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Health News: घर में अगरबत्ती और मॉस्किटो कॉइल बना रहे गंभीर रोगी, चिकित्सकों ने किया आगाह; ऐसे भगाएं मच्छर
Sun, 28 Dec 2025 02:27 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 28 Dec 2025 02:27 PM IST
सार
घर में मॉस्किटो कॉइल और अगरबत्ती जलाते हैं तो अलर्ट हो जाएं। ये सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। इसको लेकर चिकित्सक ने आगाह किया है। साथ ही इनकी जगह पर क्या इस्तेमाल किया जाना चाहिए, इस बारे में भी बताया है।
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Agarbatti
- फोटो : freepik
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विस्तार
घरों में पूजा-पाठ के दौरान जलाई जाने वाली अगरबत्ती और मच्छर भगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मॉस्किटो कॉइल का धुआं सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इससे हाइपर सेंसिटिविटी के साथ-साथ सीओपीडी, अस्थमा और अन्य सांस संबंधी रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अगरबत्ती और मॉस्किटो कॉइल के धुएं से पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण निकलते हैं, जो सबसे अधिक हानिकारक माने जाते हैं। ये बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। घर के अंदर का यह प्रदूषण बाहरी प्रदूषण जितना ही घातक हो सकता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि जिस तरह खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के दौरान वातावरण में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ जाती है, उसी तरह घर के अंदर अगरबत्ती और कॉइल जलाने से भी हवा की गुणवत्ता बिगड़ती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से सांस फूलना, खांसी, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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सांस की नली में सूजन भी बढ़ जाती है। उन्होंने सलाह दी कि रात में सोते हुए मॉस्किटो कॉइल न जलाएं। इसके स्थान पर लिक्विड आधारित मच्छर भगाने वाली सामग्रियों का उपयोग करना सुरक्षित है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी या एलर्जी की समस्या है, उन्हें इनसे सावधानी बरतनी चाहिए।
ये भी पढ़ें-Railway News: कोहरे का असर...आठ घंटे से भी ज्यादा लेट रही अमृतसर एक्सप्रेस, ये गाड़ियां भी देरी से चलीं
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एसएन मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अगरबत्ती और मॉस्किटो कॉइल के धुएं से पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण निकलते हैं, जो सबसे अधिक हानिकारक माने जाते हैं। ये बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। घर के अंदर का यह प्रदूषण बाहरी प्रदूषण जितना ही घातक हो सकता है।
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डॉ. सिंह ने बताया कि जिस तरह खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के दौरान वातावरण में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ जाती है, उसी तरह घर के अंदर अगरबत्ती और कॉइल जलाने से भी हवा की गुणवत्ता बिगड़ती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से सांस फूलना, खांसी, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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सांस की नली में सूजन भी बढ़ जाती है। उन्होंने सलाह दी कि रात में सोते हुए मॉस्किटो कॉइल न जलाएं। इसके स्थान पर लिक्विड आधारित मच्छर भगाने वाली सामग्रियों का उपयोग करना सुरक्षित है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी या एलर्जी की समस्या है, उन्हें इनसे सावधानी बरतनी चाहिए।
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