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Agra News: क्षय रोग से बचाव के लिए संक्रमित के परिजन भी खाएंगे दवा
Sat, 27 Jul 2024 02:38 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sat, 27 Jul 2024 02:38 AM IST
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कासगंज। क्षय रोग से पीड़ित मरीज के परिवार को बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए विभाग सतर्क हो गया है। इसके लिए विभाग ने जिले में टीपीटी कार्यक्रम शुरू किया है। परिवार में किसी और सदस्य में यह बीमारी न फैले, इसके लिए सभी सदस्यों को 12 सप्ताह तक दवा का सेवन कराया जा रहा है।
केंद्र सरकार का वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का संकल्प है। इसको देखते हुए क्षय रोगियों को तमाम योजनाएं चलाकर लाभान्वित किया जा रहा है। इसके बाद भी टीबी की बीमारी कम नहीं हो पा रही। अब मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को भी सुरक्षा के दायरे में लाने की कवायद की जा रही है। जिले में इस साल 2288 मरीज अब तक टीबी की बीमारी के चिह्नित हो चुके हैं।
इन सभी लोगों का उपचार टीबी अस्पताल की ओर से किया जा रहा है। अब इनके संपर्क में आने वाले लोगों को भी स्कैन किया जा रहा है। जिससे टीबी अन्य लोगों में न फैल सके। विभाग की ओर से टीबी मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों और परिवार के सदस्यों को भी 12 सप्ताह तक दवा का सेवन कराया जाएगा।
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क्षय रोग के लक्षण
किसी भी मरीज को लगातार खांसी, बुखार, रात काे साेते समय पसीना आना, वजन घटना, थकान और सीने में दर्द होना आदि क्षय रोग के लक्षण हैं।
एक रोगी से रहता है 15 व्यक्तियों को खतरा
डीपीएम धर्मेंद्र यादव ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति में फेफडे़ की टीबी है तो उससे 15 लोगों में बीमारी फैलने का खतरा रहा है। मरीज का उपचार शुरू हो जाने के बाद किसी को खतरा नहीं रहता है, लेकिन परिवार के सदस्य मरीज के लगातार संपर्क में रहते हैं जिससे वे टीबी के बैक्टीरिया की चपेट में आ चुके होते हैं, उनकी जांच और उपचार नहीं हो पता। टीपीटी कार्यक्रम के तहत ऐसे लोगों पर फोकस किया जा रहा है
वर्ष - मरीजों की संख्या
2018-3477
2019-3670
2020-2613
2021-3073
2022-3767
2023-4306
2024- 2288
वर्जन
टीबी की रोकथाम के लिए टीपीटी कार्यक्रम लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत फेफडे़ की टीबी के मरीज के परिवार के सदस्य को दवा खिलाई जा रही है जिससे वे बीमारी की चपेट में न आ सकें। - डॉ. राजीव अग्रवाल, सीएमओ
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केंद्र सरकार का वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का संकल्प है। इसको देखते हुए क्षय रोगियों को तमाम योजनाएं चलाकर लाभान्वित किया जा रहा है। इसके बाद भी टीबी की बीमारी कम नहीं हो पा रही। अब मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को भी सुरक्षा के दायरे में लाने की कवायद की जा रही है। जिले में इस साल 2288 मरीज अब तक टीबी की बीमारी के चिह्नित हो चुके हैं।
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इन सभी लोगों का उपचार टीबी अस्पताल की ओर से किया जा रहा है। अब इनके संपर्क में आने वाले लोगों को भी स्कैन किया जा रहा है। जिससे टीबी अन्य लोगों में न फैल सके। विभाग की ओर से टीबी मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों और परिवार के सदस्यों को भी 12 सप्ताह तक दवा का सेवन कराया जाएगा।
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क्षय रोग के लक्षण
किसी भी मरीज को लगातार खांसी, बुखार, रात काे साेते समय पसीना आना, वजन घटना, थकान और सीने में दर्द होना आदि क्षय रोग के लक्षण हैं।
एक रोगी से रहता है 15 व्यक्तियों को खतरा
डीपीएम धर्मेंद्र यादव ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति में फेफडे़ की टीबी है तो उससे 15 लोगों में बीमारी फैलने का खतरा रहा है। मरीज का उपचार शुरू हो जाने के बाद किसी को खतरा नहीं रहता है, लेकिन परिवार के सदस्य मरीज के लगातार संपर्क में रहते हैं जिससे वे टीबी के बैक्टीरिया की चपेट में आ चुके होते हैं, उनकी जांच और उपचार नहीं हो पता। टीपीटी कार्यक्रम के तहत ऐसे लोगों पर फोकस किया जा रहा है
वर्ष - मरीजों की संख्या
2018-3477
2019-3670
2020-2613
2021-3073
2022-3767
2023-4306
2024- 2288
वर्जन
टीबी की रोकथाम के लिए टीपीटी कार्यक्रम लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत फेफडे़ की टीबी के मरीज के परिवार के सदस्य को दवा खिलाई जा रही है जिससे वे बीमारी की चपेट में न आ सकें। - डॉ. राजीव अग्रवाल, सीएमओ