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फिरोजाबाद: दस वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के दोषी को फांसी की सजा, मृत्युदंड की सजा सुनकर अदालत में रोया युवक
Fri, 02 Apr 2021 08:37 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 02 Apr 2021 08:37 AM IST
सार
- अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉस्को एक्ट ने सुनाई सजा,सजा सुनते ही पैर कंपकपाए,आंखों से छलके आंसू
- थाना जसराना क्षेत्र में साढ़े तीन माह पूर्व घटना को दिया था अंजाम, प्रभावी पैरवी से मिल सकी सजा
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दुराचार का दोषी युवक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फिरोजाबाद जनपद में थाना जसराना क्षेत्र में साढ़े तीन माह पूर्व दस वर्षीय बालिका के दुष्कर्म के आरोपी को अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो एक्ट मृदुल दुबे ने फांसी (मृत्यु दंड) की सजा सुनाई है। फांसी की सजा सुनते ही आरोपी के पैर लड़खड़ाने के साथ आंखों में आंसू छलक आए। पुलिस ने उसे न्यायालय से कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया।
घटनाक्रम थाना जसराना एक गांव में 14 दिसंबर 2020 का है। पीड़िता पिता के साथ गांव में देवी स्थापना के बाद भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने गई थी। आरोपी नीरज (30) पीड़िता के पिता से बच्ची को घर छोड़ने की बात कहकर अपने साथ ले गया। खेत की ओर ले जाकर आरोपी ने बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इस घिनौनी घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया।
संबंधित खबर- फिरोजाबाद: 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर
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पीड़िता के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। मामला सुनवाई को अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो एक्ट मृदुल दुबे के न्यायालय में पहुंचा। शासन की ओर से पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजमोद सिंह चौहान ने हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट की कई नजीर पेश कीं। न्यायाधीश ने फाइल पर उपलब्ध साक्ष्य, बालिका की हालत को ध्यान में रखते हुए आरोपी को फांसी (मृत्यु दंड) की सजा सुनाई है। एसएसपी अजय कुमार का कहना है दुष्कर्म के आरोपी को 48 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था। विवेचक ने एक माह में जांच पूरी की थी। प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी नीरज को सजा मिली है।
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घटनाक्रम थाना जसराना एक गांव में 14 दिसंबर 2020 का है। पीड़िता पिता के साथ गांव में देवी स्थापना के बाद भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने गई थी। आरोपी नीरज (30) पीड़िता के पिता से बच्ची को घर छोड़ने की बात कहकर अपने साथ ले गया। खेत की ओर ले जाकर आरोपी ने बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इस घिनौनी घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया।
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पीड़िता के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। मामला सुनवाई को अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो एक्ट मृदुल दुबे के न्यायालय में पहुंचा। शासन की ओर से पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजमोद सिंह चौहान ने हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट की कई नजीर पेश कीं। न्यायाधीश ने फाइल पर उपलब्ध साक्ष्य, बालिका की हालत को ध्यान में रखते हुए आरोपी को फांसी (मृत्यु दंड) की सजा सुनाई है। एसएसपी अजय कुमार का कहना है दुष्कर्म के आरोपी को 48 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था। विवेचक ने एक माह में जांच पूरी की थी। प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी नीरज को सजा मिली है।
सजा के बाद बोले माता-पिता: बेटी को न्याय मिला लेकिन परवरिश कैसे होगी?
