चिंताजनक: कोरोना के नए स्ट्रेन पर आरटी-पीसीआर जांच भी फेल, फेफड़ों में संक्रमण...रिपोर्ट निगेटिव
आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट निगेटिव आ रही, लेकिन फेफड़ों में संक्रमण मिला। जब मरीज ने सीटी स्कैन कराया तो पता चला। आगरा में ऐसे दो मामले सामने आए हैं।
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कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन जांच में भी चकमा दे रहा है। रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट (आरटी-पीसीआर) भी इसकी पुष्टि में नाकाम साबित हो रहा है, लेकिन वायरस फेफड़ों को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। आगरा में ऐसे मरीजों की सीटी स्कैन जांच से यह खुलासा हुआ है।
केस-एक
दयालबाग निवासी 61 वर्षीय महिला की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई। सीटी स्कैन जांच में फेफड़ों में 70 फीसदी संक्रमण बताया गया। चार दिन बुखार व सांस की तकलीफ से हालात खराब रही, लेकिन उपचार के बाद ठीक हो गईं।
केस-दो
शाहगंज निवासी 64 वर्षीय महिला की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई। सीटी स्कैन में फेफड़ों में पानी भरा मिला। तीन दिन एसएन में उपचार के बाद महिला की मौत हो गई। महिला टीकाकरण भी करा चुकी थी।
दो नए स्ट्रेन मिल चुके हैं
दूसरी लहर में वायरस के दो नए स्ट्रेन मिल चुके हैं। जिनमें दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन व एक अज्ञात स्ट्रेन है। अन्य स्ट्रेन की जांच के लिए रैंडम सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। दूसरी तरफ नए स्ट्रेन का प्रभाव नए रूप में सामने आ रहा है।
जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ रही है, जबकि मरीजों में प्रबल लक्षण प्रकट हो रहे हैं। आरटी-पीसीआर जांच में पुष्टि नहीं होने पर सीटी स्कैन रिपोर्ट से फेफड़ों पर हो रहे दुष्प्रभाव का पता चल रहा है। ऐसे मरीजों के फेफड़े 60 से 80 फीसदी तक संक्रमित मिले हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि आरटी-पीसीआर जांच में 24 घंटे का समय लगता है। टेस्ट में वायरस के कुछ नए वैरिएंट्स पता नहीं चल पा रहा है। वायरस का असर फेफड़ों पर पड़ता है।
शहर में दयालबाग सबसे बड़ा हॉटस्पॉट है। यहां पिछले 15 दिनों में 62 से अधिक मरीज मिले हैं। पिछले साल यहां 250 मरीज मिले थे। अर्जुन नगर नया हॉटस्पॉट हैं। यहां भी संक्रमित व संदिग्ध मरीजों की संख्या 60 से अधिक है।
पिछले साल यहां 10 केस मिले थे। इनके अलावा शाहगंज, मंटोला और कमला नगर भी सर्वाधिक संक्रमित क्षेत्र हैं। शहर में 145 इलाकों में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बन चुके हैं। देहात में 40 इलाकों में संक्रमण का प्रसार हो चुका है।
मरीज ठीक होने की दर 10 फीसदी घटी
एक तरफ मरीज बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ मरीजों के ठीक होने की दर 10 फीसदी तक घट गई है। 31 मार्च को संक्रमितों के स्वस्थ होने की दर 98.14 फीसदी थी जो गुरुवार 88.06 फीसदी रह गई।
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