{"_id":"6a15395a1c80fe10330e2631","slug":"scientists-develop-ready-made-feed-for-goats-to-boost-health-and-milk-production-2026-05-26","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: बकरियों के लिए भी अब रेडीमेड आहार, जो बीमारियों से बचाएगा, इसके साथ ही वजन भी बढ़ाएगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: बकरियों के लिए भी अब रेडीमेड आहार, जो बीमारियों से बचाएगा, इसके साथ ही वजन भी बढ़ाएगा
Tue, 26 May 2026 11:40 AM IST
Dhirendra Singh
अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 26 May 2026 11:40 AM IST
सार
मथुरा स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान ने बकरियों के लिए रेडिमेड पोषणयुक्त फीड तैयार किया है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और वजन दोनों बढ़ेंगे। मोरिंगा आधारित इस आहार से दूध उत्पादन में 25% तक बढ़ोतरी और बीमारियों में कमी आने का दावा वैज्ञानिकों ने किया है।
विज्ञापन
बकरियों के लिए भी अब रेडिमेड आहार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
हरे चारे के संकट को देखते हुए केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम (मथुरा) के वैज्ञानिकों ने बकरियों के लिए भी रेडीमेड फीड (आहार) तैयार कर दिया है। यह खास फूड जहां बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उन्हें बीमारियों से बचाएगा वहीं, इसके सेवन से बकरियों का वजन भी तेजी से बढ़ेगा जिससे बकरी पालकों को बड़ा मुनाफा होगा। अभी बाजार में गाय-भैंस, बिल्ली और डाॅग्स के लिए ही इस तरह का आहार उपलब्ध था। बकरियों का रेडिमेड फीड जल्द बाजार में आने की उम्मीद है। संस्थान ने मुंबई और इंदाैर की कंपनियों से इसके लिए करार किया है।
विज्ञापन
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के पशु पोषण विभाग के प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डाॅ. रविंद्र कुमार ने बताया कि प्रोटोजोआ परजीवी के कारण बकरियों की आंत में एक संक्रामक बीमारी हो जाती है जिसे कोक्सीडियोसिस कहते हैं। यह बीमारी दूषित चारा खाने या गंदा पानी पीने से होती है। इस बीमारी से बड़ी संख्या में बकरियां प्रभावित होती हैं, जिससे बकरी पालकों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बकरियों को इस बीमारी से बचाने के लिए हमने काॅक्सीचेक एच नामक रेडिमेड फीड बनाया है। इसमें अनाज, खली, चोकर, मिनरल मिक्सर, दलहन भूसा यानी संपूर्ण आहार के अलावा हर्बल इंग्रीडिएंट्स होते हैं। इन हर्बल इंग्रीडिएंट्स में उन औषधीय पाैधों का अर्क (एक्सट्रैक्टस) होता है जो प्रोटोजोआ परजीवी को मारते हैं। इसे खाने से बकरियां स्वस्थ रहती हैं।
डाॅ. रविंद्र ने बताया कि इसी तरह उन्होंने मेथलो एच नामक रेडिमेड फीड बनाया है जो बकरियाें से मिथेन गैस के उत्सर्जन को कम करता है। उन्होंने बताया कि जानवरों से मिथेन गैस निकलती है जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती है और कार्बन डाइऑक्साइड से 21 गुना अधिक प्रभावी है। संपूर्ण आहार के साथ कुछ औषधीय पाैधों का अर्क मिलाकर इस फीड को भी तैयार किया गया है। इस भोजन के इस्तेमाल से बकरियों का वजन तो बढ़ता ही है, पर्यावरण की सेहत भी सुधरती है।
मोरिंगा फीड से दूध में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी
संस्थान के वैज्ञानिकों ने दूध देने वाली बकरियों के लिए मोरिंगा बेस्ड कंप्लीट फीड भी तैयार किया है। इसका ट्रायल जब बकरियों पर किया गया तो उनके दूध में 15 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। डाॅ. रविंद्र ने बताया कि इस आहार का दूसरा फायदा थनैला रोग की रोकथाम में मददगार के ताैर पर हो रहा है। दरअसल, इस रोग के कारण बकरियों के थन में सूजन आ जाती है। मोरिंगा आधारित संपूर्ण आहार के सेवन से बकरियों में सोमैटिक सेल काउंट कम हो जाता है और उन्हें सूजन से राहत मिलती है। यही नहीं यह आहार बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ा देता है। साथ ही बकरियों के दूध का स्वास्थ्यवर्धक बना देता है।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने दूध देने वाली बकरियों के लिए मोरिंगा बेस्ड कंप्लीट फीड भी तैयार किया है। इसका ट्रायल जब बकरियों पर किया गया तो उनके दूध में 15 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। डाॅ. रविंद्र ने बताया कि इस आहार का दूसरा फायदा थनैला रोग की रोकथाम में मददगार के ताैर पर हो रहा है। दरअसल, इस रोग के कारण बकरियों के थन में सूजन आ जाती है। मोरिंगा आधारित संपूर्ण आहार के सेवन से बकरियों में सोमैटिक सेल काउंट कम हो जाता है और उन्हें सूजन से राहत मिलती है। यही नहीं यह आहार बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ा देता है। साथ ही बकरियों के दूध का स्वास्थ्यवर्धक बना देता है।
लागत भी बेहद कम
डाॅ. रविंद्र ने बताया कि इन आहार को तैयार करने में लागत भी बहुत कम आ रही है। ऐसे में बकरी पालकों के लिए इसे खरीदना भी आसान होगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रति किलो 16 से 18 रुपये की लागत आई है। कंपनियां अगर बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन करेंगी तो दाम और कम हो सकता है।
डाॅ. रविंद्र ने बताया कि इन आहार को तैयार करने में लागत भी बहुत कम आ रही है। ऐसे में बकरी पालकों के लिए इसे खरीदना भी आसान होगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रति किलो 16 से 18 रुपये की लागत आई है। कंपनियां अगर बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन करेंगी तो दाम और कम हो सकता है।
मखदूम केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. मनीष कुमार चेटली ने बताया कि बकरी पालन के क्षेत्र में हमारा संस्थान कई क्रांतिकारी कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में बकरियों के लिए संपूर्ण आहार तैयार किया गया है। यह आहार जहां बकरियों को बीमारियों से दूर रखेगा और उनका इलाज करेगा वहीं, दूध बढ़ाने में भी सहायक होगा।