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बाजार-त्योहार और परंपरा: कपड़ों और किताबों से नाता बरकरार, मुगलिया काल से खासियत है बरकरार राजा की मंडी

Tue, 26 Oct 2021 05:43 PM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 26 Oct 2021 05:43 PM IST
सार

वर्ष 1978 से दिवाली पर होती रही है सजावट, इस बार पांच दिन तक होगी, कपड़ों, किचन उत्पाद और महिलाओं की जरूरत का प्रमुख बाजार है राजा की मंडी

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Raja Ki Mandi Main Market In Agra Know History
राजा की मंडी बाजार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिवाली पर सबसे भीड़ वाले बाजारों में से एक रहेगा राजा की मंडी बाजार। मुगलिया काल से कपड़ों और ब्रिटिश काल से किताबों से जो नाता जुड़ा, वह इस बाजार में अब तक बरकरार है। आगरा कॉलेज और सेंट जोंस कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए किताबों, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राजा की मंडी ही एकमात्र बाजार है। वहीं शादी, त्योहार के लिए महिलाओं की कपड़ा, कॉस्मेटिक्स, फुटवियर, किचन की जरूरतों का बाजार भी यही है। थोक और रिटेल की 450 से ज्यादा दुकानों का यह बाजार हर त्योहार के मुताबिक अपने को ढालता रहा है। 1978 से बाजार ने परंपरा शुरू की कि दिवाली पर एमजी रोड से लेकर फाटक तक के बाजार को सजाया जाए। तब से हर दिवाली पर बाजार दुल्हन की तरह रंगीन रोशनी से सजाया जाता है। इस बार दिवाली पर तीन दिन की जगह पांच दिन पहले ही बाजार में सजावट की जाएगी। 

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खासियत है बरकरार
पढ़ाई के साथ यह बाजार घर की सभी जरूरतों को पूरा करने वाला बाजार है। यह सदियों से अपनी खासियत को बरकरार रखे हुए है। दिवाली पर इस बार एमजी रोड को भी बाजार के साथ सजाएंगे। -राम निवास राठौर, अध्यक्ष राजामंडी बाजार
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सब सामान है उपलब्ध
शादी हो या कोई त्योहार, राजामंडी में महिलाओं की जरूरत का सब सामान उपलब्ध है। गुणवत्ता और विश्वास के साथ हमने अपने ग्राहकों से रिश्ता कायम किया है जो दशकों से बरकरार है। -पद्म जसवानी, महामंत्री

बाजार ने खुद को ढाला
वक्त के साथ राजा मंडी बाजार ने अपने को ढाला है। जब जैसा ट्रेंड चला, बाजार ने अपने को बदला। ग्राहकों से रिश्ते ऐसे बनाए कि ऑन लाइन का असर हमारे मार्केट पर ज्यादा नहीं पड़ा है। -नरेंद्र अमरनानी, महामंत्री

इतिहास: राजा टोडरमल की मंडी बनी प्रमुख बाजार
मुगल बादशाह अकबर के वजीर रहे राजा टोडरमल की जिस जगह हवेली थी, वह अब राजा की मंडी के नाम से प्रसिद्ध हो गई। ब्रिटिश काल में यह राजा टोडरमल की मंडी के नाम से थी। बाद में राजा की मंडी नाम रह गया। पुस्तक ‘मुन्तखवत तारीख’ में इसका जिक्र है। अकबर के दौर में जब आगरा व्यापार का प्रमुख केंद्र था तब राजा टोडरमल ने इस मंडी में सुरक्षा व्यवस्था, यात्रियों के ठहरने का इंतजाम कराया था। राजा की मंडी में पहले भी कपड़े का व्यापार और रंगाई का काम होता था। यहां की एक गली को आज भी गली रंग रेजान कहते हैं। राजा मंडी क्षेत्र में नाथ संप्रदाय का अति प्राचीन मंदिर है। ब्रिटिश काल में यहां इस बाजार के कारण ही 1904 में रेलवे स्टेशन बनाया गया, जो राजा की मंडी नाम से मौजूद है।

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