीआई के प्रभाकर पांडे और पुनीत शर्मा और इंडिया फैक्टरिंग के संपर्क मैनेजर अनुज कुमार ने उद्यम की योजनाएं, लोन समेत अन्य की जानकारी दी। कार्यक्रम में संस्थापक अध्यक्ष दलजीत सिंह, उपाध्यक्ष राजेश सहगल, महासचिव प्रदीप वासन, राजीव वासन, कैप्टन एएस राणा, कुलबीर सिंह, चंद्रमोहन सचदेवा आदि मौजूद रहे।
मीट एट आगरा : आंकड़े
6922: विजिटर दूसरे दिन पहुंचे
3140: उद्यमियों ने कराई बुकिंग।
911: युवाओं ने उद्यम के बारे में जाना।
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