फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   rare battagur turtles in chambal river

सिर्फ चंबल नदी में बची है कछुओं की यह दुर्लभ प्रजाति, वन्य जीव विभाग कर रहा निगरानी

Fri, 24 May 2019 01:34 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 24 May 2019 01:34 PM IST
विज्ञापन
rare battagur turtles in chambal river
बटागुर कछुओं के बच्चे चंबल नदी में छोड़ता वन दरोगा - फोटो : अमर उजाला
बेहद दुर्लभ प्रजातियों में शुमार बटागुर कछुओं को चंबल नदी जीवन दे रही है। चंबल सेंक्चुरी क्षेत्र में हैचिंग के बाद बटागुर कछुओं के 2,000 बच्चों को वापस चंबल नदी में छोड़ दिया गया। राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ ने कछुओं को नदी में छोड़ने के साथ यहां चल रहे कछुआ संरक्षण केंद्र का निरीक्षण भी किया।
विज्ञापन


राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट और टर्टल सर्वाइवल एलायन्स (टीएसए) बाह-इटावा की सीमा के गांव गढ़ायता में कछुआ संरक्षण केंद्र के जरिए बटागुर समेत दुर्लभ प्रजातियों के कछुओं के कुनबे को बढ़ाने पर काम कर रही है। 
विज्ञापन


इस सेंटर के साथ 250 बटागुर कछुए पिनाहट में, 312 मऊ में, 538 हरलालपुरा में, 285 मुकुटपुरा में, 315 गढ़ायता के अलावा इटावा में जन्मे कछुओं के बच्चे चंबल नदी में छोड़े गए। मंगलवार को चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट डीएफओ आनंद कुमार ने संरक्षण केंद्र का निरीक्षण किया और कछुओं की तादात बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। 
विज्ञापन
विज्ञापन

संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल हैं बटागुर कछुए

नेपाल, बांग्लादेश, वर्मा जैसे देशों में शिकार के चलते कछुओं की बटागुर प्रजाति समाप्त हो गई है। इन्हें संकट ग्रस्त प्रजाति की सूची में रखा गया है। हालांकि चंबल नदी में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। 

कछुओं के तस्करों की नजर यहां पर है, लेकिन वन्य जीव विभाग की मानीटरिंग और घड़ियाल सेंक्चुरी के कारण बटागुर समेत अन्य क छुए बढ़ रहे हैं। बाह के रेंजर अमित सिसौदिया, इटावा के रेंजर सर्वेश भदौरिया ने बताया कि पहले दौर में बटागुर कछुओं की हैचिंग हुई है। दूसरी प्रजाति के कछुओं की भी हैचिंग शुरू हो गई है।

चंबल नदी और सेंक्चुरी क्षेत्र में जैव विविधता के कारण पक्षियों, कछुओं और घड़ियालों की संख्या बढ़ रही है। दुर्लभ बटागुर कछुओं का संरक्षण करके इनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हैचिंग जारी है, उम्मीद है कि इस बार संख्या ज्यादा रहेगी। - आनंद कुमार, डीएफओ, राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed