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रक्षाबंधन 2026: शाम को बहनें किस समय बांधे राखी, जानें कब तक रहेगा राहुकाल? ये मुहूर्त रहेगा बेहद शुभ

Fri, 28 Aug 2026 02:30 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 28 Aug 2026 02:30 PM IST
सार

रक्षाबंधन पर सौम्य योग, बुधादित्य योग और शुभ कर्तरी योग का संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिषाचार्यों ने विशेष बताया है। भाई का मुख पूर्व और बहन का मुख उत्तर दिशा में रखकर तिलक, रक्षासूत्र, आरती और मिठाई की परंपरा निभाने की सलाह दी गई है।
 

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Raksha Bandhan 2026 Rakhi Bandhane Ka Shubh Muhurat Raksha Bandhan Shubh Muhurat Bhadra Time
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भाई-बहन के स्नेह और अटूट विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार शुभ संयोग बन रहे है। राहत की बात यह है कि इस वर्ष पर्व पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक बहनें राहुकाल को छोड़कर किसी भी समय भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
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ज्योतिषाचार्य डाॅ पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि शुक्रवार को राखी बांधने के लिए दो श्रेष्ठ मुहूर्त प्राप्त हैं पहला सुबह 06:20 से 09:49 बजे तक। दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12:20 बजे से शाम 04:40 बजे तक रहेगा। सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल का साया रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस समय राखी न बांधें।
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ज्योतिषाचार्य डाॅ अरविंद मिश्रा ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर सौम्य योग, बुधादित्य योग और शुभ कर्तरी योग का एक साथ दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र रहेगा, जबकि सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे। इन दिव्य योगों में जब बहनें अपने भाइयों का तिलक करेंगी, तो भाइयों को उन्नति, दीर्घायु और अपार सुख-समृद्धि का फल प्राप्त होगा।
 
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दिशा का नियम और सही पूजन विधि
राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर और बहन का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा सूर्य देव की मानी जाती है, जो भाई को यश और कीर्ति प्रदान करती है। वहीं उत्तर दिशा में हिमालय और देवों का वास माना गया है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

पूजन विधि
सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत (चावल) से टीका लगाएं। इसके बाद उनकी दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। शुद्ध देसी घी के दीपक से आरती उतारें और भाई का मुंह मीठा कराएं। तत्पश्चात भाई भी बहन को उपहार देकर उनका मुंह मीठा कराएं और जीवनभर रक्षा का वचन दें। 
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