मथुरा: संतों ने दीपोत्सव से पहले यमुना में किया दीपदान, श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर कही ये बात, पढ़िए खबर
श्रीकृष्ण जन्मभूमि का प्रकरण अदालत में चल रहा है। इबादतगाह को लेकर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं। रविवार को इसी मुद्दे पर संतों ने यमुना ने दीपदान किया।
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मथुरा जनपद में केशीघाट पर रविवार की शाम श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति की अगुवाई में संत, महंत, महामंडलेश्वर व सनातनधर्मियों ने दीपदान किया। दीपोत्सव से पहले यमुना महारानी में दीपदान कर सनातनधर्मियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान को ईदगाह के 'कलंक' से मुक्ति की कामना की। महंत सुतीक्ष्णदास ने यमुना माहरानी से विनती करते हुए कहा वे श्रीकृष्ण की पटरानी हैं और द्वापरकाल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर लीलाओं की साक्षी भी हैं। भगवान श्रीकृष्ण के काल की साक्षी यमुना महारानी की साधना ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान के इस कलंक को मिटाने में सहायक साबित होगी। पीपाद्वाराचार्य बाबा बलरामदास ने कहा सभी सनातनधर्मियों को यमुना महारानी से प्रार्थना करनी होगी कि जल्द श्रीकृष्ण जन्मभूमि अतिक्रमण मुक्त हो। संत स्वामी डॉ. आदित्यानंद ने कहा ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साक्षी के रूप में गिर्राज पर्वत और यमुना महारानी ही हैं। ऐसे में यमुना महारानी ही भक्तों को अतिक्रमण मुक्त श्रीकृष्ण जन्मस्थान का दर्शन करवा सकती हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्रप्रताप सिंह ने कहा जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने जब कंस के कारागार में जन्म लिया तब भी यमुना महारानी अपने रौद्र रूप में थीं। लेकिन जब वासुदेवजी भगवान को लेकर गोकुल के लिए निकले तो यमुना महारानी ने न केवल भगवान के लिए गोकुल का रास्ता बनाया। बल्कि उनकी रक्षा भी की। जिस रौद्र रूप में गोकुल के रास्ते में यमुना महारानी ने शांत होकर वसुदेवजी को राह दी। इसी तरह यमुना महारानी ही भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान के कलंक को मिटाने में अपनी भूमिका निभाएंगी। यही कारण है आंदोलन से जुड़े सनातनधर्मियों व संतों ने दीपोत्सव से पहले यमुना माहरानी का दीपदान किया।
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