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ब्रज में भाजपा के शिखर का श्रेय कल्याण को दे गए शाह और मौर्य
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कासगंज। विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकने कासगंज में आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की जुबां पर बार-बार पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का नाम था। दोनों ही दिग्गजों ने भाजपा के शिखर पर पहुंचने का श्रेय कल्याण सिंह को दिया। केंद्रीय मंत्री ने जहां एक ओर अपने सफल राजनीतिक जीवन का मार्गदर्शक कल्याण सिंह को बताया। वहीं, डिप्टी सीएम पूर्व मुख्यमंत्री को यादकर भावुक दिखाई दिए।
अपने संबोधन की शुरूआत करते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को याद करते हुए उन्हें नमन किया। भीड़ की ओर इशारा करते हुए बोले कि जो जन सैलाब उमड़ा है, वह यह बता रहा है कि बाबूजी का स्मरण जस का तस बना हुआ है। बाबूजी के बाद पहली बार कासगंज आया हूं। ब्रज में ही नहीं बल्कि प्रदेश में भाजपा को शिखर तक बाबूजी ने ही पहुंचाया। कासगंज की धरा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी की कर्मस्थली है। यही कल्याण सिंह थे जब समय आया कि रामजन्मभूमि पर मंदिर बने या कुर्सी जाए। तो उन्होंने दो मिनट में कुर्सी को ठुकराकर प्रभु श्रीराम के मंदिर का रास्ता साफ कर दिया था।कहा कि आज इस कार्यक्रम स्थल पर जगह जगह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ मेरे पोस्टर लगे हैं। यह स्पष्ट कर रहा है कि बाबूजी का आर्शीवाद आज भी मेरे साथ है।
शाह के संबोधन से पहले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की जुबां पर भी कल्याण सिंह रहे। उन्होंने कासगंज को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की कर्मभूमि बताई और पूर्व मुख्यमंत्री को यादकर वे भावुक दिखाई दिए। कहा कि राम मंदिर का सपना साकार करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर पूरा देश शोक में डूबा। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जन सैलाब उमड़ा, लेकिन सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि भी नहीं दी। क्या बाबूजी के इस अपमान का बदला चुनाव में लेना चाहिए या नहीं? इस पर भीड़ से आवाज आई बिल्कुल लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबूजी के सम्मान में सिर्फ यही अपील है कि कासगंज जिले की सभी सीटों पर भाजपा प्रत्याशी को आप जिताएं। और सही मायने में बाबूजी को सच्ची श्रद्धांजलि तब ही मिलेगी जब सपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त कर देंगे।
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अपने संबोधन की शुरूआत करते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को याद करते हुए उन्हें नमन किया। भीड़ की ओर इशारा करते हुए बोले कि जो जन सैलाब उमड़ा है, वह यह बता रहा है कि बाबूजी का स्मरण जस का तस बना हुआ है। बाबूजी के बाद पहली बार कासगंज आया हूं। ब्रज में ही नहीं बल्कि प्रदेश में भाजपा को शिखर तक बाबूजी ने ही पहुंचाया। कासगंज की धरा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी की कर्मस्थली है। यही कल्याण सिंह थे जब समय आया कि रामजन्मभूमि पर मंदिर बने या कुर्सी जाए। तो उन्होंने दो मिनट में कुर्सी को ठुकराकर प्रभु श्रीराम के मंदिर का रास्ता साफ कर दिया था।कहा कि आज इस कार्यक्रम स्थल पर जगह जगह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ मेरे पोस्टर लगे हैं। यह स्पष्ट कर रहा है कि बाबूजी का आर्शीवाद आज भी मेरे साथ है।
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शाह के संबोधन से पहले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की जुबां पर भी कल्याण सिंह रहे। उन्होंने कासगंज को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की कर्मभूमि बताई और पूर्व मुख्यमंत्री को यादकर वे भावुक दिखाई दिए। कहा कि राम मंदिर का सपना साकार करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर पूरा देश शोक में डूबा। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जन सैलाब उमड़ा, लेकिन सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि भी नहीं दी। क्या बाबूजी के इस अपमान का बदला चुनाव में लेना चाहिए या नहीं? इस पर भीड़ से आवाज आई बिल्कुल लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबूजी के सम्मान में सिर्फ यही अपील है कि कासगंज जिले की सभी सीटों पर भाजपा प्रत्याशी को आप जिताएं। और सही मायने में बाबूजी को सच्ची श्रद्धांजलि तब ही मिलेगी जब सपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त कर देंगे।
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