साढे़ तीन माह में बेटी का अदालत से न्याय तो मिल गया लेकिन अब माता-पिता को उसकी परवरिश की चिंता सता रही है। पिता ने कहा बेटी गांव की अन्य बच्चियों के साथ कैसे रहेगी? इस बात की चिंता अब सता रही है। मामले में आरोपी पक्ष कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
थाना जसराना क्षेत्र के गांव निवासी युवक नीरज ने गांव की दस वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म किया। साढ़े तीन माह में ही न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। 14 दिसबंर 2020 को घटी घटना के बाद एएक अप्रैल को आए फैसले से ग्रामीण खुश हैं। हालांकि पीड़ित बालिका के माता-पिता के चेहरे पर आज भी चिंता की लकीरें हैं। पिता ने कहा बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले को तो सजा मिल गई लेकिन बेटी की चिंता सता रही है। आज भी उनकी बेटी चारपाई पर है और उसका उपचार चल रहा है। पिता ने कहा कि पैसों की तंगी के कारण वे बालिका का उपचार भी नहीं करा पा रहे हैं। बेटी के भविष्य की चिंता को लेकर माता-पिता ने रोते हुए कहा कि आखिर वे अपनी बेटी की पढ़ाई लिखाई का खर्चा कैसे उठाएंगे? आरोपी का मकान एवं परिवार भी उनके घर के पास ही रहता है। बेटी के विवाह की भी चिंता माता-पिता के चेहरे पर साफ है। इधर, नीरज को सजा मिलने के बाद उसके भाई ने कहा यदि उसने गुनाह किया है तो उसे सजा मिल गई।
बेटी कहती थी चाचा, पिता ने किया था विश्वास
बेटी के पिता ने बताया कि नीरज मेरे से उम्र में कुछ छोटा है। बेटी उसे चाचा कहकर बुलाती थी। गांव के पास ही भंडारे में वह बेटी को लेकर गए थे। कार्यक्रम होने के बाद नीरज ने घर लौटते समय उसकी बेटी को घर छोड़ने को कहा। इस पर उन्होंने कहा छोड़ दो, लेकिन उसके मन में इस तरह का पाप था, वह नहीं जानते थे। बेटी के पिता का कहना है कि फांसी से बढ़कर भी अगर कोई सजा हो तो नीरज को मिलनी चाहिए।
सात भाइयों में चौथे नंबर का था आरोपी
जसराना। नीरज अपने सात भाइयों में चौथे नंबर का है। तीस वर्ष की उम्र होने के बाद उसकी शादी नहीं हुई थी। कभी-कभार मजदूरी करने वाला नीरज गांव में घूमता रहता था।
साढे़ तीन माह में बेटी का अदालत से न्याय तो मिल गया लेकिन अब माता-पिता को उसकी परवरिश की चिंता सता रही है। पिता ने कहा बेटी गांव की अन्य बच्चियों के साथ कैसे रहेगी? इस बात की चिंता अब सता रही है। मामले में आरोपी पक्ष कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
थाना जसराना क्षेत्र के गांव निवासी युवक नीरज ने गांव की दस वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म किया। साढ़े तीन माह में ही न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। 14 दिसबंर 2020 को घटी घटना के बाद एएक अप्रैल को आए फैसले से ग्रामीण खुश हैं। हालांकि पीड़ित बालिका के माता-पिता के चेहरे पर आज भी चिंता की लकीरें हैं। पिता ने कहा बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले को तो सजा मिल गई लेकिन बेटी की चिंता सता रही है। आज भी उनकी बेटी चारपाई पर है और उसका उपचार चल रहा है। पिता ने कहा कि पैसों की तंगी के कारण वे बालिका का उपचार भी नहीं करा पा रहे हैं। बेटी के भविष्य की चिंता को लेकर माता-पिता ने रोते हुए कहा कि आखिर वे अपनी बेटी की पढ़ाई लिखाई का खर्चा कैसे उठाएंगे? आरोपी का मकान एवं परिवार भी उनके घर के पास ही रहता है। बेटी के विवाह की भी चिंता माता-पिता के चेहरे पर साफ है। इधर, नीरज को सजा मिलने के बाद उसके भाई ने कहा यदि उसने गुनाह किया है तो उसे सजा मिल गई।
बेटी कहती थी चाचा, पिता ने किया था विश्वास
बेटी के पिता ने बताया कि नीरज मेरे से उम्र में कुछ छोटा है। बेटी उसे चाचा कहकर बुलाती थी। गांव के पास ही भंडारे में वह बेटी को लेकर गए थे। कार्यक्रम होने के बाद नीरज ने घर लौटते समय उसकी बेटी को घर छोड़ने को कहा। इस पर उन्होंने कहा छोड़ दो, लेकिन उसके मन में इस तरह का पाप था, वह नहीं जानते थे। बेटी के पिता का कहना है कि फांसी से बढ़कर भी अगर कोई सजा हो तो नीरज को मिलनी चाहिए।
सात भाइयों में चौथे नंबर का था आरोपी
जसराना। नीरज अपने सात भाइयों में चौथे नंबर का है। तीस वर्ष की उम्र होने के बाद उसकी शादी नहीं हुई थी। कभी-कभार मजदूरी करने वाला नीरज गांव में घूमता रहता था।