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Agra News: नौकरी छोड़ी, अर्थशास्त्र पढ़ा और अब चार स्वर्ण पदकों से सम्मानित होंगे नरेंद्र सिंह
Wed, 22 Jul 2026 02:30 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 22 Jul 2026 02:30 AM IST
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आगरा। सफलता की राह हमेशा सीधी नहीं होती। कई बार मंजिल तक पहुंचने के लिए अपनी दिशा बदलने का साहस भी करना पड़ता है। पश्चिमपुरी निवासी नरेंद्र सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया, आईटी सेक्टर में नौकरी की, लेकिन मन नहीं लगा। आखिरकार उन्होंने वही राह चुनी, जिसमें उन्हें सुकून मिला। उन्हें शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली और अर्थशास्त्र में उनकी रुचि ने उन्हें नई दिशा दी। अब इसी मेहनत और लगन का परिणाम है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में नरेंद्र सिंह को सबसे ज्यादा चार स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा।
नरेंद्र सिंह ने वर्ष 2014 में दयालबाग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। बीटेक पूरा करने के बाद वर्ष 2015 से 2018 तक उन्होंने आईटी सेक्टर में नौकरी की। हालांकि, नौकरी में उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली, जिसकी वह तलाश कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने करियर की दिशा बदलने का फैसला किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आगे चलकर एक प्रतिष्ठित निजी कोचिंग संस्थान में उन्होंने भौतिक विज्ञान पढ़ाया। बच्चों को पढ़ाने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि शिक्षण उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि ऐसा काम है, जिसे वह पूरे मन से करना चाहते हैं।
इसी दौरान आरबीएस डिग्री कॉलेज में एमए अर्थशास्त्र प्रवेश ले लिया। नरेंद्र बताते हैं कि बीटेक के अंतिम वर्ष में उन्हें बेसिक इकोनॉमिक्स पढ़ाई गई थी। इसी दौरान अर्थशास्त्र के प्रति उनके मन में रुचि पैदा हुई। दोस्तों के साथ अर्थशास्त्र से जुड़े विषयों पर चर्चा करने में भी उन्हें दिलचस्पी आने लगी। धीरे-धीरे उन्होंने तय किया कि आगे की पढ़ाई अर्थशास्त्र से ही करेंगे। इसके बाद उन्होंने एमए अर्थशास्त्र में प्रवेश लिया और शानदार प्रदर्शन करते हुए 9.2 सीजीपीए हासिल किया। उनकी इसी उपलब्धि के चलते विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में उन्हें चार स्वर्ण पदक मिलने जा रहे हैं।
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पिता पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त तो भाई हैं शिक्षक
नरेंद्र तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके पिता आरपी सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। बड़े भाई प्रदीप कुमार परिषद विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि छोटी बहन नूतन का विवाह हो चुका है। नरेंद्र ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई भी आगरा से ही पूरी की है।
नरेंद्र का कहना है कि करियर में सफलता के लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति अपनी रुचि को पहचाने और उसी दिशा में आगे बढ़े। यदि किसी काम में मन नहीं लग रहा है तो केवल इसलिए उसे करते रहना जरूरी नहीं कि शुरुआत में वही रास्ता चुना था। उनका लक्ष्य अर्थशास्त्र विषय में ही पीएचडी कर असिस्टेंट प्रोफेसर बनाना है। पीएचडी प्रवेश परीक्षा पास कर चुके हैं।
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नरेंद्र सिंह ने वर्ष 2014 में दयालबाग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। बीटेक पूरा करने के बाद वर्ष 2015 से 2018 तक उन्होंने आईटी सेक्टर में नौकरी की। हालांकि, नौकरी में उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली, जिसकी वह तलाश कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने करियर की दिशा बदलने का फैसला किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आगे चलकर एक प्रतिष्ठित निजी कोचिंग संस्थान में उन्होंने भौतिक विज्ञान पढ़ाया। बच्चों को पढ़ाने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि शिक्षण उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि ऐसा काम है, जिसे वह पूरे मन से करना चाहते हैं।
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इसी दौरान आरबीएस डिग्री कॉलेज में एमए अर्थशास्त्र प्रवेश ले लिया। नरेंद्र बताते हैं कि बीटेक के अंतिम वर्ष में उन्हें बेसिक इकोनॉमिक्स पढ़ाई गई थी। इसी दौरान अर्थशास्त्र के प्रति उनके मन में रुचि पैदा हुई। दोस्तों के साथ अर्थशास्त्र से जुड़े विषयों पर चर्चा करने में भी उन्हें दिलचस्पी आने लगी। धीरे-धीरे उन्होंने तय किया कि आगे की पढ़ाई अर्थशास्त्र से ही करेंगे। इसके बाद उन्होंने एमए अर्थशास्त्र में प्रवेश लिया और शानदार प्रदर्शन करते हुए 9.2 सीजीपीए हासिल किया। उनकी इसी उपलब्धि के चलते विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में उन्हें चार स्वर्ण पदक मिलने जा रहे हैं।
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पिता पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त तो भाई हैं शिक्षक
नरेंद्र तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके पिता आरपी सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। बड़े भाई प्रदीप कुमार परिषद विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि छोटी बहन नूतन का विवाह हो चुका है। नरेंद्र ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई भी आगरा से ही पूरी की है।
नरेंद्र का कहना है कि करियर में सफलता के लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति अपनी रुचि को पहचाने और उसी दिशा में आगे बढ़े। यदि किसी काम में मन नहीं लग रहा है तो केवल इसलिए उसे करते रहना जरूरी नहीं कि शुरुआत में वही रास्ता चुना था। उनका लक्ष्य अर्थशास्त्र विषय में ही पीएचडी कर असिस्टेंट प्रोफेसर बनाना है। पीएचडी प्रवेश परीक्षा पास कर चुके हैं।